शशि थरूर की मौजूदगी में डॉक्यूमेंट्री ‘1947: ब्रेक्जिट इंडिया’ की विशेष स्क्रीनिंग नई दिल्ली में आयोजित

Special screening of documentary '1947: Brexit India' held in New Delhi in presence of Shashi Tharoor

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली: लंबे समय से चर्चा में रही डॉक्यूमेंट्री फिल्म “1947: ब्रेक्जिट इंडिया” की विशेष स्क्रीनिंग रविवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन एक्लेक्टिक फिल्म्स और डॉ. स्वर्णजीत सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सांसद और प्रसिद्ध लेखक डॉ. शशि थरूर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा कई राजनयिक, इतिहासकार और मीडिया जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां भी मौजूद रहीं।

निर्देशक संजीवन लाल, प्रसिद्ध लेखिका शमा जैदी द्वारा लिखित और अभिनेता बोमन ईरानी द्वारा नैरेट की गई यह डॉक्यूमेंट्री इतिहास को एक अलग नजरिए से प्रस्तुत करती है। फिल्म 338 वर्षों तक भारत में रहे ब्रिटिश शासन का आर्थिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करती है। इसमें बताया गया है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे ब्रिटेन ने किस तरह जल्दबाजी में भारत के विभाजन का फैसला लिया और उससे जुड़ी मानवीय तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भारत और पाकिस्तान पर छोड़ दिया।

डॉक्यूमेंट्री में डॉ. शशि थरूर और बोमन ईरानी के अलावा विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डैलरिम्पल, सुरक्षा विशेषज्ञ कमोडोर उदय भास्कर, राजनीतिक वैज्ञानिक डॉ. इश्तियाक अहमद सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के विचार भी शामिल हैं।

इस विशेष स्क्रीनिंग में एच.ई. एम. रियाज हमीदुल्लाह, एच.ई. एम्बेसडर मलिकी, एच.ई. महिशिनी कोलोन, नसीर अब्दुल्ला और अन्य कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक और विचारोत्तेजक प्रतिक्रिया मिली। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह फिल्म 1947 के घटनाक्रम को समझने के लिए एक नया और जरूरी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो इतिहास के आर्थिक पहलुओं पर रोशनी डालती है।

कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. शशि थरूर ने कहा, “इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि वह वर्तमान को भी आकार देता है। भारत और ब्रिटिश शासन के लंबे संबंधों पर आधारित इस विचारशील परियोजना का हिस्सा बनकर मुझे खुशी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जेन Z और जेन अल्फा भारत में ब्रिटिश शासन और स्वतंत्रता के इतिहास को सही मायनों में समझना चाहते हैं, तो उन्हें यह डॉक्यूमेंट्री जरूर देखनी चाहिए।

फिल्म के निर्माता और कॉन्सेप्ट क्रिएटर डॉ. स्वर्णजीत सिंह ने कहा, “दस वर्षों से अधिक समय तक किए गए शोध पर आधारित इस परियोजना को इतने प्रतिष्ठित लोगों से सराहना मिलना बेहद संतोषजनक है। हमारा उद्देश्य एक पारंपरिक ऐतिहासिक फिल्म बनाना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य की आर्थिक सच्चाइयों का विश्लेषण करना था। ब्रिटिश व्यापारी बनकर भारत आए, हमारे संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित किया और जब आर्थिक स्थिति उनके खिलाफ होने लगी तो जल्दबाजी में देश का विभाजन कर चले गए। यह प्रतिक्रिया बताती है कि लोग 1947 के पीछे की आर्थिक सच्चाई जानना चाहते हैं।”

निर्देशक संजीवन लाल ने कहा, “दस वर्षों के शोध और आंकड़ों को एक प्रभावशाली कहानी में बदलना हमारे लिए बड़ी चुनौती थी। हमारा प्रयास था कि आंकड़े और मानवीय त्रासदी दोनों एक साथ सामने आएं। मीडिया और विशिष्ट अतिथियों से मिली प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि विभाजन को आर्थिक नजरिए से देखने पर पूरी चर्चा का स्वरूप बदल जाता है।”

यह डॉक्यूमेंट्री इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) 2023 और मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) 2024 में आधिकारिक चयन का हिस्सा रह चुकी है। अब यह फिल्म जल्द ही एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डिजिटल प्रीमियर के लिए तैयार है।