राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाया डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित कमीशनखोरी का मुद्दा

Raghav Chadha raised the issue of alleged commission-based practices between doctors and diagnostic centers in the Rajya Sabha

प्रमोद शर्मा

नई दिल्ली : राज्यसभा में सांसद राघव चड्ढा ने डॉक्टरों और कुछ डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन (कट-मनी) के मामले को उठाते हुए इसे मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मरीजों को यह तक पता नहीं होता कि उनकी जांच पर खर्च की गई राशि का एक हिस्सा रेफरल कमीशन के रूप में दिया जा रहा है।

सदन में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “मरीज बिल भरता है, लेकिन कमीशन कोई और ले जाता है। लोग अस्पताल इलाज कराने आते हैं, किसी के रेफरल कमीशन का भुगतान करने नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की व्यवस्था से मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और कई बार अनावश्यक जांच कराने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।

उन्होंने इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स का हवाला देते हुए कहा कि अनैतिक रेफरल प्रथाओं के कारण मरीजों के चिकित्सा खर्च में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल इलाज महंगा होता है, बल्कि आवश्यकता से अधिक जांच और रेफरल की प्रवृत्ति भी बढ़ती है।

राघव चड्ढा ने कहा कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की 2002 की आचार संहिता में इस प्रकार की “फी स्प्लिटिंग” पर रोक लगाई गई थी। वहीं राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के 2023 के प्रोफेशनल कंडक्ट नियमों के तहत भी रेफरल कमीशन लेना या देना प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित डॉक्टर का पंजीकरण एक से तीन माह तक निलंबित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत भी कार्रवाई संभव है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पूरे चिकित्सा समुदाय पर सवाल उठाना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश डॉक्टर पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ मरीजों की सेवा कर रहे हैं। समस्या केवल उन लोगों से है जो कट-मनी रेफरल सिस्टम को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने मरीजों से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी विशेष डायग्नोस्टिक सेंटर पर जाने का अनावश्यक दबाव बनाया जाए तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। प्रत्येक मरीज को अपनी पसंद के किसी भी मान्यता प्राप्त जांच केंद्र से जांच कराने का अधिकार है।

राघव चड्ढा ने सरकार से चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और नैतिक मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग की, ताकि मरीजों के हित सुरक्षित रह सकें और ईमानदार डॉक्टरों की प्रतिष्ठा भी बनी रहे।