सैन्य तनाव का असर खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों पर भी देखने को मिल रहा, हालात डरावने

The escalating military tensions between the US, Iran, and Israel are also affecting Indian expatriates living in Gulf countries. The situation is frightening

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

मध्य पूर्व में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच लगातार बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब खाड़ी देशों में रह रहे लाखों प्रवासी भारतीयों पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध जैसे हालात की आशंका ने विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों के मन में चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

मध्य पूर्व के कई हिस्सों में हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान समर्थित ठिकानों पर कार्रवाई तथा ईरान की जवाबी चेतावनियों ने पूरे क्षेत्र में तनाव का वातावरण बना दिया है। इस स्थिति का सीधा प्रभाव खाड़ी देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर और ओमान में रह रहे प्रवासी समुदाय पर पड़ रहा है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों में लगभग 80 से 90 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या राजस्थान, केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना के श्रमिकों तथा पेशेवरों की है। राजस्थान के दक्षिणी क्षेत्रों उदयपुर डूंगरपुर बांसवाड़ा प्रतापगढ़ चित्तौड़गढ़ सलूंबर आदि से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए इन देशों के काम कर रहे है। इन लोगों की आजीविका पूरी तरह से वहां की अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। जैसे-जैसे युद्ध की आशंका बढ़ रही है, वैसे-वैसे रोजगार, सुरक्षा और आवागमन को लेकर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव व्यापक युद्ध में बदलता है तो सबसे पहले इसका असर तेल उत्पादन और व्यापार पर पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यदि यहां सैन्य संघर्ष बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में निर्माण, सेवा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की नौकरियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

युद्ध की आशंका से हवाई यातायात पर भी असर पड़ने लगा है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग बदलने या रद्द होने की खबरें सामने आ रही हैं। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो भारत लौटने की योजना बना रहे प्रवासी भारतीयों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। संकट की स्थिति में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है, जैसा कि पहले कई संघर्षों के दौरान देखा गया है।भारत सरकार भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों में स्थित भारतीय दूतावासों को सतर्क रहने और प्रवासी भारतीयों से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

खाड़ी देशों में रहने वाले कई भारतीयों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। खासकर वे लोग अधिक चिंतित हैं जिनके परिवार भारत में रहते हैं और जिनकी आय पर उनका पूरा घर निर्भर करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर भी पड़ेगा। ऐसे में खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और हितों की रक्षा भारत सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच खाड़ी देशों से लौटे प्रवासी भारतीय, परिजनों की आंखों में खुशी के आँसू छलक उठे. अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों पर भी देखने को मिल रहा है.

युद्ध जैसे हालातों के बीच दुबई में रह रहे बीकानेर के कई प्रवासी भारतीय सुरक्षित अपने वतन लौट आए. बीकानेर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली और खुशी के आंसू छलक पड़े. दुबई से लौटे युवकों ने बताया कि हालात बेहद डरावने थे. आसमान में लगातार आग के गोले दिखाई दे रहे थे और पूरे क्षेत्र में असामान्य तनाव का माहौल था.

उन्होंने कहा कि अब तक यूएई को सुरक्षित माना जाता था, लेकिन मौजूदा हालातों ने सभी को चिंता में डाल दिया है. युवकों ने बताया कि युद्ध जैसी स्थिति के कारण दुबई से भारत की फ्लाइट मिलना मुश्किल हो गया था. ऐसे में उन्होंने लंबा सड़क मार्ग तय कर ओमान का रुख किया. वहां से गोवा के लिए फ्लाइट मिली और गोवा पहुंचने के बाद वे बीकानेर पहुंचे.

दुबई से लौटने वाले प्रवासियों ने कहा कि मौजूदा हालातों के कारण अब उन्हें आर्थिक उपार्जन के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं. उन्होंने युद्ध के दौरान देखे गए हालातों का आंखों देखा हाल साझा करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरक्षित घर लौटना ही था.

कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान-इजराइल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है। इसके प्रभाव दूर तक महसूस किए जा रहे हैं और खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों के मन में भी अनिश्चितता और भय का माहौल बनने लगा है। आने वाले दिनों में कूटनीति की सफलता ही तय करेगी कि यह संकट कितना गहराता है और इसका प्रवासी भारतीयों के जीवन पर कितना प्रभाव पड़ता है।