कांवड़ यात्रा : भोलेनाथ को समर्पित

Kanwar Yatra: Dedicated to Bholenath

ओ पी उनियाल

जिस प्रकार से विभिन्न प्रकार की धार्मिक यात्राएं देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर आयोजित की जाती हैं उसी प्रकार सावन माह में कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है। कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और पवित्र धार्मिक स्थलों पर आयोजित की जाती है।

कांवड़िए पवित्र नदियों का जल लेने के लिए कंधे पर कांवड़ रखकर पैदल यात्रा करते हैं। लौटकर फिर उस जल से अपने-अपने क्षेत्र के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। इस यात्रा का अलग ही महत्व है। सावन माह भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। श्रद्धालु शिव की आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं। पौराणिक मान्यताओं एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों में कांवड़ यात्रा का उल्लेख मिलता है। आज कांवड़ यात्रा आधुनिकता के रंग में रंगी हुयी नजर आती है। हर साल कांवड़ियों की संख्या बढ़ जाती है। पुरुषों व बच्चों के अलावा महिलाएं भी इस भव्य उत्सव में प्रतिभाग करती हैं। इस यात्रा का असली उद्देश्य भोले के प्रति सच्चे भाव से आस्था रखना है।