एन जी भट्ट
राजस्थान की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखी जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में सोमवार को हुई मुलाकात के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तीन महीनों में तीसरी बार हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मार्च के अंत में हुई औपचारिक भेंट के बाद अब लगातार दिल्ली दौरों और शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों को केवल शिष्टाचार मुलाकात मानने के बजाय राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को हमेशा विशेष महत्व दिया जाता रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह,पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन , संगठन मंत्री बी एल सन्तोष तथा भाजपा के राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व के अन्य नेताओं और मंत्रियों के साथ लगातार बैठकों को आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय शीघ्र सामने आ सकते हैं। सबसे अधिक चर्चा राज्यसभा की आगामी रिक्त होने वाली तीन सीटों को लेकर है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा राजस्थान में अपने मजबूत संख्याबल के आधार पर राज्यसभा में नए चेहरों को भेजने की रणनीति बना रही है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से दो सीटों पर सत्ताधारी दल भाजपा की जीत सुनिश्चित है।पार्टी के भीतर संगठनात्मक रूप से सक्रिय नेताओं, सामाजिक समीकरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों तथा राष्ट्रीय नेतृत्व के विश्वासपात्र कार्यकर्ताओं के नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। इसमें केन्द्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के साथ ही डॉ सतीश पूनिया, राजेन्द्र राठौड़, अल्का गुर्जर,गोविंद वल्लभ और नरसी कुलरिया आदि नामों की चर्चा है। भाजपा नेतृत्व राज्यसभा चुनाव को केवल संसदीय प्रतिनिधित्व के रूप में नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक संतुलन और संगठनात्मक मजबूती के अवसर के रूप में भी देख रहा है।
इसी के साथ भजनलाल सरकार के मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं। वर्तमान मंत्रिपरिषद में कुछ पद अभी भी रिक्त हैं तथा क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ-साथ वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में नए चेहरों को अवसर दे सकता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव तथा संगठन में नई जिम्मेदारियां भी देखने को मिल सकती हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं।
राजस्थान भाजपा में संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। सोमवार को ही प्रदेश को नया संगठन मंत्री मिला है और उत्तराखंड के अजेय कुमार को राजस्थान भाजपा का संगठन मंत्री बनाया गया है। राजस्थान से चंद्रशेखर के जाने के बाद से पद खाली चल रहा था जिस पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अजेय कुमार की नियुक्ति की है। अजेय कुमार उत्तराखंड के भाजपा के संगठन महामंत्री भी हैं। अजेय कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय तक जुड़े हैं तथा विभाग प्रचारक से लेकर प्रांत प्रचारक तक का दायित्व निभा चुके हैं। वे उत्तराखंड में जिला प्रचारक एवं विभाग प्रचारक भी रह चुके हैं। भाजपा की कार्यशैली में संगठन मंत्री का पद अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि यही पद संगठन और सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है। बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की रणनीति, कार्यकर्ता समन्वय, चुनावी प्रबंधन और नेतृत्व के निर्णयों के क्रियान्वयन में संगठन मंत्री की भूमिका निर्णायक होती है।
नए संगठन मंत्री की नियुक्ति को भाजपा के आगामी राजनीतिक रोडमैप से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी राजस्थान में अपनी संगठनात्मक पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। पंचायत चुनाव, नगर निकाय चुनाव और भविष्य की चुनावी चुनौतियों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व संगठन में नई ऊर्जा और नई कार्यशैली का संदेश देना चाहता है। यही कारण है कि संगठन मंत्री के परिवर्तन को सामान्य प्रशासनिक बदलाव के बजाय रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास, निवेश, आधारभूत संरचना, जल प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों पर लगातार जोर दे रही है। दूसरी ओर भाजपा संगठन आगामी चुनावी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनसंपर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री मोदी से लगातार मुलाकातें यह संकेत देती हैं कि राजस्थान भाजपा के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं में बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा राजस्थान में वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर चुकी है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव, मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की लगातार दिल्ली यात्राएं और शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से तीन महीनों में तीसरी भेंट केवल औपचारिक मुलाकात नहीं मानी जा रही है। राज्यसभा चुनाव, संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन तथा नए संगठन मंत्री की नियुक्ति जैसे मुद्दों को लेकर भाजपा के भीतर व्यापक मंथन चल रहा है। आने वाले सप्ताह राजस्थान की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं और भाजपा संगठन तथा सरकार दोनों स्तरों पर कई बड़े निर्णय सामने आ सकते हैं।





