इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार किया है। इंस्पेक्टर सुभाष की सौ करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों/ लेन देन आदि का पता चला है।
48 लाख बरामद-
सीबीआई ने 21 अप्रैल को इंस्पेक्टर सुभाष यादव के मातहत हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी।
सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से उस समय 48.87 लाख रुपये जब्त किए थे। तब इंस्पेक्टर सुभाष को सिर्फ लाइन हाज़िर किया गया था। इस मामले में अब इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार किया गया है।
आका आईपीएस –
इस मामले से इंस्पेक्टर सुभाष के आका आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया है। क्योंकि बिना किसी गॉड फादर आईपीएस के कोई मातहत इतनी संपत्ति नहीं बना सकता।
आईपीएस वाला भाईचारा-
सीबीआई में मौजूद आईपीएस अपने आईपीएस वाले भाईचारे को त्याग कर अगर ईमानदारी से जांच करें, तो इंस्पेक्टर सुभाष के कई आका आईपीएस अधिकारी भी जेल जा सकते हैं।
अकूत संपत्ति-
इंस्पेक्टर की संपत्ति/ लेन देन के खुलासे से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके आका आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति तो सैकड़ों/ हजारों करोड़ रुपये की होगी।
आईपीएस अधिकारियों की सांठगाठ के कारण ही इंस्पेक्टर सुभाष वर्षों से द्वारका जिले में महत्वपूर्ण पदों पर ही तैनात रहा है। कुछ समय पहले ही उसने एक आईपीएस को महंगी कार/ फॉरच्यूनर तोहफे में दी बताते हैं।
वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा-
इंस्पेक्टर सुभाष की संपत्ति और नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी अपराधियों/ नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
अपराधियों से सांठगाठ और वसूली करने वाले ऐसे इंस्पेक्टर सामान्य अपराधियों से ज्यादा खतरनाक है।
सरकार अगर सही मायने में अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाना चाहती है तो खाकी को खाक में मिलाने वाले ऐसे अपराधी पुलिसकर्मियों/ अधिकारियों का तो एनकाउंटर किया जाना चाहिए।





