मुंबई (अनिल बेदाग) : जब संगीत भक्ति में घुल जाता है और हर सुर ईश्वर के प्रति समर्पण की अनुभूति कराने लगता है, तब वह महज प्रस्तुति नहीं रहता, बल्कि आत्मिक अनुभव बन जाता है। पूज्य दादा जे.पी. वासवानी की 108वीं जयंती के अवसर पर निर्वाण बिरला ने कीर्तन जैमिंग के जरिए ऐसी ही भावपूर्ण संगीतमय शाम को साकार किया।
भक्ति गीतों और मधुर सुरों से सजी इस शाम में श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों ने शांति, प्रेम और आध्यात्मिक जुड़ाव को महसूस किया। कार्यक्रम ने दादा जे.पी. वासवानी के प्रेम, दया और क्षमा के संदेश को भी खूबसूरती से आगे बढ़ाया। निर्वाण बिरला ने कहा कि साधु वासवानी मिशन के साथ यह उनका तीसरा कीर्तन है और दादा जे.पी. वासवानी की जयंती का हिस्सा बनना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि संगीत के जरिए हर व्यक्ति कुछ पल ठहरे, खुद से जुड़े और ईश्वर को महसूस करे। पारंपरिक लंगर प्रसाद के साथ संपन्न हुई यह शाम भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक एकता का यादगार उत्सव बन गई।





