सुरेन्द्र अग्निहोत्री
“समझावनपुर” “कहानी संग्रह,लेखक डॉ. उदित नारायण पाण्डेय द्वारा लिखित एक पुस्तक …..जिसकी सभी कहानियों में “समझावनपुर” छुपा हुआ है । जिंदगी के उधर चढ़ाव भरे रास्ते में तेज रफ्तार अनियंत्रित बच्चे को रौंद कर विकलांग बना जाता है तब समय लड़के को देखकर ठहर जाता है।घटना -दुर्घटना का दंश सारी जिंदगी ढोता है।”समझावनपुर” सडक और रफतार के छोटे- बड़े हर कारणों को लेकर बुनी गई कुल दस कहानियां रफ़्तार, शनिनिवारण , नशा, अपराजिता, कपिला, फेरे, मृगतृष्णा, समझावनपुर, फूल और माली, फक्कड़चाचा संकलित हैं। ।
कहानी की भाषा सरल तो है ही, वाक्यों की रचना भी काफी सशक्त है, जो अपनी बात कहने का पूरे दमखम से रखती हैं ।
पहली कहानी’‘रफ्तार’, जिसमें ‘राज’ नामक एक लड़का है, जिसके माता-पिता अपनी इकलौती संतान की हर इच्छा पूरी करने के लिए तत्पर रहते हैं। आखिर लड़-झगड़ कर बेटा राज किशोर वय में ही एक बाइक खरीदने में सफल हो जाता है और अपने दोस्तों के साथ रोज सड़कों पर देर सबेर फर्राटा भरने का आदी हो चुका होता है। एक दिन वह सुबह अपने दोस्त के साथ तेज रफ्तार अनियंत्रित बाइक से एक स्कूल जाते बच्चे को रौंद कर भागने में सफल रहता है। कुछ अरसे बाद एक दिन वह फिर जब उसी दुर्घटना स्थल से गुजर रहा होता है, तो एक विकलांग लड़के को देखकर ठिठक जाता है।कहानी की भाषा सरल तो है ही, वाक्यों की रचना भी काफी सशक्त है, जो अपनी बात कहने का पूरा दमखम रखते हैं ।
कुछ दर्द बांट लेते हैं, और कुछ दर्द हम किसी से भी नहीं बांट पाते । उस दर्द के साथ ही हमें जीना है और एक दिन ऐसे ही इस जहाँ से अपने दर्द को साथ लेकर चले जाना है । ऐसी ही कहानी है । ‘डॉ. उदित नारायण पाण्डेय की कहानियों में शब्दों का चयन बोलचाल की भाषा के अत्यंत सरल है। सरल शब्दों के माध्यम सेपात्रों के द्वारा कथानक गढ़े गये जो चाक्षुष सुख का आनंद देते है। विद्वानों का मत है कि जो कहानी चाक्षुष सुख प्रदान करती है वह कहानी कालजयी होती है।
डॉ पांडेय द्वारा लिखित इन कहानियों में सड़क के नियमों को आत्मसात कर व्यवहारिक जीवन में उतारने पर जोर देता है तथा सड़क पर हर पल गति और आवेग में संतुलन के महत्व से जीवन में संतुलन की बात कहता है। लेखक का मानना है और तथ्यात्मक भी है, कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं मानवीय गलतियों का ही प्रतिफल है, प्राकृतिक विपदाओं का योगदान तो अंश मात्र ही है, यथा -तेज गति में वाहन चालन, सड़क सुरक्षा के नियमों की अवहेलना, नशा, नींद, थकान, दुख, अवसाद आदि में ड्राइविंग, नाबालिकों का वाहन चालन, वाहन क्षमता से अधिक वाहनीय गतिविधियां, सुरक्षित सफर ( व्यक्ति और वाहन दोनों) के मानकों की अनदेखी आदि आदि….!कहानियां ऐसे कथानक पर लिखी गई है, जो आमतौर से कहानी का विषय नहीं होता है। कहानी में दो विडम्बनाओं को एक साथ दिखाया गया है।
लेखक ने सरल वाक्य रचना, चुटीले शब्दों और प्रवाहमय भाषा के इस्तेमाल से कहानियों को रोचक बना दिया है. वैसे तो संग्रह की ज़्यादातर कहानियां अच्छी हैं. पाठक को सोचने के लिए ज़मीन देती हैं. पर कहीं-कहीं विषयों का दोहराव खटकता है।
- पुस्तक: “समझावनपुर”
- (कहानी संग्रह )
- लेखक:डॉ. उदित नारायण पाण्डेय
- प्रकाशन: शतरंग प्रकाशन
- मूल्य:400





