राहुल गाँधी हिन्दू धर्मशास्त्र विरोधी मानसिकता, असत्य प्रचार एवं भ्रम छोडें : अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती

Rahul Gandhi should leave anti-Hindu theology mentality, false propaganda and confusion: Avimukteshwarananda Saraswati

दीपक कुमार त्यागी

राहुल गाँधी के द्वारा मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है – जगद्‌गुरु शङ्कराचार्य ‘स्वामिश्रीः’ अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’

मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों के विषय में बार-बार असत्य व भ्रामक प्रचार करने के कारण ही हमने पूर्व में राहुल गाँधी को ‘हिन्दू धर्म से बहिष्कृत’ घोषित किया था – जगद्‌गुरु शङ्कराचार्य ‘स्वामिश्रीः’ अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’

सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा, बेमेतरा, छत्तीसगढ़ : महाराष्ट्र के पुणे में 22 अगस्त 2026 को कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान मनुस्मृति और महिलाओं की स्थिति को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दिया था। जिस बयान पर जगद्‌गुरु शङ्कराचार्य ‘स्वामिश्रीः’ अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008 ने केन्द्रीय विपक्ष नेता राहुल गाँधी पर जबरदस्त हमला बोला, उन्होंने सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा, बेमेतरा, छत्तीसगढ़ से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को जवाब देते हुए कहा कि राहुल गाँधी के द्वारा हिन्दुओं के प्रमुख धर्मशास्त्र मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है। राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से काटकर पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं, बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है।

शास्त्रीय एवं व्यावहारिक दृष्टि से सत्य इस प्रकार है:

संरक्षण और दायित्व का विधानः जिस श्लोक पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने…

को राहुल गाँधी ने अनुचित रूप से उधृत किया, वह स्त्री की परतन्त्रता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उसकी सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण के दायित्व का विधान है। संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से यहाँ ‘रक्षति’ (रक्षा करना) मूल धातु के अर्थ में सुरक्षा का विधान करती है, न कि किसी प्रकार के नियंत्रण ‘नियन्त्रयति’ की।

सनातन परम्परा में नारी का स्थानः भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित नहीं, बल्कि ‘शक्ति’ और महानिर्मात्री माना गया है। ऋग्वेद की मन्त्रद्रष्टा ऋषिकाओं गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा से लेकर यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः का उद्घोष करने वाली यह संस्कृति अधिकार-केन्द्रित संघर्ष के स्थान पर परस्पर पूरकता और सर्वोच्च आदर पर आधारित है।

राजनीतिक भ्रम का निवारणः

राहुल गाँधी को यह राजनीतिक भ्रम भी व्याप्त है कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है, जबकि यह पूर्णतः निराधार और सत्य से परे है। स्वतन्त्र भारत का शासन और किसी भी राजनीतिक व्यवस्था का संचालन केवल भारत के संविधान से होता है। अपने राजनीतिक नैरेटिव को गढ़ने के लिए किसी दल को जबरन मनुस्मृति से जोड़ना राहुल गाँधी का एक और मनगढ़ंत असत्य है।

हमारी स्पष्ट चेतावनी एवं घोषणाः

राहुल गाँधी के लगातार मनुस्मृति विरोधी बयानों से यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि उनकी मानसिकता मूलतः हिन्दू धर्मशास्त्रों और सनातन जीवन-दृष्टि के विरोध की है। संसद् से लेकर सार्वजनिक मञ्चों तक मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों के विषय में बार-बार असत्य व भ्रामक प्रचार करने के कारण ही हमने पूर्व में उन्हें ‘हिन्दू धर्म से बहिष्कृत’ घोषित किया था। हम उन्हें चेतावनी देते हैं कि वे अपनी इस धर्मविरोधी और शास्त्रविरोधी बयानबाजी से बाज़ आएं। यदि वे और उनकी काङ्ग्रेस पार्टी बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन और बोध के सनातन धर्मग्रन्थों पर इसी प्रकार भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ करते रहे, तो देश का प्रबुद्ध और सनातन प्रेमी समाज उनकी इस वैचारिक अपरिपक्वता का तीव्र और मुखर विरोध जारी रखेगा।