आयुष दवाओं की गुणवत्ता और उत्पादन को मिलेगा भारी बढ़ावा

The quality and production of AYUSH medicines will receive a major boost

  • रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सवाल पर सरकार ने दी जानकारी
  • सांसद अग्रवाल ने कहा,ई-औषधि पोर्टल से प्रमाणन में देरी होगी खत्म, रायपुर का DTL पूरी तरह से सुसज्जित

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली : आयुष औषधियों की सुरक्षा, गुणवत्ता और उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (एओजीयूएसवाई) और ई-औषधि पोर्टल को तेजी से लागू कर रही है। यह कदम आयुष क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण और नियामक तंत्र को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है।

लोकसभा में रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल को उनके सवाल के मद्देनज़र आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने सरकार के विजन को रेखांकित किया। जाधव ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार आयुष नियामक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) में आयुष औषधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष आयुष वर्टिकल की स्थापना की गई है।

“प्रमाणन और लाइसेंसिंग में होने वाली देरी से हमारे आयुष निर्माताओं, एमएसएमई और आदिवासी लघु वनोपज संग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। ई-औषधि पोर्टल और एओजीयूएसवाई योजना इस समस्या का पारदर्शी और त्वरित समाधान है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुझे खुशी है कि हमारे रायपुर का औषधि परीक्षण प्रयोगशाला (DTL) पूरी तरह से सुसज्जित है। उल्लेखनीय है कि लंबे समय से, संविदा कर्मचारियों की कमी की आशंकाओं और लाइसेंसिंग में देरी को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषजसंहिता आयोग (PCIM&H) और राज्य अनुज्ञापन प्राधिकारियों में ऐसी कोई भारी कमी नहीं है। ई-औषधि पोर्टल के माध्यम से, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण अब पूरी पारदर्शिता के साथ आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी औषधियों के विनिर्माण और बिक्री के लिए त्वरित लाइसेंस जारी कर रहे हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विशेष रूप से आकांक्षी जिलों में हर्बल एमएसएमई (MSMEs) के विकास पर जोर दिया। एओजीयूएसवाई (AOGUSY) योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 3 राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (DTL) को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि आयुष औषधियों की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय मानकों (WHO-COPP) से मेल खाती है, जिससे भारतीय आयुष उत्पादों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलेगी।