भारत की महिला हॉकी टीम ने फाइनल में चीन की ‘दीवार‘ तोड़ जीता एशियाई खेलों का स्वर्ण

India's women's hockey team breached China's 'wall' in the final to win the Asian Games gold

  • ललरेमिसयामी के गोल से स्वर्ण जीत भारत ने किया सीधे 2028 ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई
  • भारत की गोलरक्षक सविता का पेनल्टी स्ट्रोक रोकना फाइनल का निर्णायक मोड़

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : स्ट्राइकर ललरेमसियामी के इकलौते गोल और दूसरे क्वॉर्टर के अधबीच गोलरक्षक सविता पूनिया के रोके पेनल्टी स्ट्रोक की बदौलत भारत की महिला हॉकी टीम ने पिछली चैंपियन चीन की मजबूत दीवार को काकामिगहारा (जापान) एशियाई खेलों के फाइनल में शुक्रवार को तोड़ कर 1-0 से जीत के साथ स्वर्ण पदक जीत सीधे 2028 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर लिया। एशियाई खेलों का यह फाइनल भारत की स्ट्राइकर ललरेमसियामी का 200 वां अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच था और इसमें उन्होंने निर्णायक गोल टीम को जीत दिला दिला कर उसकी झोली में स्वर्ण डाल इसे यादगार बना दिया। भारत की गोलरक्षक सविता पूनिया ने मैच के 22 वें मिनट में चीन की झांग यिंग के पेनल्टी स्ट्रोक को अपने बाएं गोता लगाकर रोक कर बेकार किया और यही इस फाइनल का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 बरस के लंबे अंतराल के बाद 1982 में पहली बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के 44 बरस फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। चीन को फाइनल में एक पेनल्टी स्ट्रोक और पांच पेनल्टी कॉर्नर मिले भारत की रक्षापंक्ति की मुस्तैदी से इन सभी को रोक लिया।

चीन ने खेल खत्म होने से तीन मिनट अपनी गोलरक्षक को बाहर बुला लिया लेकिन भारत ने अपने किलेकी मजबूत चौकसी कर उसे गोल नहीं करने दिया। भारतीय महिला हॉकी टीम को केसरिया जर्सी खूब रास आई और उन्होंने अजेय रह कर एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। भारतीय महिला हॉकी ने विश्व कप में चीन को दो दो की बराबरी पर रोकने के पास वहां मात्र मेजबान नीदरलैंड से एक मैच हार कर दक्षिण अफ्रीका और जर्मनी पर जीत व ऑस्ट्रेलिया व इंग्लैंड को भी बराबरी पर रोक पांचवां स्थान पाने के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए एशियाई खेलों में सुनहरा तमगा अपने नाम किया। भारत के डच कोच शुएर्ड मराइन की रणनीति की बिसात चीन की ऑस्ट्रेलियाई कोच एलिसा अन्नान पर भारी पड़ी। भारतीय महिला हॉकी टीम ने दूसरी बार एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीतने के बाद अपने डच कोच शुएर्ड मराइन को हवा में उछाल कर उनका अभिनंदन किया।

मेजबान जापान की महिला टीम ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ निर्धारित समय तक गोलरहित बराबरी के बाद शूटआउट में 4-2 से जीत दर्ज कर कांसा जीता।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने अब से पहले एशियाई खेलों में इससे पहले मात्र एक बार स्वर्ण पदक दिल्ली में1982 में अपने सभी पांचों में जीत कर अपने नाम किया और तब दक्षिण कोरिया ने दूसरे स्थान पर रह रजत और मलयेशिया ने तीसरे स्थान पर तब कांसा जीता था । भारतीय महिला हॉकी टीम को एशियाई खेलों में 1998 बैंकॉक मे फाइनल में दक्षिण कोरिया से और 2018 में जकार्ता में जापान से फाइनल में 1-2से हारने पर उसे रजत पदक पर ही संतोष करना पड़ा। 2023 में हांगजू एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में 4-0 से हराया था। भारतीय महिला हॉकी टीम फाइनल में जीत का श्रेय कप्तान आक्रामक सेंटर हाफ सलीमा टेटे के साथ ऑलराउंडर स्ट्राइकर व पेनल्टी कॉर्नर हिटर नवनीत कौर, ज्योति, शिल्पी डबास, साक्षी राणा ने रक्षापंक्ति की बनाई ‘मजबूत’ दीवार और मध्यपंक्ति में नेहा गोयल, निकी प्रधान व सुनीलिता टोपो के धैर्य और अनुशासित खेल को है। भारत की सीनियर गोलरक्षक सविता पूनिया ने भले ही पेनल्टी स्ट्रोक रोका लेकिन बिच्छू देवी खरीबम ने अपने किले की मजबूत से चौकसी कर टीम के स्वर्ण पदक जीतने के सपने को साकार किया।

कप्तान सलीमा टेटे दाएं से गेंद को चीन की गोल की ओर बढ़े उनसे साक्षी राणा ने मैच के दसवें मिनट में गेंद संभाली और डी में पहुंची लरेमसियामी की ओर बढ़ा और उन्होंने इस पर उन्होंने रिवर्स स्टिक से गोल कर भारत को 1-0से आगे किया। भारत ने चीन के खिलााफ फाइनल में अपनी इस बढ़त को आखिर तक बरकरार रखा और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। चीन को 19 वें मिनट में दो पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन भारत की रक्षापंक्ति ने मुस्तैदी से इसे रोक लिया। भारत की गोलरक्षक सविता ने झांग यिंग के दूसरे क्वॉर्टर के अधबीच मिले पेनल्टी स्ट्रोक को रोक कर चीन को एक एक की बराबरी पाने से रोक दिया। भारत की सुशीला चानू ने चीन की स्ट्राइकर को ठीक रोका लेकिन अंपायर का पेनल्टी स्ट्रोक देना समझ से परे था। पहले क्वॉर्टर में ललरेमसियामी के बेहतरीन गोल से भारत के बढ़त लेने के बाद दरअसल दूसरे क्वॉर्टर में बढ़ाने की बजाय अपने किले की चौकसी करने ने चीन को अपनी डी में आने का मौका देना

चीन को तीसरे क्ववॉर्टर के तीसरे मिनट मैच में मैच का तीसरा पेनल्टी मिला और इस पर नवनीत कौर ने गोलरेखा पर गेंद रोकी लेकिन अंपायर ने पेनल्टी स्ट्रोक दे दिया भारत के रेफरल पर इसे रद्द कर पेनल्टी कॉर्नर दिया गया। चीन को इस पर मिले एक और पेनल्टी कॉर्नर को रोकने की कोशिश में फर्स्ट रशर भारत की कप्तान सलीमा टेटे की उंगली में चोट आई और वह मैदान से बाहर आ गई। सलीमा की जगह बलजीत कौर मैदान पर आई। चीन ने तीसरे क्वॉर्टर के शुरू में तीन पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए लेकिन भारत की रक्षापंक्ति ने मुस्तैदी दिखा इन्हें नाकाम किया। चीन की यी चेन तीसरा क्वॉर्टर खत्म होने से तीन मिनट पहले भारत की डी में घुसने की लेकिन रक्षापंक्ति ने इसे भी रोक कर नाकाम कर दिया। चौथे क्वॉर्टर के आखिरी में भारत की कप्तान सलीमा टेटे वापस मैदान पर लौट आई।यू अनहुई 53 में मिनट में गेंद को डी में घुसी लेकिन भारत की फु़लबैक सुशीला चानू ने मुस्तैदी से गेंद को अपनी स्टिक पर ले इसे नाकाम कर दिया।