दीपक कुमार त्यागी
- चिराग त्यागी हत्याकांड में कलेक्ट्रेट पर धरना देकर के त्वरित न्याय व परिवार की आर्थिक सहायता के लिए जिलाधिकारी गाजियाबाद के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम परिजनों व क्षेत्रवासियों ने दिया ज्ञापन
- चिराग त्यागी हत्याकांड में खोड़ा के सूर्या प्रताप चौहान हत्याकांड की तरह कार्रवाई ना होने से लोगों में आक्रोश व्याप्त, लोगों का सवाल एक ही जिले में ही हत्याकांड जैसे जघन्य मामले में दोहरे मापदंड क्यों
- लोगों को एक सवाल बार-बार परेशान कर रहा है कि देश की अनमोल धरोहर इंटरनेशनल पैरा एथलीट खिलाड़ी चिराग त्यागी की हत्या पर सूर्या प्रताप चौहान हत्याकांड जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही
- लोगों की चेतावनी आगामी शनिवार तक मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित, समस्त ग्रामवासी और क्षेत्रवासी मजबूरन आमरण अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी
गाजियाबाद : गाजियाबाद जनपद के ग्राम बसंतपुर सैथली निवासी देश की धरोहर उभरते हुए इंटरनेशनल पैरा एथलीट चिराग त्यागी की निर्मम हत्या के बाद की गयी अभी तक की कार्रवाई से परिवार और शुभचिंतक पूरी तरह से संतुष्ट नज़र नहीं आ रहे हैं। आक्रोशित लोगों के द्वारा हत्यारे व उसके सहयोगियों के एनकाउंटर व परिवार की आर्थिक सहायता की मांग लगातार की जा रही है। इसी संबंध में 2 जून 2026 के केंडिल मार्च के बाद 3 जून को ग्रामवासियों, क्षेत्रवासियों एवं पीड़ित परिवार की ओर से न्याय एवं अन्य उचित मांगों को लेकर के गाजियाबाद के जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन / मांग पत्र दिया था। इस मसले पर लोगों के द्वारा सिस्टम पर लापरवाही बरतते हुए जघन्य हत्या के मामले में दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाये जा रहे हैं, लोग कह रहे हैं कि चिराग त्यागी हत्याकांड में सौतेला व्यवहार क्यों।
वैसे जिलाधिकारी गाजियाबाद के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गये पीड़ित परिवार, ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासियों के द्वारा इस ज्ञापन / मांग पत्र में लिखा गया है कि – “हम सभी ग्रामवासी, क्षेत्रवासी और पीड़ित परिवार अत्यंत दुखी और आक्रोशित मन से आपका ध्यान उत्तर प्रदेश के होनहार इंटरनेशनल पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हुई निर्मम हत्या की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा इस मामले में की जा रही त्वरित कार्रवाई की सराहना के साथ ही, कुछ ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गंभीर बिंदु हैं जो जल्दबाजी में जांच से छूट गए हैं या छोड़ दिए गए हैं। अतः आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं और मांगों पर संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय दिलाने की कृपा करें:
१. पुलिस जांच में छूटे हुए मुख्य एवं गंभीर बिंदुः
सह-आरोपियों की संलिप्तताः हत्या के समय मुख्य आरोपी यश खटीक के साथ उसके बड़े भाई और चाचा भी मौके पर मौजूद थे इसकी हमें आशंका है। इस जघन्य अपराध में उनकी भूमिका की भी गहन जांच कर उन्हें सह-आरोपी बनाया जाए।
वित्तीय धोखाधड़ीः चिराग त्यागी की हत्या से ठीक पहले और बाद में, उसके बैंक खाते से फर्जी हस्ताक्षर करके पैसे निकाले गए हैं। इस बैंक ट्रांजैक्शन की तत्काल फोरेंसिक और साइबर जांच कराई जाएए।
आपराधिक इतिहासः मुख्य आरोपी यश खटीक के पूरे परिवार का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिसकी विस्तृत जांच कर रिकॉर्ड पर लिया जाए।
दस्तावेजों में हेराफेरी एवं फर्जीवाड़ाः आरोपी यश खटीक आधार कार्ड आदि बनाने / संशोधन से जुड़े कार्यों में लिप्त रहा है। उसने अपने शैक्षिक दस्तावेजों में हेराफेरी करके अपनी वास्तविक उम्र छुपाई है। इसके अलावा, नॉन-पैरा एथलीट होते हुए भी उसने गलत और जाली दस्तावेजों के आधार पर पैरा-एथलीट का सर्टिफिकेट बनवाया और प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इस पूरे फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच हो।
२. ग्रामवासियों, क्षेत्रवासियों एवं पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें:
कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई (एनकाउंटर एवं डिमोलिशन): समाज में कड़ा संदेश देने के लिए इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों का त्वरित एनकाउंटर सुनिश्चित किया जाए और अपराधियों के घरों पर विधिक रूप से बुल्डोजर चलाकर डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) की कार्रवाई की जाए।
सभी दोषियों के नाम दर्ज करनाः हत्या की इस पूरी साजिश और वारदात में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लिप्त सभी चेहरों को मुकदमे में नामजद कर जेल भेजा जाए।
शहीद खिलाड़ी की स्मृति में सम्मानः भारत के इस उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट की स्मृति को जीवित रखने के लिए ग्राम बसंतपुर सैथली में एक आधुनिक खेल मैदान का निर्माण कराया जाए तथा गांव के मुख्य मार्ग का नामकरण “चिराग त्यागी मार्ग” किया जाए।
पीड़ित परिवार का भरण-पोषणः चिराग अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके जाने के बाद अस्वस्थ पिता और विकलांग माता के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। अतः सरकार द्वारा परिवार के लिए एक एक करोड़ रूपये सहयता राशी और नियमित आय अथवा पेंशन की स्थाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जांच में पारदर्शिताः पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही संपूर्ण विवेचना की प्रगति से पीड़ित परिवार को समय-समय पर पूरी पारदर्शिता के साथ अवगत कराया जाता रहे।
३. अल्टीमेटम (अंतिम चेतावनी):
विशेष नोटः महोदय, पीड़ित परिवार और संपूर्ण क्षेत्र न्याय की आस में बैठा है। यदि आगामी शनिवार तक स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा उपरोक्त बिंदुओं पर उचित एवं निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती है, तो पीड़ित परिवार, समस्त ग्रामवासी और क्षेत्रवासी मजबूरन आमरण अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके ‘अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस’ के संकल्प के तहत चिराग त्यागी के हत्यारों को उनके किए की सजा मिलेगी और पीड़ित परिवार को उचित संरक्षण प्राप्त होगा।”
यहां आपको बता दें कि 30 मई 2026 को गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के थाना कोतवाली क्षेत्र में स्थित साई उपवन में इंटरनेशनल पैरा ओलंपिक खिलाड़ी चिराग त्यागी का गोली लगा हुआ शव मिला था, घर का होनहार इकलौता चिराग हमेशा-हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गया था। चिराग त्यागी हाल ही में बेंगलुरु में 400 मीटर में गोल्ड मेडल जीता था, वह निरंतर सफलता के पथ पर नित-नए आयाम स्थापित कर रहा था। चिराग त्यागी ने विदेश में होने वाली प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया था। चिराग हत्याकांड की प्रारंभिक जांच में उसके घनिष्ठ मित्र पैरा खिलाड़ी यश खटीक को हत्यारोपी पाया गया, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे व उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। लेकिन जिस तत्परता के साथ पुलिस ने बकरीद पर खोड़ा में सूर्य प्रताप चौहान की हत्या पर कार्रवाई करते हुए हत्यारोपी असद का एनकाउंटर करते हुए उसके परिजनों की आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी का बंदोबस्त करते हुए आरोपी के घर को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई करने का कार्य शुरू कर रखा है, वह बेहद ही काबिले-तारीफ है। हालांकि चिराग त्यागी के परिजनों व शुभचिंतकों को जिलाधिकारी ने कुछ मांगों पर सहमति जताते हुए बाकि पर भी विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन लोगों को अफसोस है कि आखिर क्यों देश की अनमोल धरोहर चिराग त्यागी हत्याकांड के मामले में दोहरे मापदंड अपनाएं जा रहे हैं, आखिर क्यों देश की धरोहर चिराग त्यागी के परिवार को न्याय के लिए सड़कों पर उतर कर गुहार लगानी पड़ रही है, स्थिति सिस्टम में बैठे ताकतवर लोगों के साथ-साथ आम जनमानस के लिए विचारणीय है। एक घर का चिराग हमेशा-हमेशा के लिए बुझ गया है और अपने पोस्टमार्टम से लेकर जांच तक, न्याय दिलवाने के लिए आवाज़ उठा रहे लोगों से सिस्टम के व्यवहार तक अनगिनत सवाल छोड़ गया है।





