रत्नज्योति दत्त
नई दिल्ली: विश्व शांति सुनिश्चित करने के लिए लोकतंत्र में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए आक्रामक रुख को पूरी तरह मिटाना होगा। हाल ही में ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाए गए कदमों की आलोचना करते हुए देश के एक प्रमुख सनातनी समुदाय के वरिष्ठ धर्मगुरु ने यह विचार व्यक्त किए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान की असहज वैश्विक परिस्थितियों के कारण दुनिया भर के आम लोगों को एक असहनीय आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के लिए अमेरिका-इजरायल संयुक्त सैन्य बल को हरी झंडी दी थी, जिसके परिणामस्वरूप मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के इस टकराव ने वैश्विक व्यापार में खनिज तेल (क्रूड ऑयल) की आपूर्ति के क्षेत्र में एक गंभीर वैश्विक अस्थिरता पैदा कर दी है।
जादवपुर स्थित ‘श्री श्री कैवल्यधाम’ के महाराज कालीपद भट्टाचार्य ने कहा, “मैं ऐसी किसी भी मानसिकता का तीव्र विरोध करता हूँ जो आक्रामकता और औपनिवेशिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।”
उन्होंने आगे कहा कि जब मानसिकता में आक्रामकता स्थान ले लेती है, तो समाज में उसका क्या परिणाम हो सकता है, इसे हाल ही में मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के युद्ध के माध्यम से पूरी दुनिया ने हमारे जीवनकाल में एक बार फिर प्रत्यक्ष देखा है।
महाराज ने बताया कि यदि आम इंसान भागवत या गीता जैसे पवित्र ग्रंथों की शिक्षाओं के संपर्क में आए, तो वे जीवन में किसी भी आक्रामक दृष्टिकोण और मानसिकता को नियंत्रित करने में सक्षम होंगे। “मन को शांत रखने के लिए पवित्र नाम का जाप करना भी अत्यंत सहायक होता है,” उन्होंने कहा।
उनके अनुसार, एक आध्यात्मिक गुरु द्वारा निर्देशित उच्च आदर्शों से जुड़े रहना जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है। महाराज ने उल्लेख किया,एक आध्यात्मिक शिक्षक और एक सामान्य शिक्षक के बीच एक सूक्ष्म अंतर होता है।” उन्होंने कहा कि एक आध्यात्मिक शिक्षक अपने शिष्य को दिव्य चेतना की ओर ले जाकर एक शांत मन का स्वामी बनने में सहायता करता है। दूसरी ओर, एक शिक्षक अपने छात्र को जीवन में, विशेष रूप से व्यावसायिक जीवन में स्थापित होने के लिए सशक्त बनाता है।
महाराज का मानना है कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में शांति बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक गुरु के चरणों में खुद को पूरी तरह समर्पित करना होगा। हाल ही में, महाराज दिल्ली के तिगड़ी आश्रम में एक दीक्षा समारोह के सिलसिले में राजधानी के अल्पकालिक प्रवास पर थे।
श्री श्री राम ठाकुर के आदर्शों का प्रचार करने वाले इस आध्यात्मिक संगठन के सातवें उत्तराधिकारी के रूप में, कालीपद भट्टाचार्य महाराज उत्तर-पूर्वी भारत सहित विभिन्न स्थानों पर अपने गुरु की दिव्य वाणी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
साक्षात्कार (इंटरव्यू) के दौरान महाराज ने यह विचार व्यक्त किया कि श्री श्री ठाकुर के अपने हाथों से लिखे गए पत्रों का तीन खंडों का पुस्तक संग्रह ‘वेदवाणी’, वर्तमान समय में विश्व के लोगों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।





