एफसीआरए संशोधन विधेयक व्यापक जांच के लिए जेपीसी को भेजा गया

FCRA Amendment Bill referred to JPC for comprehensive scrutiny.

रत्नज्योति दत्ता –

नई दिल्ली : विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को विस्तृत जांच और व्यापक विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया है। संसद के दोनों सदनों द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद विदेशी फंडिंग से संबंधित कानून में प्रस्तावित बदलावों की व्यापक समीक्षा का रास्ता साफ हो गया है।

विधेयक में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विधेयक को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव पेश किया, जबकि राज्यसभा में इसी तरह का प्रस्ताव 12 अगस्त को, मानसून सत्र के समापन से एक दिन पहले, मंजूर किया गया।

जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। लोकसभा सदस्यों का नामांकन अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्यों का नामांकन सभापति करेंगे। समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

जेपीसी को भेजे जाने से प्रस्तावित संशोधनों पर विधेयक को आगे विचार के लिए लाए जाने से पहले विस्तृत संसदीय जांच और व्यापक हितधारक परामर्श का अवसर मिलेगा।

लोकसभा में 25 मार्च को पेश विधेयक में विदेशी धन प्राप्त करने वाले संगठनों की निगरानी मजबूत करने का प्रस्ताव है। इसके तहत एक नामित प्राधिकरण (Designated Authority) गठित करने की बात कही गई है, जो किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे पूरी या आंशिक रूप से निर्मित परिसंपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और आवश्यकता पड़ने पर निपटान कर सकेगा।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत एफसीआरए प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने से पहले उसका नवीनीकरण नहीं होने, नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किए जाने या आवेदन खारिज होने की स्थिति में प्रमाणपत्र समाप्त माना जाएगा। ऐसे मामलों में विदेशी अंशदान तथा उससे पूरी या आंशिक रूप से निर्मित परिसंपत्तियां पहले नामित प्राधिकरण में अस्थायी रूप से निहित होंगी और पंजीकरण बहाल या नवीनीकृत नहीं होने पर स्थायी रूप से उसके अधीन आ सकती हैं। प्राधिकरण ऐसी परिसंपत्तियां सरकारी एजेंसियों को हस्तांतरित या उनका निपटान कर सकेगा तथा इससे प्राप्त राशि भारत की संचित निधि में जमा की जाएगी।

विधेयक में किसी संगठन द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार ‘प्रमुख पदाधिकारियों’ (key functionaries) की भी परिभाषा दी गई है तथा किसी निष्क्रिय संगठन के अंतिम प्रमुख पदाधिकारियों को सरकार को सूचित करना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। एफसीआरए उल्लंघनों के लिए अधिकतम सजा को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने तथा किसी जांच की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है।

विधेयक को जेपीसी को भेजने के प्रस्ताव पर लोकसभा में तीखी बहस हुई। कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने विधेयक को वापस लेने की मांग की, जबकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए। संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी बताए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “विधेयक में किसी भी समुदाय के खिलाफ एक भी प्रावधान नहीं है।”

एफसीआरए, 2010 में लागू, भारत में व्यक्तियों, संघों और संगठनों द्वारा विदेशी अंशदान स्वीकार करने और उसके उपयोग को विनियमित करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। जेपीसी की सिफारिशें विधेयक के अंतिम स्वरूप को तय करने में महत्वपूर्ण होंगी, जिसके बाद इसे आगे विचार के लिए संसद में लाया जाएगा।