कृषि, प्रकृति और एआई के संगम से विकसित भारत का नया सपना” “बस्तर से नोएडा तक गूंजी जैविक खेती और ग्रामीण नवाचार की आवाज
दीपक कुमार त्यागी
- “नेचुरल ग्रीन हाउस” नवाचार को किसानों के लिए गेम- चेंजर मॉडल बताया गया।
- कृषि, स्वास्थ्य, एआई और विकसित भारत-2047 विषय पर हुई विशेष राष्ट्रीय विचार गोष्ठी।
- डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी ने सम्मान को बस्तर की धरती और आदिवासी समाज को समर्पित किया।
नोएडा : छत्तीसगढ़ के बस्तर के प्रगतिशील किसान और कृषि क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी को नोएडा में आयोजित एक भव्य समारोह में सोमवार को “कृषि ऋषि सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान वरिष्ठ पत्रकार उदय सिन्हा, अमिताभ अग्निहोत्री और पीटीआई डिजिटल के चीफ एडिटर प्रत्यूष रंजन ने संयुक्त रूप से प्रदान किया। समारोह में राष्ट्रीय मीडिया से जुड़े सैकड़ों पत्रकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और समाजसेवियों की उपस्थिति रही। सम्मान समारोह के दौरान डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी सहित अन्य अतिथियों ने मीडिया क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को भी सम्मानित किया।
कार्यक्रम में सम्मान समारोह से पूर्व “कृषि, स्वास्थ्य, एआई और 2047 का विकसित भारत” विषय पर एक विशेष विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि देश की अधिकांश आबादी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है, लेकिन मीडिया में कृषि विषयों को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं तथा विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कृषि आधारित नवाचारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष बल दिया।
डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी ने अपने संबोधन में अपने चर्चित “नेचुरल ग्रीन हाउस” नवाचार का भी उल्लेख किया, जिसे देश के किसानों के लिए एक गेम चेंजर पहल माना जा रहा है। यह प्राकृतिक संरचना पेड़ों और जैविक संसाधनों पर आधारित है, जिससे अत्यंत कम लागत में खेती को सुरक्षित और अधिक उत्पादक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जहां पारंपरिक पॉलीहाउस पर भारी खर्च आता है, वहीं नेचुरल ग्रीन हाउस कम लागत में किसानों को बेहतर उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन का लाभ देता है। इस नवाचार को देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों द्वारा सराहा जा रहा है तथा इसे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार उदय सिन्हा ने कहा कि मीडिया को कृषि क्षेत्र की कवरेज बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने पत्रकारों से कृषि और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील होने का आह्वान किया।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि किसान और कृषि लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को अक्सर चुनावी मुद्दा बनाया गया, लेकिन उनकी वास्तविक समस्याओं और जरूरतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
पीटीआई डिजिटल के चीफ एडिटर प्रत्यूष रंजन ने पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई कंटेंट निर्माण, शोध और डेटा विश्लेषण में महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो रहा है, लेकिन इसके उपयोग के दौरान फैक्ट-चेक, बायस-चेक और संपादकीय निगरानी को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकार का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता और क्षमता को बढ़ाने वाला प्रभावी उपकरण है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विकसित भारत-2047 के निर्माण में कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने यह “कृषि ऋषि सम्मान” मां दंतेश्वरी हर्बल समूह तथा बस्तर की उस पवित्र धरती और अपने आदिवासी भाइयों-बहनों को समर्पित किया, जिन्होंने हर संघर्ष और हर प्रयास में उनका निरंतर साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि बस्तर की जैविक खेती, आदिवासी परंपराओं, प्रकृति आधारित जीवनदृष्टि और ग्रामीण भारत की सामूहिक शक्ति का सम्मान है।





