टीएमयू के डेंटल डॉक्टर्स की मेधा को सलाम, पेंटर किशन को दिया अनमोल तोहफा, पैर की हड्डी से बना डाला जबड़ा

Salute to the brilliance of TMU's dentists: Painter Kishan receives a priceless gift—a jaw reconstructed using a leg bone

रविवार दिल्ली नेटवर्क

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ओरल एंड मेक्जिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉक्टर्स बिलारी के 25 वर्षीय पेंटर किशन के लिए देवदूत की मानिंद हैं। डॉक्टर्स की टीम ने टांग की हड्डी-फिबुला से नया जबड़ा तैयार करके अविस्मरणीय एवम् अनमोल तोहफा दिया है। अब किशन को असहनीय दर्द से छुटकारा मिल गया है। वह अब मन-पसंद व्यंजनों का लुफ्त उठा सकेगा। खुलकर भी मुस्कुरा सकेगा, क्योंकि वह पूरा मुंह नहीं खोल पाता था। डॉक्टर्स की टीम ने युवक की इस रेयर सर्जरी को सफलता से अंजाम दिया है। टीएमयू के डॉक्टर्स ने युवक के निचले दायें जबड़े को निकालकर नया जबड़ा लगाया है। यदि समय रहते जबड़े को नहीं निकाला जाता तो यह शत-प्रतिशत कैंसर में तब्दील हो सकता था। इस ऑपरेशन की ख़ास बात यह है, यह नया जबड़ा पैर की हड्ड़ी से बनाया गया है। दूसरे यह ऑपरेशन ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत बिल्कुल निःशुल्क हुआ है। भर्ती से लेकर जांच, ऑपरेशन और दवाइयां सभी सुविधाएं फ्री में दी गई हैं । डॉक्टर्स का कहना है, बाजार में यह सर्जरी करीब दो से तीन लाख रूपए में होती । पांच घंटे तक चले इस दुर्लभ ऑपरेशन में डॉक्टर्स के सामने तमाम चुनौतियां थी। सबसे पहले दिमाग और जबड़े की आपस में जुड़ी नसों को बचाना, अतिरिक्त खून के रिसाव को रोकना, हेल्दी दांतों और टिश्यूज़ को बचाने के संग-संग पैर की हड्डी को काटते समय टूटने से बचाना सरीखी बड़ी चुनौती थीं। इस सर्जरी में मेक्जिलोफेशियल सर्जरी विभाग के हेड प्रो. दीपक ठाकुर की अगुवाई में डॉ. नकुल चौधरी, डॉ. शुभम मिश्रा, डॉ. मीमांषा दफ्तरी के संग-संग पीजी रेजीडेंट्स- डॉ. श्रेया चटर्जी, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, डॉ. रूषभ राउत, डॉ. शुभांगी गोयन आदि शामिल थे। डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. प्रदीप तांगडे और वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन ने डॉक्टर्स की टीम को बधाई देते हुए कहा, यह एक प्रकार की रेयर और कॉम्पलिकेटिड सर्जरी थी। इस प्रकार की सर्जरी देश के चुनिंदा बड़े अस्पतालों में ही होती है। टीएमयू में इस प्रकार की सर्जरी होना अपने आप में गर्व की बात है।

मुरादाबाद के बिलारी के किशन को करीब दो साल से दांतों में दर्द और सूजन की शिकायत थी। न तो वह पूरा मुंह खोल पाता था और न ही खाना मुक्कमल तौर पर चबा पाता था। वह आसपास के डॉक्टर्स से अपना इलाज कराता रहा, लेकिन कोई लाभ नहीं हो रहा था। डॉक्टर्स ने उसे दिल्ली जाकर इलाज कराने की सलाह दी। दिल्ली जाकर इलाज कराने का खर्च उसकी बजट से बाहर था। असहनीय दर्द के संग उम्मीद की किरण लेकर वह अंत में टीएमयू हॉस्पिटल आया। डेंटल हॉस्टिल के डॉक्टर्स ने पहले उसकी सीवीसीटी जांच कराई, जांच में आया कि युवक के दायीं ओर के निचले जबड़े की हड्डी पूरी तरह से गल गई थी। प्रारम्भिक जांच- बायोपसी में पता चला कि एक तरह का ट्यूमर- अमेलोब्लास्टोमा है। यह ट्यूमर कैंसर तो नहीं है, लेकिन तेजी से जबड़े में फैलने वाला ट्यूमर है। ख़ास बात यह है कि इसकी शुरूआती अवस्था में पेशेंट को इस तरह के ट्यूमर पता भी नहीं चलता हैं। जब पता लगता है, तब तक यह ट्यूमर- अमेलोब्लास्टोमा पूरी हड्डी को खत्म कर देता है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ओरल एंड मेक्जिलोफेशियल सर्जरी विभाग के हेड प्रो. दीपक ठाकुर 19 साल के अनुभव में अब तक 1500 ऑपरेशन कर चुके हैं।