लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्व के सी मालू के पुत्र से दूरभाष वार्ता कर गहरा शोक जताया

Lok Sabha Speaker Om Birla expressed deep grief during a telephonic conversation with the son of the late K.C. Maloo

नीति गोपेन्द्र भट्ट

नई दिल्ली/ जयपुर : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राजस्थानी लोक संस्कृति के पुरोधा एवं वीणा म्यूजिक के संस्थापक, प्रख्यात लोकविद् स्व. केशरी चंद मालू (के. सी.मालू) के निधन पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिवंगत के. सी.मालू के ज्येष्ठ पुत्र हेमजीत मालू से सोमवार रात को दूरभाष पर वार्ता कर संस्कृति पुरुष के. सी.मालू के निधन को भारत के कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति बताया और कहा कि स्वर्गीय मालू ने राजस्थानी संगीत को पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया।

अणुव्रत आचार्य श्रीमहाश्रमण जी ने दिया आशीर्वचन

अणुव्रत आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शनार्थ लाडनूँ पहुँचे मालू परिवार के शोक सन्तप्त परिवार जनों को आचार्य श्री ने इस अपूरणीय क्षति को धेर्य पूर्वक सहन करने का आशीर्वचन दिया है ।

आचार्य श्री महाश्रमण जी ने लाडनूँ में जैन विश्व भारती डिम्ड टू यूनिवर्सिटी प्रांगण में केशरी चंद मालू (के सी मालू ) के परिवार को संबोधित करते हुए बताया कि केशरी चंद मालू और उनके पुत्र हेमजीत मालू के साथ पिछली छह जुलाई को ही दर्शन के लिए लाडनूँ आए थे और उन्होंने उन्हें मंगल पाठ सुनाया था । महाश्रमण जी ने कहा कि के. सी. मालू ने अपने जीवनकाल में राजस्थानी संगीत को घर-घर पहुँचाने और इसे वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने में ऐतिहासिक योगदान दिया था। राजस्थानी कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके इस अनन्य योगदान के लिए उन्हें rajy सरकार ने ‘राजस्थान रत्न’ से भी सम्मानित किया था।उनके निधन से कला, संगीत और सामाजिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है ।

आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा कि मालू उस परिवार से थे जिनमें उनके दादा और पिता प्रकाण्ड विद्वान गणेश मल जी मालू और डालमचंद जी मालू द्वारा ज्ञानशालाओं के माध्यम से जैन साधु साध्वियों को जैन दर्शन की शिक्षा प्रदान करने की दीर्घकालीन दी गई । उन्होंने विश्वास जताया कि स्व मालू के छोटे भाई निर्मल कुमार मालू और पुत्र हेमजीत मालू एवं प्रसनजीत मालू भी अपने पिता और पितामह की तरह तेरापंथ की परंपराओं को आगे बढ़ायेंगे ।

इस अवसर पर मालू परिवार के साथ देश-विदेश से लाडनूँ पहुंचे सौ से अधिक सदस्यों ने गुरुवर आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया ।