छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन में हिंसा होने व राजनेताओं के हस्तक्षेप से राजनीति के भंवर में फंसती पेपर लीक आंदोलन की मांगें!

Demands of the paper leak protest get caught in a political vortex due to violence during the students' peaceful agitation and the interference of politicians

  • छात्र राष्ट्र व परिवार का उज्जवल भविष्य, पेपर लीक की पुनरावृत्ति रोकते हुए छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उठाए सरकार सख्त कदम!
  • राजनीति की भेंट चढ़ता छात्रों का आंदोलन!
  • छात्र हितों के आड़ में बड़ी चतुराई से अपने-अपने हित साधते कुछ चतुर राजनेता!
  • छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन का कुछ राजनेताओं ने कर दिया हिंसक राजनीतिकरण!

दीपक कुमार त्यागी

देशभर में छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन लंबे समय से चलता आ रहा था, देर-सवेर केंद्र सरकार की तरफ से छात्रों के हित में परिणाम भी आ ही जाता, लेकिन कुछ चतुर राजनेताओं के हस्तक्षेप से अब आंदोलन राजनीति के भंवर में बुरी तरह से फंसता हुआ नज़र आ रहा हैं, पेपर लीक आंदोलन की जायज़ मांगें भी राजनीति के भंवर में फंसती नज़र आ रही हैं!। लेकिन मेरा सरकार से निवेदन है कि छात्रों के कंधे पर ही किसी भी राष्ट्र व हर परिवार का उज्जवल भविष्य टिका होता है, इसलिए सरकार सख्त कदम उठाकर के पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकते हुए, देश में छात्रों व नौजवानों के भविष्य को उज्जवल बनाने की नीति बनाते हुए उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सख्त कदम उठाए। वैसे तो नीट-यूजी की 3 मई 2026 को आयोजित मूल परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों के बाद 12 मई 2026 को सरकार ने नीट की परीक्षा को रद्द कर दिया था। तब से ही छात्रों में आक्रोश व्याप्त है और वह देश के विभिन्न हिस्सों में शांति पूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन करके अपना जबरदस्त विरोध प्रकट कर रहे थे। लेकिन अचानक ही 16 मई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक एक पार्टी बन जाती है और वह पार्टी छात्रों के आंदोलन में कूद पड़ती है, उस पार्टी के द्वारा दिल्ली में जून के प्रथम सप्ताह से धरना प्रदर्शन शुरू किया जाता है, इस धरना प्रदर्शन में सबकुछ ठीक ठाक ही चल रहा था, लेकिन जब से कुछ राजनेताओं की एंट्री हुई है तब से ही छात्रों की मूल मांगो से खिलवाड़ होना शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने नीट परीक्षा के पेपर लीक के इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस मामले की जांच सौंपी दी थी। वही सरकार के द्वारा नए सिरे से नीट की पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जा चुकी है, 16 जुलाई 2026 की रात को पुनर्परीक्षा के नतीजे भी एनटीए के द्वारा घोषित कर दिए गए हैं। लेकिन आजकल जबरदस्त प्रतियोगिता के इस दौर में सरकारी नौकरी व महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपर बार-बार रद्द होने के कारण देशभर के छात्रों में भारी मानसिक तनाव के चलते विरोध की स्थिति जबरदस्त ढंग से देखने को मिल रही है। छात्रों के द्वारा लगातार देश व प्रदेशों के नीति-निर्माताओं से परीक्षाओं की निष्पक्षता और छात्रों के बीच विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए धरातल पर ठोस आवश्यक कदम उठाने की मांग भी लगातार की जा रही है। वहीं केंद्र सरकार निरंतर छात्रों को आश्वस्त कर रही थी कि वह भविष्य में आयोजित परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम उठा रही है, फिर भी आंदोलन जारी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन में जब सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की एंट्री होती है, वह भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं और जब भूख हड़ताल एक-एक दिन करके लंबी चलने लगती है, तो छात्रों का शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा यह आंदोलन देश के कुछ राजनेताओं के लिए अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए एक शानदार पर्यटन स्थल बन जाता है, जिसके चलते धरनास्थल पर बहुत तेज़ी से छोटे व बड़े राजनेताओं का तांता लगने लग जाता है। अब पिछले कुछ दिनों से जिस तरह की स्थिति कुछ लोगों व राजनेताओं के द्वारा देश राजधानी दिल्ली में बनायी जा रही है, उससे अब यह स्पष्ट होता जा रहा कि लंबे अरसे से आंदोलनरत छात्रों की मूल मांगें राजनीतिकरण के चलते अब पीछे छूट गई हैं। छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को आज कुछ लोगों के गैंग ने छात्र हित के जगह पर्दे के पीछे छिपी सत्ता हथियाने की सीढ़ी से केंद्र व प्रदेशों में सत्ता परिवर्तन करने का हथियार बना लिया है। छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को कुछ लोगों व राजनेताओं ने पूर्व की भांति ही सत्ता परिवर्तन करने की महत्वाकांक्षा का हथियार बनाते हुए आंदोलन को राजनेताओं की स्वार्थ पूर्ति अखाड़ा बनाकर रख दिया है। हर बार की ही तरह इस बार भी छात्रों के बेहद शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे आंदोलन को कुछ चतुर, चालाक व बेहद ही स्वार्थी राजनेता ने घुसकर के छात्रों व देश युवाओं के केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश को अपने क्षणिक हितों को साधने की ताकतवर ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करते हुए अपने व्यक्तिगत एजेंडे व हितों की पूर्ति करने व पार्टी के हितों को साधने वाली राजनीतिक जमीन को मजबूत करने वाला आंदोलन बनाकर रख दिया है। छात्रों के नाम पर शुरू हुए आंदोलन में अब छात्रों के हित की बातें बहुत पीछे छूटते जा रही हैं, राजनेताओं के छिपे हुए एजेंडे छात्र व नौजवानों के हितों पर हावी होते जा रहे हैं, कुछ लोगों के द्वारा आंदोलन को हिंसक बनाते हुए राजनीतिकरण किया जा रहा है।

