संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष : नवाचारों के दो वर्ष राजस्थान विधानसभा के परिवर्तनकारी सफर का सशक्त दस्तावेज

The rise of parliamentary culture: Two years of innovations, a powerful document of the transformative journey of the Rajasthan Legislative Assembly

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष-नवाचारों के दो वर्ष केवल एक पुस्तिका नहीं बल्कि राजस्थान विधानसभा की विकास यात्रा और विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के दो वर्षों की उपलब्धियों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

संसदीय परंपराओं को सशक्त बनाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को जनसुलभ बनाने तथा राजस्थान विधानसभा की कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीकों के समावेश आदि दृष्टि से राज्य विधानसभा के पिछले दो वर्ष कई उल्लेखनीय उपलब्धियों के वर्ष रहे हैं। विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में राजस्थान विधानसभा ने अनेक ऐसे नवाचार किए हैं, जिन्होंने न केवल संसदीय संस्कृति को नया आयाम दिया है, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जन सामान्य की भागीदारी और विश्वास को भी मजबूत किया है। इन्हीं उपलब्धियों को समेटती पुस्तिका “संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष : नवाचारों के दो वर्ष” राजस्थान विधानसभा के परिवर्तनकारी सफर का एक सशक्त दस्तावेज बन कर उभरा है।

154 पृष्ठों की यह पुस्तक राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की दो वर्ष की उपलब्धियों का संकलन है। इस पुस्तक के प्रारंभ में विधानसभा से जुड़ता जनमानस और जन दर्शन लोकतांत्रिक संवाद का सार्थक नवाचार तथा राष्ट्र गान से राष्ट्र भाव तक शीर्षक से विधानसभा में नव सृजित वन्दे मातरम् दीर्घा का सचित्र वर्णन किया गया है।

पुस्तक में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चित्रों सहित शुभकामना सन्देश और विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) की देश और विदेशों की यात्राओं और देश-विदेश के संसदीय भवनों में हुई महत्वपूर्ण बैठकों तथा यात्राओं के सचित्र विवरण, नई दिल्ली में शीर्ष नेताओं और केंद्रीय मन्त्रियों से हुई मुलाकातों, उपराष्ट्रपति भवन में उनकी पुस्तक “सनातन की अटल दृष्टि पुस्तक” के विमोचन समारोह, राजस्थान विधान सभा का अवलोकन करने आए देश-विदेश के विभिन्न प्रतिनिधियों और राज्य विधानसभा के अध्यक्षों की यात्राओं के साथ ही विधानसभा में संसद की तर्ज पर प्रस्तावित सेण्ट्रल हॉल की अवधारणा तथा अन्य संसदीय और विधायी कार्यक्रमों आदि की सचित्र जानकारी दी गई है।

राजस्थान विधानसभा ने विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में पारंपरिक विधायी कार्यों के साथ-साथ जन-जागरूकता और लोकतांत्रिक शिक्षा को भी प्राथमिकता दी है। विधानसभा परिसर में विकसित की गई विभिन्न थीम आधारित दीर्घाएं और प्रदर्शनियां इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विधानसभा के डिजिटल म्यूजियम में संविधान, स्वतंत्रता आंदोलन, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राष्ट्र एवं राजस्थान निर्माण तथा अब तक हुए विकास से जुड़े विषयों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत कर आमजन, विद्यार्थियों और युवाओं को लोकतंत्र की जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।राजनीतिक आख्यान दीर्घा और वंदे मातरम् दीर्घा सभी के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। विधानसभा के म्यूजियम को अब तक पच्चास हजार से भी अधिक लोग देख चुके हैं ।

डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी राजस्थान विधानसभा ने उल्लेखनीय प्रगति की है। सभी दो सौ विधायकों की सीट पर टेबलेट्स लगवा कर विधान सभा को पेपर लेस बनाना, विधान सभा सदस्यों के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रणाली, ई-ऑफिस व्यवस्था, दस्तावेजों के डिजिटलीकरण तथा कार्यवाही के तकनीकी उन्नयन जैसे कदमों ने विधानसभा को अधिक सक्षम, पारदर्शी और पर्यावरण अनुकूल बनाया है। इससे कागज की खपत में कमी आई है और कार्य निष्पादन की गति बढ़ी है। डिजिटल संसदीय प्रणाली का यह प्रयास भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक दूरदर्शी पहल है।

विधानसभा में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विधानसभा के द्वार आम जनता के लिए खोल देना, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लिए अध्ययन भ्रमण और संवाद कार्यक्रम के साथ ही युवा संसद का आयोजन करना आदि कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को विधायी प्रक्रिया, प्रश्नकाल, शून्यकाल तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका से अवगत कराया गया है । लोकतंत्र की सफलता तभी संभव है जब नई पीढ़ी उसकी प्रक्रियाओं और मूल्यों को समझे तथा उनमें सक्रिय भागीदारी निभाए। इस दृष्टि से विधानसभा अध्यक्ष देवनानी के प्रयास बहुत सराहनीय हैं।

पुस्तिका में विधानसभा द्वारा भारतीय संस्कृति और राष्ट्र चेतना को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख है। विधानसभा की दीर्घाओं में राष्ट्रीय और प्रदेश के महापुरुषों, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को प्रदर्शित करने वाली पहलों ने इसे केवल एक विधायी भवन ही नहीं, बल्कि प्रेरणा और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। लोकतंत्र की संस्थाओं को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का यह प्रयास संसदीय संस्कृति को और अधिक समृद्ध बनाता है।विधानसभा में महिलाओं, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता बढ़ाने के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रमों के आयोजन का भी सचित्र विवरण प्रस्तुत किया गया है। संसदीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए समावेशी दृष्टिकोण आवश्यक है और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की है। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर राजस्थान विधानसभा की सक्रिय उपस्थिति ने भी उसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाया है।पुस्तिका का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें नवाचारों को केवल उपलब्धियों के रूप में नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पारदर्शिता, जवाबदेही, जनसंपर्क और तकनीकी दक्षता जैसे तत्व आज की संसदीय व्यवस्था की आवश्यकता हैं और राजस्थान विधानसभा ने इन सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है।

“संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष : नवाचारों के दो वर्ष” केवल एक पुस्तिका नहीं, बल्कि विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी और राजस्थान विधानसभा की उस विकास यात्रा का लेखा-जोखा है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यह दस्तावेज बताता है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं समय की मांग के अनुसार स्वयं को कैसे विकसित कर सकती हैं। राजस्थान विधानसभा के इन नवाचारों ने न केवल उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाया है, बल्कि संसदीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। यह यात्रा भविष्य में और अधिक सशक्त, पारदर्शी तथा जनोन्मुख लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला सिद्ध होगी ऐसा विश्वास है ।