जीवन धूप-छांव है: सुख-दुःख का अनंत चक्र

Life is sunshine and shadow: an endless cycle of joy and sorrow

सुनील कुमार महला

जीवन वास्तव में धूप-छांव की तरह है-कभी सुख है तो कभी दुःख।कभी सफलता है तो कभी असफलता तो, कभी संघर्ष। वास्तव में, यही परिवर्तन जीवन का स्वाभाविक नियम है। इसलिए अच्छे समय में प्रसन्न रहना चाहिए, पर यह भी स्मरण रहे कि वह स्थायी नहीं है। उसी प्रकार कठिन समय में धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि वह भी एक दिन बीत ही जाता है। जीवन में हर व्यक्ति के सामने अच्छे और बुरे दोनों दौर आते हैं, इसलिए परिस्थितियाँ कैसी भी हों, जीवन में हर समय विनम्रता और संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।

मनुष्य का स्वभाव जल के समान निर्मल, सरल और शांत होना चाहिए-जैसे किसी झील का स्थिर जल। विनम्रता व्यक्ति को ऊँचा बनाती है, क्योंकि अभिमान क्षणिक है, पर नम्रता एक स्थायी गुण है। सुख और दुःख जीवन के दो पहिए हैं, जो समय के साथ घूमते रहते हैं। जैसे धूप के बाद छांव आती है, वैसे ही कठिनाइयों के बाद सुख का समय भी आता है। संसार में कोई भी अवस्था सदा नहीं रहती।

हमें हर परिस्थिति में सृष्टि, ईश्वर या प्रकृति का धन्यवाद करना चाहिए कि जो जीवन मिला है, वह एक अवसर है। संयम, धैर्य और सकारात्मक सोच मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी सहज रहना और शिकायत के स्थान पर स्वीकार का भाव रखना मन को मजबूत बनाता है। जब हम अच्छा सोचते हैं, तो हमारे कर्म भी उसी दिशा में चलते हैं। इसलिए नकारात्मक विचारों, नकारात्मक वातावरण और निराशा फैलाने वाले लोगों से दूरी रखना उचित है।

कर्म ही जीवन का सार है। ईमानदारी से मेहनत करना, अपने कार्य को पूजा मानना और परिणाम को ईश्वर पर छोड़ देना सच्ची जीवन-दृष्टि है। साथ ही मानवता, दया, करुणा और प्रकृति-प्रेम को अपनाना आवश्यक है। किसी को कष्ट देकर कोई भी व्यक्ति सच्चा सुख नहीं पा सकता। जो हम संसार को देते हैं, वही किसी न किसी रूप में लौटकर हमारे पास आता है। इसलिए अच्छा करें, अच्छा सोचें और अच्छा फैलाएँ-यही जीवन का शाश्वत सत्य है।