ओ पी उनियाल
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हरेक को अपने अधिकारों के लिए लड़ने की स्वतंत्रता है। किसी न किसी मांग को लेकर देशभर में तरह-तरह के आंदोलन होते रहे हैं और चलते ही रहते हैं। आंदोलन किसी भी प्रकार का हो शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से ही होती है। उसमें उग्रता तभी आती है जब आंदोलनकारियों की मांगों को अनदेखा किया जाए। इसी उग्रता के बीच कुछ असामाजिक, खुराफती व शरारती तत्व भी आंदोलन के बीच घुसपैठ कर बैठते हैं। ताकि, अफरा-तफरी मचे और आंदोलन विफल हो। ऐसे में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होता है और फिर बल प्रयोग की स्थिति बनती है।
पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच कहीं भी टकराव न हो इसके लिए पुलिस की स्थानीय खुफिया ईकाई का ही दायित्व बनता है कि जो भी धरना, प्रदर्शन हो रहा है वहां आने वालों पर पहले से ही पैनी निगाह रखे, उनकी पहचान कर तत्काल उन्हें गिरफ्त में ले या खदेड़े।
पिछले दिनों सीजेपी ने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा सुधारों की मांग के साथ 20 जून 2026 को अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था।
अपने सुखद भविष्य की कल्पना हर शिक्षित युवा करता है। कड़ी मेहनत करके जब वह किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है और परिणाम पेपर लीक होना या निरस्त होना मिलता है तो उसके सपने चूर-चूर हो जाते हैं। सरकारें आयी और गयी लेकिन सुधार की पहल करना किसी ने उचित नहीं समझा। शिक्षा प्रणाली की खामियों के कारण कई बार इस गलती को दोहराया जाता रहा। किसी भी सत्ताधारी दल ने इसमें परिवर्तन की जरूरत ही नहीं समझी।
यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था। धीर-धीरे आंदोलन से युवा जुड़ते गए और सरकार की हठधर्मिता के चलते आंदोलन एक माह से अधिक चला।
20 जुलाई को सीजेपी समर्थकों ने जंतर-मंतर से संसद मार्च का आह्वान किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निहत्थे युवाओं पर बर्बरता से पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। विशेषकर युवतियों पर गलत तरीके से कुछ सुरक्षाकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज किया गया। अभद्र तरीके से पेश आने पर पुलिस एवं सुरक्षा बलों पर उंगलिया उठी, बर्बरता की जगह-जगह तीखी भर्त्सना हुयी।
आखिरकार सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की मांगें स्वीकार किए जाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई 2026 को सीजेपी ने इस आंदोलन को आधिकारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की।
यदि सरकार व पुलिस आंदोलन शुरु होते ही आंदोलनकारियों के साथ समन्वय बनाकर चले, गंभीरता से विचार करे तो आंदोलन लंबा खिंचने की नौबत नहीं आ सकती। लेकिन राजनीतिक खेला खेलने वाले भी कुचक्र रचकर माहौल बिगाड़ने के प्रयास में रहते हैं।





