प्रेम के ढाई आखर से सजी काव्य चौपाल

A poetic gathering adorned with the two-and-a-half letters of love

गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में विश्व मैत्री मंच का साहित्यिक आयोजन एवं ‘ढाई आखर प्रेम’ साझा लघुकथा-संकलन का लोकार्पण

नई दिल्ली : गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के गरिमामय सभागार में अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय संतोष श्रीवास्तव जी के मार्गदर्शन में एक भव्य साहित्यिक आयोजन ‘काव्य चौपाल’ संपन्न हुआ। इस अवसर पर ‘ढाई आखर प्रेम’ साझा लघुकथा-संकलन का गरिमापूर्ण लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम का संयोजन मंच की अत्यंत सक्रिय एवं वरिष्ठ लेखिका डॉ. शुभ्रा ने किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका डॉ. रानी श्रीवास्तव जी ने की।

समारोह में विश्व मैत्री मंच की दिल्ली इकाई के अनेक साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के साथ-साथ ‘ढाई आखर प्रेम’ साझा संकलन में सम्मिलित सभी लघुकथाकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ शारदा मित्तल की सुमधुर एवं भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुआ। उनकी मधुर प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को साहित्य और संस्कार की सुरभि से भर दिया।

इसके पश्चात विश्व मैत्री मंच, दिल्ली इकाई की अध्यक्ष शकुंतला मित्तल ने संस्था का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि मंच का प्रमुख उद्देश्य नवोदित एवं प्रतिभाशाली साहित्यकारों की खोज कर उन्हें उचित मंच प्रदान करना तथा उनकी साहित्यिक प्रतिभा को निरंतर प्रोत्साहित करना है। संस्था द्वारा समय-समय पर साहित्य की विभिन्न विधाओं पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। साथ ही राष्ट्रीय अधिवेशनों के माध्यम से साहित्यकारों को उनके उल्लेखनीय लेखन के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत भी किया जाता है।

मंच की महासचिव अर्चना पांडेय जी ने संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी द्वारा प्रेषित शुभकामनाओं एवं संदेश को सभी के समक्ष रखा। उन्होंने ‘ढाई आखर प्रेम’ की संकल्पना पर उनके विचार साझा करते हुए कहा कि सृष्टि के कण-कण में प्रेम व्याप्त है। संकलन में प्रकाशित सभी लघुकथाएँ किसी न किसी रूप में प्रेम की इसी व्यापक और मानवीय अनुभूति को अभिव्यक्त करती हैं। प्रेम केवल संबंधों का आधार नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली वह संवेदना है, जो समूची सृष्टि को एक सूत्र में बाँधती है।

कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावशाली एवं सधे हुए ढंग से संचालन मनोरमा जी ने किया। उनके कुशल संचालन ने कार्यक्रम को निरंतर गति, गरिमा और आत्मीयता प्रदान की।

‘ढाई आखर प्रेम’ साझा लघुकथा-संकलन के लोकार्पण के पश्चात सभी प्रतिभागी लघुकथाकारों ने अपनी-अपनी संकलित रचनाओं का पाठ किया। विविध भावभूमियों और जीवनानुभवों से जुड़ी लघुकथाओं ने श्रोताओं को कभी संवेदित किया, कभी विचार करने के लिए विवश किया और कभी प्रेम की मानवीय शक्ति का अनुभव कराया।

कार्यक्रम में प्रीति मिश्रा, शारदा मित्तल, शकुंतला मित्तल, पुष्पा सिन्हा, अश्विनी देशपांडे, मनोरमा, डॉ. शुभ्रा, सीमा पुरबा सिम्मी, वंदना रानी दयाल, डॉ. वनिता शर्मा, डॉ. रानी श्रीवास्तव, आभा कुलश्रेष्ठ, अर्चना पांडेय, डॉ. सुधा कुमारी एवं डॉ. शोभा नारायण, अनीता तिवारी और युवा कवयित्री वैभवी सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ रानी श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों की रचना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अपना काव्य पाठ किया।

लघुकथा-पाठ और काव्य-पाठ की सुमधुर प्रस्तुतियों ने ‘काव्य चौपाल’ को जीवंत एवं यादगार बना दिया। रचनाओं में प्रेम, संवेदना, मानवीय रिश्तों और जीवन के विविध रंगों की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।

समूचा आयोजन साहित्यिक आत्मीयता, रचनात्मक ऊर्जा और प्रेम की सार्वभौमिक भावना से ओत-प्रोत रहा। ‘ढाई आखर प्रेम’ का लोकार्पण साहित्य के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को जोड़ने और प्रेम के संदेश को व्यापक बनाने की सार्थक पहल के रूप में सामने आया।

अंत में डॉ शुभ्रा ने सबका आभार व्यक्त किया और स्वादिष्ट जायकेदार चाय पकौड़ों के साथ चौपाल आयोजन संपन्न हुआ।

प्रस्तुति
शकुंतला मित्तल