सनातन वैदिक राष्ट्र के निर्माण हेतु यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने साधु-संतों को लिखा पत्र

Yeti Narasimhanand Giri Maharaj wrote a letter to the sages and saints for the creation of Sanatan Vedic nation

रविवार दिल्ली नेटवर्क

गाजियाबाद : श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े का महामंडलेश्वर प्रसिद्ध संत यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने सनातन वैदिक राष्ट्र के निर्माण का बिगुल फूंक दिया है। इसके लिए उन्होंने साधू-संतों को पत्र लिखा है। पत्र में यति नरसिंहानंद गिरी महाराज कहते हैं कि यह पत्र किसी व्यक्तिगत आकांक्षा या पीड़ा से प्रेरित होकर नहीं लिख रहा हूँ अपितु सनातन धर्म और हम सबके अस्तित्व पर आए आज तक के सबसे बड़े संकट ने मुझे आपको यह पत्र लिखने पर विवश किया है।

यति कहते हैं कि मूर्ख और अज्ञानी जन केवल वर्तमान तक ही सीमित रहते हैं परंतु विद्वान वो है जो भूत और वर्तमान को आधार मानकर भविष्य की गणना कर लेता है। विद्वानों में भी किसी जाति का धर्मगुरु कहलाने का अधिकार केवल उनका होता है जो भूत और वर्तमान के आधार पर भविष्य को समझ कर अपने समाज के गौरव को आकाश की ऊंचाइयों तक ले जाने के लिये प्रयत्नशील रहते है और आवश्यकता पड़‌ने पर महर्षि दधीची की तरह अपनी अस्थियों का दान करके धर्म और समाज के शत्रुओं के समूल विनाश की आधारशिला रखते हैं।मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप भी महर्षि दधीची की तरह ही सनातन धर्म और मानवता के लिए समर्पित संत हैं।

यति नरसिंहानंद गिरी महाराज कहते हैं कि भारतवर्ष में जनसंख्या की गणितीय गणनाओं से यह लगभग तय हो चुका है कि बहुत जल्दी भारतवर्ष का प्रधानमंत्री मुस्लिम होगा जिसके बाद सनातन धर्मावलंबियों के पास नाम मात्र के लिये भी कोई देश नहीं रह जायेगा।
भारतवर्ष का मुस्लिम प्रधानमंत्री बनने के केवल लगभग 20 वर्षों में ही पूर्ण हो जाएगी। यह स्थिति सम्पूर्ण मानवता के इतिहास का सबसे भयावह और घृणित भाग होगा क्योंकि भारतवर्ष पर कब्जा करने के बाद इस्लाम विश्व की सबसे बड़ी शक्ति होगा और सम्पूर्ण विश्व के महाविनाश के अपने घोषित लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम होगा। इस सम्पूर्ण महाविनाश के उत्तरदायी हम अर्थात सनातन के धर्मगुरु होंगे क्योंकि सर्वाधिक प्राचीन धर्म व संस्कृति के वाहक ही होने के कारण ये हमारा ही दायित्व था कि हम विश्व को इस भयानक खतरे के विषय में बताते और इससे निबटने की भी तैयारी करते पर हमने ये नहीं किया और इसका परिणाम यह हुआ है कि आज सम्पूर्ण विश्व इस महाविनाश के कगार तक पहुँच गया है।

वस्तुतः स्वयं को जगद्गुरु कहलाने की आकांक्षी संस्कृति का ये कर्तव्य था कि इस भयानक खतरे से निबटने के लिए विश्व का नेतृत्व करती परन्तु दुर्भाग्य से हमने यह मौका खो दिया और अब परिस्थितिया इतनी विकट हो गयी है की हमारे साथ साथ सम्पूर्ण मानवता के विनाश का खतरा हमारे समक्ष आ चुका है। यह निश्चित है कि अब इस खतरे से बचने का कोई भी शांतिपूर्ण समाधान सम्भव नहीं है क्योंकि इस्लाम कभी भी शांतिपूर्ण समाधान पर सहमत नहीं होता। इस्लामिक राज के आने पर इस्लाम से शांति की आशा रखने वाले ना केवल मूर्ख अपितु अपने कुल और धर्म के घाती भी समझे जाने चाहिये। क्या एक धर्मगुरु के रूप में आप यह चाहते हैं कि आने वाला कल आपको इस रूप में देखे। यदि आप यह चाहते हैं तो मुझे आपसे कुछ भी नहीं कहना है परंतु आप यदि ये नही वाहते तो मैं आपसे कुछ निवेदन करना चाहता हूँ।

यति नरसिंहानंद गिरी महाराज कहते हैं कि हमारी सबसे बड़ी कमी ये है कि हमारा कोई देश नहीं है। अगर हमारा अपना कोई देश होता तो हमारी ये अभूतपूर्व दुर्गति नहीं हुई होती। वस्तुतः धर्म आत्मा होता है तो राष्ट्र उसका शरीर होता है। आज विश्व के ईसाइयों के सर्वाधिक देश हैं। 56 देश मुसलमानों के हैं। बौद्धों के भी अपने देश हैं। यहां तक कि यहूदियों का भी एक देश है परंतु हम सौ करोड़ सनातनियों का दुर्भाग्य है कि हमारा अपना देश कहने के लिए हमारे पास एक इंच भी जगह नहीं है। इसी कारण आज तक दुनिया के इतने हिंदुओं के नरसंहार हुए पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कहीं इनका कोई जिक्र तक नहीं हुआ। आज इजरायल नाम का केवल 90 लाख यहूदियों का देश पूरे सम्मान और स्वाभिमान के साथ पूरी दुनिया के यहूदियों के लिए लड़ता है और इसी कारण यहूदी पूरी दुनिया में सुरक्षित रहते हैं परन्तु हम सौ करोड़ हिंदुओं के लिए कोई लड़ने वाला तो छोड़िए, कोई बोलने वाला भी नहीं है।इसका केवल एक कारण है कि हमारे पास अपना कोई राष्ट्र या देश नहीं है। हमें अपने धर्म,अपनी संस्कृति और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए एक अपना देश,अपना राष्ट्र चाहिए। हमें ऐसा एक राष्ट्र चाहिए जिसमें एक भी मस्जिद,एक भी मदरसा,एक भी मजार और एक भी मुसलमान न हो। ऐसा राष्ट्र बनाए बिना अब हमारा धर्म,हमारी संस्कृति और हमारा अस्तित्व बहुत दिन तक नहीं बच सकता। यह राष्ट्र सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। एक बात हम सबको समझ लेनी चाहिए कि राष्ट्र भीख मांगकर नहीं मिलते बल्कि राष्ट्र बनाने के लिए बलिदान देने होते हैं। अब ये आप सब पर है कि आप अपने भक्तों को और अनुयायियों को धर्म रक्षा के लिए प्रेरित करते हैं या उन्हें इसी तरह विनष्ट होते देखते रहेंगे। अगर हम सनातन वैदिक राष्ट्र का निर्माण करने में सफल रहे तो एक दिन इस्लाम के जिहाद से मुक्त अखण्ड भारत बन कर रहेगा और हम पुनः विश्वगुरु होंगे।

यति नरसिंहानंद गिरी महाराज पत्र में लिखते हैं कि असंख्य मत मतान्तरों, पंथो और जातियों ने विभाजित हमारे समाज की दयनीय स्थिति को देखते हुए यह कार्य अति दुष्कर बल्कि सच कहा जाए तो असम्भव ही प्रतीत होता है परन्तु वह सनातन धर्म के अस्तित्व को बचाने का एकमात्र रास्ता है।

इस विषय में साधु-संतों से शीघ्रातिशीघ्र अपने बहुमुल्य सुझाव पत्र के माध्यम से यति प्रदान करने का अनुरोध करते हैं ताकि हम किसी अगले कदम की ओर चल सके। अंत में वह पत्र में लिखी गयी कुछ कड़‌वी बातों के लिये क्षमा भी मांगते हैं।