[बाक्स]

“दिल्ली की धरती पर चल रहे इस आंदोलन में अब छात्रों के हितों की बात शिक्षा व परीक्षा में सुधार व बेरोजगार नौजवानों के युवाओं के रोजगार जैसी बातें तो बहुत दूर की कोड़ी की बात हो गयी हैं। वहां पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा पर अब जोर ज्यादा लगाया जा रहा है। छात्र व नौजवानों के हितों की चिंता राजनेताओं के एजेंडे से अब बाहर होती हुई नज़र आती है, चंद राजनेताओं के क्षणिक राजनीतिक स्वार्थ छात्र आंदोलन पर भारी पड़ रहे हैं। वहीं सूत्रों के अनुसार ठीक उसके उल्ट कुछ राजनेताओं के आशिर्वाद से आंदोलन में अब जो स्थितियां बनी हुई हैं, वह देश को राजनीतिक रूप से अस्थिर करने के माहौल को तैयार करने वाली ज्यादा नज़र आती है। जिसके चलते ही छात्रों के शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन को अराजक तत्वों ने हिंसक तक करवा दिया है।”

नीट परीक्षा लीक कांड के बाद से ही सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकते हुए देश में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए रणनीति बनाने की मांग व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे लेकर के शुरू हुई छात्रों की मांग पर अब पूरी तरह से राजनीति का शिकार होती जा रही है। छात्रों के शांति प्रिय आंदोलन में कुछ राजनेताओं की कृपा से अब तो आलम यह हो गया है कि कुछ राजनेता को छात्रों के विरोध का यह अवसर पर देश व प्रदेशों की सत्ता को परिवर्तित कर सत्ता पर काबिज होने का एक बड़ा अवसर तक लग रहा है। छात्रों के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर देश के पक्ष-विपक्ष के राजनेताओं के द्वारा जमकर के राजनीति की जा रही है, सड़क से लेकर संसद तक हर तरफ़ संग्राम छिड़ा हुआ है, सड़क पर कुछ लोगों के द्वारा जबरदस्त टकराव की स्थिति उपस्थिति उत्पन्न करते हुए, लोगों के जान-माल व देश की बहुमूल्य संपत्तियों व सुरक्षा कर्मियों तक को निशाना बनाया जा रहा है, जो उचित नहीं है। वहीं 20 जुलाई 2026 से ही जब से संसद में मानसून सत्र शुरु हुआ है तब से ही छात्रों व अन्य मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा व समस्या के स्थाई निदान पर चर्चा करने की जगह जमकर के हंगामा बरपाया जा रहा है। हालांकि देश की सुरक्षा एजेंसियां छात्र आंदोलन की आड़ में देशविरोधी गतिविधियों होने की लगातार संभावना व्यक्त कर रही हैं, लेकिन फिर भी किसी भी पक्ष को राष्ट्र व छात्रों के हितों की कोई चिंता वास्तव में नज़र नहीं आती है, केवल और केवल किसी भी तरह से सत्ता हथियाने व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा करवाने की चिंता ज्यादा है। हालांकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को दुविधा में डालने से पहले और हंगामा खड़ा होने से पहले ही स्वयं ही नैतिकता के आधार पर बिना किसी भी जोर दवाब के केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा स्वेच्छा से पहले ही दे देना चाहिए था और सरकार का विवेक था कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार करती या अस्वीकार करती। लेकिन छात्रों, अभिभावकों व हमें भी निष्पक्ष रूप से यह विचार अवश्य करना चाहिए कि क्या केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूर्ण हो जाने से भविष्य में देश में पेपर लीक की यह घटनाएं रुक जायेंगी, क्या इस्तीफे से छात्रों व युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो जायेगा। वैसे भी आज की परिस्थितियों में आंदोलनरत छात्रों को भी यह आत्ममंथन अवश्य करना चाहिए कि आज उनका शांतिपूर्ण आंदोलन कहां आकर के खड़ा हो गया है, क्या आंदोलन पर कब्जा जमाकर के बैठे नेताओं के द्वारा छात्र हित की बातें आज किसी समाधान करने वाले वास्तविक पटल पर उठायी जा रही हैं या इन नेताओं के द्वारा चतुराई से छात्रों की आड़ में अपने-अपने छिपे हुए एजेंडे को पूरा करा जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं लगातार इस मुद्दे पर नज़र बनाए हुए है और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस ज्वलंत मुद्दे पर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे ही सरकार भी सख्त ठोस कार्रवाई करती हुई नज़र आ रही है। वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ने दो वर्ष पहले ही सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 यानी Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू कर चुकी है। यह कानून देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली संगठित धोखाधड़ी, पेपर लीक और अवैध गतिविधियों पर कठोर दंड का प्रावधान करता है, वहीं सरकार पेपर लीक के मामलों की सुनवाई लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन व सख्त सजा के प्रावधान वाला नया मसौदा भी तैयार कर रही है। छात्रों के बढ़ते विरोध के बीच ही केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर दिया है, वहीं पेपर लीक कांड में अब एनटीए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। छात्र आंदोलन पर दिल्ली व देश के विभिन्न हिस्सों में जो हालात बने हुए हैं उस स्थिति में आंदोलनरत छात्रों को यह अवश्य ध्यान खना चाहिए कि वह पक्ष-विपक्ष की आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में बिल्कुल भी ना फंसें, राजनीति व हिंसा से आंदोलन को बचाकर रखें, क्योंकि हमारे प्यारे देश में ओछी राजनीति कब क्या करा दें, उसका कोई भी भरोसा नहीं है, इसलिए आंदोलनकारी छात्र पूरी तरह से सज़ग रहें और छात्र आंदोलन को केवल और केवल छात्र व नौजवानों के हितों तक ही सीमित रखते हुए किसी भी परिस्थिति में देश विरोधी व समाज में वैमनस्य पैदा करने वाले जहरीले नकारात्मक विचारों का अड्डा ना बनने दें, किसी भी कीमत पर आंदोलन को हिंसक ना होने दें, अपने आंदोलन को राष्ट्र व समाज हित के सकारात्मक विचारों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से चलाएं तब ही देर-सबेर छात्रों व नौजवानों के हितों की बात को लेकर के कुछ ठोस निर्णय अवश्य होगा।