दीपक कुमार त्यागी
- भू-उपयोग परिवर्तन करने मामले को लेकर पूर्व पार्षद व जीडीए बोर्ड के पूर्व सदस्य राजेंद्र त्यागी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा शिकायती / आपत्ति पत्र
- गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की राजनगर योजना के ब्लॉक-5 में 3,815.65 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नियोजित है प्राइमरी स्कूल भूखंड, जिस पर राजेंद्र त्यागी कर रहे हैं आपत्ति
- प्राइमरी स्कूल जोकि सार्वजनिक सुविधाओं की श्रेणी में आता है उसके उपयोग को आवासीय में परिवर्तित किए जाने के प्रस्ताव निरस्त किए जाने हेतु राजेंद्र त्यागी ने लिखा शिकायती-आपत्ति पत्र
गाजियाबाद : जीडीए बोर्ड के पूर्व सदस्य व पूर्व पार्षद गाजियाबाद नगर निगम राजेंद्र त्यागी को राजनीति से इतर समय-समय पर जनहित के विभिन्न मुद्दों को दमदार ढंग से उठाने वाली शख्सियत के रूप में पहचान जाना जाता है। अब उन्होंने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के द्वारा प्राधिकरण की राजनगर योजना के ब्लॉक-5 में नियोजित प्राइमरी स्कूल भूखंड, क्षेत्रफल 3,815.65 वर्ग मीटर, के भू-उपयोग को प्राइमरी स्कूल से आवासीय न्यूनतम घनत्व भूखंडीय क्रियाओं हेतु परिवर्तित करने के प्रस्ताव का विरोध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर के किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जीडीए का उक्त प्रस्ताव स्वीकृत ले-आउट, मूल नियोजन व्यवस्था तथा राजनगर के निवासियों के लिए नियोजित सार्वजनिक सुविधा के स्वरूप के प्रतिकूल है। उनका कहना है कि राजनगर योजना का ले-आउट प्लान वर्ष 1960 में स्वीकृत हुआ था। उस समय इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट, गाजियाबाद द्वारा अधिग्रहित भूमि का सुनियोजित विकास करते हुए सड़क, प्राइमरी स्कूल, इंटरमीडिएट स्कूल तथा अन्य आवश्यक जन-सुविधाओं के लिए भूमि नियोजित की गई थी।
इन जन-सुविधाओं के लिए निर्धारित भूमि का आर्थिक भार विकसित भूखंडों पर नियोजित रूप से आरोपित किया गया था तथा ऐसी सुविधाओं के लिए नियोजित भूखंडों को तत्समय भूमि-मूल्य की तुलना में रियायती दर पर आवंटित / विक्रय किया गया था। प्रश्नगत प्राइमरी स्कूल भूखंड, क्षेत्रफल 3,815.65 वर्ग मीटर, भी इसी नियोजित व्यवस्था का हिस्सा रहा है। अतः उक्त भूखंड का प्राइमरी स्कूल के लिए नियोजन मात्र एक सामान्य प्रशासनिक प्रविष्टि नहीं है, बल्कि यह स्वीकृत ले-आउट तथा क्षेत्र के निवासियों के लिए नियोजित सार्वजनिक सुविधा से संबंधित भूमि है। राजेंद्र त्यागी का आरोप है का उक्त भूखंड का भू-उपयोग प्राधिकरण ने बदल दिया है जो कॉलोनी के निवासियों के अधिकारों का हनन के साथ-साथ नियमानुसार भी ठीक नहीं है।
उनका कहना है कि केवल Land Use Conversion Charge अथवा Urban Use Charge की व्यवस्था के आधार पर Public Amenity भूमि को आवासीय भू-उपयोग में परिवर्तित करने का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त नहीं होता।
पत्र में राजेंद्र त्यागी का कहना है कि 21 अगस्त 2026 को संपन्न प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में उक्त भूखंड से संबंधित प्रस्ताव मद संख्या- 10 में उक्त भू-उपयोग परिवर्तन प्रस्ताव के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया था।
