शशांक त्यागी
मोदीनगर : श्री राम कथा आयोजन समिति के तत्वाधान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवस पर सभी श्रद्धालुओं के समक्ष भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णन किया। इसे सुनकर श्रद्धालुगण राधा-कृष्ण की भक्ति में डूब गए।
व्यास जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा की गई रासलीला “जीव एवं परमात्मा के मिलन का मार्ग दिखाती है।”
गोपियाँ जीवात्मा हैं और श्रीकृष्ण ईश्वर परमात्मा। रास का तात्पर्य है काम पर विजय प्राप्त करना और जीव का परमात्मा से मिलन। हम परमात्मा को पाना चाहते हैं, परंतु अपने चारों ओर अनेक प्रकार के आडंबर फैलाए रखते हैं। यदि ईश्वर को जानना अथवा पाना है, तो सबसे पहले अपने आप को जानना होगा और मोह के परदे को हटाना पड़ेगा।
व्यास जी ने कहा — एक ओर कृष्ण रूपी ईश्वर और दूसरी ओर गोपी रूपी जीव हैं। वस्त्र अविद्या का प्रतीक है। चीरहरण की लीला का अर्थ है जीव के ऊपर पड़े अज्ञान और मोह के परदे को हटाना।
भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के वस्त्र इसलिए चुराए क्योंकि नग्न होकर जल में स्नान करने से वरुण देवता का अपमान होता। उस समय भगवान की आयु केवल पाँच वर्ष थी, अतः उनमें कोई कामवासना नहीं थी। यह लीला हमें समझाती है कि ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं, आवश्यकता है तो केवल अपने भीतर के चक्षु खोलने की।
रासलीला वास्तव में जीव और परमात्मा के मिलन की एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिस पर चलकर असीम शांति एवं आनंद की अनुभूति होती है।
इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने कंस रूपी अभिमान का वध किया। कंस की दो पत्नियाँ आस्ती और प्राप्ति थीं, जिनका अर्थ है अहंकार एवं भोग की आकांक्षा।
रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी हैं और श्रीकृष्ण साक्षात नारायण। भगवान ने रुक्मिणी का हरण कर उसके भाई रुक्मी को ब्रह्म से पराजित किया। राजा भीष्मक ने भगवान का दर्शन कर अपनी कन्या रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण से किया, अर्थात् लक्ष्मी-नारायण का पुनः मिलन हुआ।
आज कथा में लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर, दिशा दिनेश संस्कार भारती, सुदेश मित्तल अनिल गर्ग बारदाने वाले, कृष्ण वीर चेयरमैन कॉपरेटिव बैंक, विपिन चौधरी पूर्व ब्लाक प्रमुख, निशांत, विनोद त्यागी एडवोकेट, राकेश गुप्ता, संदीप सांगवान, देवराज मित्तल, राधेश्याम गोयल, सुनील गोयल आदि उपस्थित रहे।





