नारी इस जगत की प्राण

Women are the life of this world

गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’

मनुस्मृति के अध्याय ३ में उल्लेखित “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” [श्लोक ५६] का आशय है “जहां स्त्रीजाति का आदर-सम्मान होता है, उनकी आवश्यकताओं -अपेक्षाओं की पूर्ति होती है, उस स्थान, समाज, तथा परिवार पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं”। हाँलाकि मनुस्मृति एक विवादास्पद ग्रन्थ माना जाता है जबकि यह सर्वविदित है कि हमारे ऋग्वेद हो या यजुर्वेद, सामवेद हो या अथर्वेद, सभी नारी को अत्यन्त महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं । इसलिये उपरोक्त मनुस्मृति वाला श्लोक भी हमारे पूर्वजों के विचारों / मान्यताओं को प्रतिपादित करता है यानि नारी का समाज में सनातन काल से ही एक महत्वपूर्ण सम्मानित स्थान है ।

इसलिये हम कह सकते हैं कि हमारे भारत देश में हमेशा से नारी केंद्र में ही रही है यानि वैदिक काल से लेकर आज तक हमेशा नारी की सुरक्षा , शिक्षा पर हमेशा ध्यान दिया गया है और हर तरह से सम्मानजनक स्थान देने की कोशिशें होती रही हैं । लेकिन इसके बावजूद नारियाँ आज तक अपना सही स्थान पाने के लिये संघर्ष कर रही हैं । यह सभी जानते हैं कि संसार में किसी भी पुरूष की उत्पत्ति और उसकी पहचान एक नारी से ही होती है और इस दुनिया मे वह चाहे जितना महान हो एक नारी के कोख से ही जन्म लेकर मृत्यु को प्राप्त करता है।

अब आज अन्तर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महिलाओं के सशक्तिकरण का सवाल बहुत मायने रखता है क्योंकि जब महिलायें सशक्त होंगी तभी वे अपने घर के साथ साथ समाज को भी सशक्त बना पायेंगी। यह सर्वमान्य तथ्य है कि एक सशक्त समाज की सशक्त राष्ट्र निर्माण मे महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इस तरह महिलायें राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

इन सबको जानते हुये भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सारे राजनैतिक दल संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण को उस तरह मजबूती प्रदान नहीं कर पायें हैं जैसा महिलायें चाहती हैं।इस तथ्य पर भारत में भी परिस्थितिभिन्न नहीं है। यहाँ भी सभी राजनैतिक दल वायदे तो बहुत करते हैं, लेकिन अभी भी विधानसभाओं एवं संसद की तो बात छोड़िये, नौकरी में महिलाओं को 30% आरक्षण दिया नहीं गया है जिसके चलते आज भी महिलायें संघर्षरत हैंं।इसके बावजूद हमारे देश में,पारिवारिक हो या सामाजिक, व्यावसायिक क्षेत्र हो या नौकरी सभी जगह महिलायें अपना परचम फैलानें में सफल नज़र आ रही हैं।इन सबके पीछे मुख्य कारण है, हम सब भारतीयों की बदली हुई सोच यानि आज परिवार हो या सरकार सभी बाल विवाह, भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रथा, बाल मजदूरी, घरेलू हिंसा आदि सब पर सामाजिक एवं क़ानूनी रूप से प्रतिबन्ध लगाने में एक सक्रिय भूमिका अदा की है। इस तरह हमारे देश में बालिका शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, बाल विवाह, स्वास्थ्य वगैरह क्षेत्रों में अनेकों सुधारात्मक कदम भी निरन्तर उठाये जा रहे हैं जिसके चलते आजकल महिलायें तकनीकी, प्रबन्धकी, प्रशासनिक, आर्थिक, रक्षा वगैरह अनेक क्षेत्रों में कार्यरत हैं यानि आज शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा जिसमें महिलाओं की उपस्थिति दर्ज ना हुई हो। उदाहरण के तौर पर आज अनेकों महिलायें सफल वैज्ञानिक के तौर पर दवा क्षेत्र हो या अन्तरिक्ष सभी जगह अपना परचम फैला रही हैं। इसी तरह विदेशी मामले हो या कानूनी या फिर रक्षा , सभी जगह अपनी पैठ बना पाने में सफल हैं।

अन्त में आपके ध्यान्नार्थ हमारे देश में नौकरी वाले स्थान में सुरक्षा की दृष्टि के साथ साथ सुविधा से सम्बन्धित अनेक सार्थक कदम भी उठाये गये हैं।इसके साथ साथ महिलाओं को आत्म-प्रतिरक्षा के गुर भी व्यापक रूप से सिखाये जा रहे हैं ताकि वे अपना बचाव स्वयं कर सकें । इन सबके बावजूद यह उल्लेखित करना भी जरुरी है कि अभी भी महिलाओं के संरक्षण और सशक्तिकरण वाली प्रक्रिया जारी रखना अति आवश्यक है क्योंकि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है।