“माननीय बोर्ड द्वारा सम्यक विचारोपरांत प्रस्ताव इस निर्देश के साथ अनुमोदित किया गया कि प्रकरण से संबंधित शासनादेश एवं वित्तीय नियमों / कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए। उक्त भू-उपयोग परिवर्तन प्रस्ताव पर नियमानुसार विज्ञापन कराकर आपत्ति एवं सुझाव प्राप्त करने के उपरांत ही अंतिम अनुमोदन प्राप्त करने हेतु माननीय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।”
उक्त बोर्ड निर्णय से स्पष्ट है कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पूर्व संबंधित शासनादेशों, वित्तीय नियमों एवं कानून का पालन तथा नियमानुसार विज्ञापन कराकर आपत्ति एवं सुझाव प्राप्त करना आवश्यक है। अतः जब तक उक्त प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती और आपत्तियों एवं सुझावों पर विधिवत विचार नहीं किया जाता, तब तक उक्त भूखंड के संबंध में आवासीय आवंटन, निर्माण अनुमति, मानचित्र स्वीकृति अथवा अन्य विकास अनुमति जारी किया जाना उचित नहीं होगा।
राजेंद्र त्यागी ने सार्वजनिक सुविधा के संरक्षण का न्यायिक सिद्धांत माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में स्वीकृत विकास योजना में सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित भूमि तथा सार्वजनिक सुविधाओं के संरक्षण और नियोजन कानूनों के अनुपालन पर बल दिया है।
उन्होंने राजनगर के निवासियों के सार्वजनिक हित का प्रश्न प्रश्नगत भूमि मूलतः प्राइमरी स्कूल के लिए नियोजित है। यदि इसे आवासीय न्यूनतम घनत्व उपयोग में परिवर्तित किया जाता है, तो राजनगर के निवासियों के लिए मूल रूप से नियोजित प्राथमिक शैक्षिक सुविधा समाप्त हो जाएगी।
राजेंद्र त्यागी ने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि- राजनगर योजना के ब्लॉक-5 स्थित 3,815.65 वर्ग मीटर प्राइमरी स्कूल भूखंड का भू-उपयोग आवासीय न्यूनतम घनत्व भूखंडीय क्रियाओं में परिवर्तित करने के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए।
उक्त भूखंड का मूल निर्धारित प्राइमरी स्कूल/सार्वजनिक शैक्षिक सुविधा का उपयोग यथावत रखा जाए। धारा 13 तथा अन्य लागू वैधानिक प्रावधानों की पूर्ण प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई अंतिम भू-उपयोग परिवर्तन न किया जाए।
दिनांक 21 अगस्त 2026 की बोर्ड बैठक के मद संख्या-10 में निर्धारित विज्ञापन, आपत्ति एवं सुझाव की प्रक्रिया पूर्ण होने तथा उन पर विधिवत विचार किए जाने तक कोई अंतिम कार्यवाही न की जाए। प्रश्नगत भूखंड के मूल स्वीकृत ले-आउट, आवंटन, मूल्य-निर्धारण तथा रियायती दर से संबंधित प्राधिकरण के अभिलेखों का परीक्षण किया जाए। यदि प्राधिकरण भू-उपयोग परिवर्तन को विधिसम्मत मानता है, तो उसके विशिष्ट वैधानिक अधिकार, लागू धारा, नियम, योजना-संशोधन तथा सक्षम स्वीकृति का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर निष्पक्ष और कारणयुक्त विचार किया जाए तथा उसकी कार्यवाही/निर्णय की प्रति उपलब्ध कराई जाए। इस आपत्ति पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कारणयुक्त आदेश (Speaking and Reasoned Order) पारित कर उसकी प्रति उनको भी उपलब्ध कराई जाए।
राजेंद्र त्यागी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन किया है कि राजनगर के निवासियों के लिए मूल रूप से नियोजित सार्वजनिक शैक्षिक सुविधा को समाप्त करने के स्थान पर उक्त प्राइमरी स्कूल भूखंड का मूल सार्वजनिक उपयोग सुरक्षित रखा जाए तथा प्रस्तावित भू-उपयोग परिवर्तन की कार्यवाही निरस्त की जाए।





