भ्रष्टाचार विरोध से सत्ता में आई मोदी सरकार कितनी भ्रष्ट है ?

Just how corrupt is the Modi government, which came to power on an anti-corruption platform?

सीता राम शर्मा चेतन

2014 में भ्रष्टाचार मुक्त भारत का शोर मचा कर केंद्रीय सत्ता में आई मोदी सरकार कितनी भ्रष्ट है ? यह मोदी सरकार के साथ देश की ईमानदार, राष्ट्रभक्त जनता के लिए आज प्राथमिक चिंतन, मनन, अध्ययन और विश्लेषण का विषय होना चाहिए । बहुतायत लोग इस प्रश्न अथवा बात से विचलित या असहमत हो सकते हैं, पर यथार्थ और तर्क की कसौटी पर यदि इन असहज, असहमत होते लोगों से यह पूछा जाए कि क्या उन्हें लगता है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में या फिर दो बार पूर्ण बहुमत का दस वर्षीय कार्यकाल पूरा करने के बाद इस तीसरे कार्यकाल में ही देश की व्यवस्था, देश का शासन पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त हो गया है ? पूरा छोड़िए, क्या पचास प्रतिशत भ्रष्टाचार खत्म हो गया है ? पचास प्रतिशत भी छोड़िए, दैनिक जनसरोकार से जुड़ा सिर्फ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसा महत्वपूर्ण क्षेत्र ही पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार मुक्त हो गया है ? सच मानिए, मोदी सरकार के समर्थक लोगों की बात तो छोड़िए खुद मोदी या उनकी सरकार का कोई भी मंत्री तक इस बात का दावा नहीं कर सकता । शैक्षणिक भ्रष्टाचार के एक छोटे से हिस्से परीक्षा विभाग का काला घिनौना सत्य बीते दिनों ही उजागर हो चुका है । जबकि सच मानिए यह भ्रष्टाचार का छोटा सा क्षेत्र है, व्यापक रुप से सच सामने आए तो देशवासियों के होश गुम हो जाएंगे । स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान योजना की विसंगतिया अखबारों में है । फिर किस क्षेत्र की बात करें ?

क्या मोदी सरकार बता सकती है कि उसने सरकार का या देश के विकास का हर काम ठेके में देने की कौन सी पारदर्शी, पूर्ण रूपेण भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था बनाई है ? कौन से एक क्षेत्र में इसने यह कमाल कर दिखाया है ?

आइए, मोदी सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक व्यवस्था को ही भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के इसके कुछ महत्वपूर्ण काम पर गौर करें ! पिछले बारह वर्ष में मोदी के राजनीतिक दल को लगभग पंद्रह हजार करोड़ रुपए का राजनीतिक चंदा मिला है ! अन्य दलों को भी हजारों करोड़ का राजनीतिक चंदा मिला है ! सवाल यह है कि चंदे के रूप में इतनी बड़ी धन राशि की आवश्यकता क्यों ? यह चंदा देते कौन हैं ? इन्हें चंदा देने का लाभ क्या मिलता है ? और क्यों मोदी सरकार राजनीतिक चंदे के इस राष्ट्रीय पाप और अपराध को खत्म करने का काम नहीं करना चाहती ? क्या यह राजनीतिक चंदा अप्रत्यक्ष रूप से प्रत्यक्ष भ्रष्टाचार वाली राष्ट्रद्रोही अव्यवस्था नहीं है ? मोदी सरकार से यह सवाल पूछना तो निरर्थक ही होगा कि 2014 के चुनाव में उसके नेता युपीए सरकार की भ्रष्टाचार की जिस लंबी लिस्ट को लिए शोर मचाते घूमते थे उसके कितने भ्रष्टाचारियों को उसने कठोर कारावास की सजा दिलवाई ?

खैर, भ्रष्टाचार पर प्राथमिकता और पूरी ईमानदारी के साथ काम नहीं करने पर मोदी सरकार पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि कोई भी विपक्षी दल इस पर ईमानदारी से सवाल उठाने पर या दोषियों को सजा दिलवाने पर मुखर नहीं है और होगा भी नहीं क्योंकि यह स्वयं उनके लिए भी आत्मघाती ही सिद्ध होगा ! देर-सवेर यह काम जनता को ही करना होगा । दुर्भाग्य से वह समय अभी दूर है । पर होगा अवश्य, इसमें रंच मात्र भी संदेह नहीं है । जब ऐसा होगा तब इस बात में कतई संदेह नहीं कि इतिहास फिर से लिखा जाएगा और तब आज की कथित राष्ट्रभक्त मोदी सरकार भी अपने कुछ अच्छे कामों के बावजूद भ्रष्टाचार वाली फेहरिस्त का ही हिस्सा होगी । इसमें संदेह की कोई जगह नहीं ।

अब सकारात्मक चिंतन करते हुए आज का अंतिम सवाल यह, कि ऐसा कब होगा ? मुझे लगता है इसके लिए देश के हजारों, लाखों ऐसे लोग, जो भ्रष्ट व्यवस्था के शिकार हुए स्वंय को पूर्ण रूपेण असहाय, असुरक्षित, त्रस्त, विवश पा रहे होंगे, उनकी सहनशीलता कभी न कभी टूटेगी अवश्य और जब टूटेगी तब तक यह छलिया व्यवस्था और ज्यादा शक्तिशाली और निष्ठुर हो चुकी होगी और तब एक शांतिपूर्ण सफल आंदोलन होगा – भ्रष्टाचार मुक्त करो, त्वरित न्याय दो या मुझे फांसी दो ! कल्पना कीजिए, जब भ्रष्टाचार से मुक्ति और त्वरित न्याय पाने के लिए लाखों विवश लोग शांतिपूर्ण तरीके से देश के कोने-कोने में खुद को फांसी देने की मांग करेंगे तब स्थिति कैसी होगी ! आज तो यह आंदोलन करने के लिए मैं अकेला खुद को तैयार पाता हूं !