क्या बंगाल की आंधी के बाद पंजाब की बारी है ?

After the storm in Bengal, is it Punjab's turn?

अशोक भाटिया

पश्चिम बंगाल में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का जोश हाई है। दिल्ली समेत देश के तमाम राज्यों में स्थित भाजपा कार्यालयों में जीत का जश्न मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी भी दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के जश्न में शामिल हुए व साथ कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया । इस बीच पश्चिम बंगाल में मिली बढ़त के बीच भाजपा ने इस प्रदर्शन को राजनीतिक हथियार बनाना शुरू कर दिया है क्योकि बंगाल में बीजेपी की मजबूत स्थिति को पार्टी बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रही है। यह प्रदर्शन न केवल राज्य की राजनीति में असर डाल सकता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी की रणनीति को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

चुनाव नतीजों के बाद जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए पंजाब के भाजपा नेताओं ने इस बात को दोहराया कि यदि कड़ी मेहनत से पश्चिम बंगाल में असंभव को संभव किया जा सकता है तो उसी तरह की मेहनत पंजाब में भी जीत दिलाएगी। प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने तो कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए कमर कस लेने की बात कहते कहा कि पार्टी का अगला फोकस पंजाब पर ही रहना है।

यही नहीं बंगाल की जीत पंजाब के लिए कई मायनों में अहम है। माना जा रहा है कि इस जीत के बाद भाजपा नेतृत्व का पूरा ध्यान अब पंजाब के 2027 में होने वाले चुनाव पर रहेगा। ऐसे में आगामी दिनों में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच टकराव और बढ़ने के भी आसार बन सकते हैं।2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही लगातार आप और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच किसी न किसी मुद्दे को लेकर टकराव बना रहा है, फिर भले ही वह पानी का मुद्दा हो, आरडीएफ न देने की बात हो, बीबीएमबी का मुद्दा हो या फिर बाढ़ राहत के लिए पैसे नहीं देने की बात हो। हर मामले में दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे हैं।

भाजपा के प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब की बारी! AAP, अपना बोरिया-बिस्तर बांध लो!’ इस बयान से साफ है कि भाजपा इस बढ़त को अन्य राज्यों में भी सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

इससे पहले, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू ने कहा कि बंगाल के बाद पंजाब में तख्तापलट की बारी है। वहीं पंजाब भाजपा ने भी सोशल मीडिया (X) पर पोस्टर जारी कर लिखा- बंगाल के बाद पंजाब की बारी, भाजपा की है पूरी तैयारी। भाजपा के उत्साहित नेताओं की बयानबाजी को लेकर आप सरकार चला रहे मुख्यमंत्री भगवंत ने पलटवार किया करते हुए कहा कि ये शेखचिल्ली के सपने हैं। पंजाब में BJP को वोट नहीं मिलेंगे। पंजाबी जिस बात पर अड़ गए, उस पर अड़ गए।

वहीं आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया सपोर्टर्स अब पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से 2027 इलेक्शन के लिए पंजाब पर फोकस करने की बात कह रहे हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहना है कि भाजपा ने बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढहा दिया। साफ तौर पर अगली बारी पंजाब की ही होगी।ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे बंगाल में भाजपा कभी सरकार नहीं बना सकी, उसी तरह पंजाब में अकेले दम पर सत्ता पाना भी भाजपा के लिए किसी सपने से कम नहीं। भाजपा अब पंजाब में एग्रेसिव ढंग से पॉलिटिक्स करेगी।इससे आप में टूट का खतरा बढ़ेगा। एक्सपर्ट बंगाल चुनाव का असर कांग्रेस पर भी मान रहे हैं।

बताया जाता है कि भाजपा जैसे बंगाल जीत गई। अब वह पंजाब में भी साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाएगी। भाजपा के लिए बंगाल की तरह पंजाब भी सियासी कामयाबी की बड़ी पहेली रहा है। ऐसे में अब बंगाल का फॉर्मूला पंजाब में भी लागू होगा।यह भी सही है कि भाजपा की बंगाल जीत के बाद आप में टूट का खतरा बढ़ेगा। विधायक समझेंगे कि अगर भाजपा बंगाल में सरकार बना सकती है तो पंजाब में भी चौंका सकती है। उनका भरोसा बढ़ेगा और टूट के मौके ज्यादा बनेंगे। इसमें आप छोड़ने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा और संदीप पाठक उनके बड़े हथियार बन सकते हैं।

पर यह भी बताया जाता है कि अभी ये टूट नहीं होगी। अगर अभी कोई टूटकर गया तो आप सरकार उसे नहीं छोड़ेगी। रेड होंगी या फिर केस भी हो सकता है। फिर जमानत के चक्कर या फिर जेल जाना होगा। जैसा कि आप छोड़ने वाले राज्यसभा सांसदों के साथ हुआ।इसमें राजिंदर गुप्ता पर रेड हुई, राघव चड्‌ढा और हरभजन सिंह की सिक्योरिटी वापस ले ली, संदीप पाठक पर भी FIR की चर्चा है। ऐसे में कोई रिस्क नहीं लेगा। असली टूट चुनाव आने के 1-2 महीने के पहले होगी।

बताया यह भी जाता है कि बंगाल में भाजपा जीत गई, इसका इंपैक्ट बिल्कुल पंजाब में दिखेगा। बंगाल के बाद भाजपा पंजाब में भी चौंकाने वाली परफॉर्मेंस दिखा सकती है। ऐसा भी लग रहा है कि पंजाब में संघ भी चुनाव में भाजपा की प्लानिंग को लेकर एक्टिव है।भाजपा पंजाब को बंगाल के बाद रिजल्ट के बाद ज्यादा सीरियस लेगी। अब वह ये मानेगी कि अगर बंगाल फतेह हो सकती है तो पंजाब भी इंपासिबिल नहीं है। इसके लिए भाजपा डेरा फैक्टर की गोटियां भी सेट कर रही है। इसमें डेरा बल्लां हो या ब्सास व डेरा सच्चा सौदा, तीनों जगह भाजपा संपर्क में है। हालांकि, इसका वोट बैंक पर कितना असर होता है, यह कभी सामने नहीं आता, लेकिन एक परसेप्शन जरूर भाजपा बनाने की कोशिश कर रही है।बंगाल चुनाव से बड़ा मैसेज कांग्रेस के लिए भी आ रहा है। यहां सिर्फ भाजपा और TMC के बीच फाइट दिखी, लेकिन कांग्रेस डबल फिगर के आंकड़े तक नहीं पहुंची। पंजाब में भी अगर भाजपा का वोट शेयर बढ़ा तो कांग्रेस-आप को डेंट लग सकता है। ऐसा भी संभव है कि 2027 में पंजाब का चुनावी मुकाबले का शोर आप और भाजपा के बीच का ज्यादा हो।

कुछ लोगों का कहना है कि बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत पंजाब की चुनावी राजनीति को तय करेगी। भाजपा बंगाल जीत गई, अब 2027 में भाजपा मिशन पंजाब को इनडेप्थ तरीके से लागू करेगी।जो फॉर्मूला बंगाल में कामयाब रहेगा, उसे पंजाब के लिहाज से भी देखा जाएगा। विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर आप में भी टूट दिखाई दे सकती है। यही वजह है कि अभी राघव चड्‌ढा और संदीप पाठक पंजाब को लेकर बहुत एक्टिव नजर नहीं आ रहे। अभी बैकएंड प्लानिंग होगी, फिर भाजपा मैदान में आएगी और पंजाबियों को यकीन दिलाएगी कि बंगाल में लोगों ने भरोसा किया तो इस बार पंजाब को भी भाजपा को मौका देना चाहिए।

पंजाब भाजपा के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि मेरा मानना है कि समझदार लोग बंगाल और पंजाब दोनों जगह रहते हैं। जब बंगाल और पंजाब के बीच तुलना की जाती है, तो वे आमतौर पर कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर होती है, और बंगाल के मामले में, आतंकवाद और गैंगस्टरवाद को लेकर। पंजाब की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, लोग आश्चर्य करते हैं कि यदि बंगाल खुद को कुशासन से मुक्त कर सकता है, तो पंजाब क्यों नहीं?हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कहना है कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के लोगों का शोषण किया। आज बंगाल आजाद हो गया है। प्रधानमंत्री की नितियों के कारण बंगाल बच गया है। बंगाल के बाद पंजाब की बारी है। मोदी जी ने कई योजनाएं लागू कर रखी हैं, कर देंगे काम।पंजाब में आम आदमी पार्टी ने घोषणा की थी कि महिलाओं को एक हजार रुपए हर महीने देंगे। वहां के मुख्यमंत्री को पता तो चलता नहीं। शाम को वो राजी (खुश) हो जाता है, उसे 5 बजे के बाद सारा पिंड मित्रां दा लगदा।

वहीँमुख्य मंत्री भगवंत मान का कहना है कि बंगाल में भाज्प्पा आ गई। असम में पहले ही भाजपा थी। पंजाब में अभी तो बदलाव हुआ है। पंजाब को लेकर भाजपा सोचे ना कि ऐसा कुछ कर लेंगे। हम पंजाबी हैं, जिस बात पर अड़ गए, उस पर अड़ गए। पंजाब का भाजपा ने बहुत नुकसान किया। RDF का पैसा रोक लिया। 700 किसान शहीद कर दिए। हर बात पर हमसे लड़ते हैं।

मान ने कहा– कभी कहते हैं तुम्हारी यूनिवर्सिटी छीन लेंगे। कभी कहते हैं चंडीगढ़ हमारा हो जाएगा, उसे अलग कर देंगे। भाखड़ा डैम के पानी को अपना बता रहे हैं, प्रबंधक लगाने की बात करते हैं।उन्होंने कभी पंजाब के हक की बात तो की नहीं, सुनील जाखड़ और कैप्टन अमरिंदर सिंह को पूछ लो, बिट्‌टू भी भाजपा में हैं। किस मुंह से वोट मांगने आएंगे। पब्लिक है सब जानती है।

भाजपा के अगला नंबर पंजाब का कहे जाने पर CM भगवंत मान ने कहा कि ये शेखचिल्ली के सपने हैं। किसानों, योद्धाओं, फकीरों और साहित्यकारों की धरती है, पंजाब के लोग ऐसे झांसे में नहीं आते। वह पॉलिटिकली अवेयर हैं और वह परखकर वोट डालते हैं। ऐसे भी उनके पास एक विधायक है और लोकसभा का तो कोई सांसद है ही नहीं।

बताते है कि अब इस बात की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आगामी दिनों में सीबीआइ और ईडी की ओर से पंजाब में विभिन्न मामलों की जांच में तेजी आए। माना जा रहा है कि इस जांच की आंच में कई बड़े प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी आ सकते हैं।ऐसे में केंद्र सरकार पंजाब में तैनात प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को भी संवैधानिक तौर पर कार्य करने संकेत दे सकती है। सीबीआइ की ओर से गिरफ्तार निलंबित डीआइजी हरचरन सिंह भुल्लर के मामले में जांच में तेजी को भी इसी रूप में देखा जा रहा है। सीबीआइ इस मामले की जांच के लिए बड़े आइएएस-आइपीएस अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने का सिलसिला भी शुरू कर सकती है।