विवेक शुक्ला
ब्राजील के बिना फीफा विश्व कप की कल्पना करना भी नामुमकिन है। जब ब्राजील की टीम मैदान पर उतरती है, तो माहौल जादुई हो जाता है। पीली जर्सी में सजे खिलाड़ी जैसे फुटबॉल का जादू बिखेर देते हैं। पूरा स्टेडियम नाच उठता है, संगीत गूंजने लगता है। ब्राजील न सिर्फ मैच जीतता है, बल्कि करोड़ों दर्शकों के दिल जीत लेता है। यही वजह है कि हर विश्व कप में ब्राजील सबसे बड़ा फेवरेट माना जाता है। ब्राजील की टीम ने चालू विश्व कप के पहले मैच में मोरोक्को के खिलाफ कोई चमकदार प्रदर्शन नहीं किया, पर उसका जलवा बरकरार है।
ब्राजील फीफा विश्व कप का सबसे सफल और लोकप्रिय देश है। वे एकमात्र टीम हैं जिसने हर विश्व कप में हिस्सा लिया है और रिकॉर्ड पांच बार खिताब जीता है। 1958, 1962, 1970, 1994 और 2002 में। कोई भी टीम इतनी निरंतरता और सफलता नहीं दिखा पाई है। शुरू से ही ब्राजील ने यूरोपीय दबदबे को चुनौती दी और फुटबॉल को नया आयाम दिया।
1958 का स्वीडन विश्व कप ब्राजील के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। सिर्फ 17 साल के पेले ने अपनी चमक से दुनिया को चौंका दिया और ब्राजील पहली बार चैंपियन बना। 1962 के चिली विश्व कप में पेले चोटिल हो गए, लेकिन गार्रिंचा के नेतृत्व में टीम ने दूसरा खिताब जीत लिया। गार्रिंचा इतिहास के सबसे महान ड्रिब्लर्स में से एक थे। उनकी विकृत टांगों के बावजूद गेंद के साथ उनका जादू आज भी याद किया जाता है।
1970 का मेक्सिको विश्व कप ब्राजील के कलात्मक फुटबॉल का स्वर्णिम अध्याय था। पेले, जर्सिन्हो, टोस्टाओ, रिवेलिनो और कार्लोस अल्बर्टो जैसी दिग्गजों से सजी टीम को आज भी विश्व कप इतिहास की सर्वश्रेष्ठ टीम माना जाता है। फाइनल में इटली को 4-1 से हराकर तीसरा खिताब जीतने के साथ ब्राजील ने जूल्स रीमेट ट्रॉफी को स्थायी रूप से अपने नाम कर लिया। तीन बार जीतने वाली टीम को ट्रॉफी हमेशा के लिए मिल जाती थी, इसलिए नई ट्रॉफी शुरू की गई।
1982 की स्पेन विश्व कप टीम हालांकि खिताब नहीं जीत सकी, लेकिन कई विशेषज्ञों के लिए कलात्मकता के मामले में सबसे बेहतरीन रही। टेले सांताना की कोचिंग में ज़िको, सोक्रेट्स, फाल्काओ, एडर और जूनियर वाली टीम ने फुटबॉल का नया मापदंड पेश किया। वे जीतने से ज्यादा खेल का आनंद लेते थे। ग्रुप स्टेज में न्यूजीलैंड को 4-0, स्कॉटलैंड को 4-1 और सोवियत संघ को 2-1 से हराने वाली यह टीम क्वार्टर फाइनल में इटली से 3-2 से हार गई, लेकिन ‘सबसे बेहतरीन टीम जो कभी विश्व कप नहीं जीती’ के रूप में अमर हो गई।
पेप गार्डिओला जैसे महान कोच ने इसे “सबसे अद्भुत राष्ट्रीय टीम” करार दिया। ज़िको की क्रिएटिविटी, सोक्रेट्स की विजन और कप्तानी, फाल्काओ की मिडफील्ड मास्टरी और एडर के खतरनाक शॉट्स आज भी फुटबॉल प्रेमियों को प्रेरित करते हैं। यह टीम साबित करती है कि फुटबॉल में नतीजे से ज्यादा स्टाइल, जुनून और सुंदरता मायने रखती है।
ब्राजील की फुटबॉल सिर्फ जीत का खेल नहीं, बल्कि कला का प्रदर्शन है। उनकी पासिंग लाजवाब, ड्रिब्लिंग मंत्रमुग्ध करने वाली और ऑफ-बॉल मूवमेंट संगीतमय होता है। ब्राजील के समुद्र तटों, फुटबॉल मैदानों और गलियों से निकलने वाले खिलाड़ी बचपन से गेंद के साथ नाचते-खेलते बड़े होते हैं। गरीबी की चुनौतियों के बीच फुटबॉल उनके लिए उम्मीद और सपनों का माध्यम बन जाता है। यही संस्कृति उन्हें अलग बनाती है।
पेले को ‘द किंग’ कहा जाता है। उन्होंने तीन विश्व कप जीते, 12 गोल किए और 1000 से ज्यादा गोलों का रिकॉर्ड बनाया। उनका खेल सरल लेकिन बेहद प्रभावी था। रोनाल्डो की स्पीड, पावर और फिनिशिंग ने 2002 में ब्राजील को खिताब दिलाया। उन्होंने 15 विश्व कप गोल किए, जो आज भी रिकॉर्ड है। रोनाल्डिन्हो का मुस्कुराता जादू हर किसी के जेहन में है। आज नेमार, विनीसियस जूनियर, रोड्रिगो और अन्य युवा सितारे उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। ब्राजील का खेल हमेशा आक्रामक, खुशमिजाज और अप्रत्याशित रहता है। वे डिफेंस को भेदने के बजाय उसे नाचते-गाते पार कर जाते हैं।
ब्राजील की सफलता के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है विशाल टैलेंट पूल। 20 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश में हर गली-मोहल्ले में फुटबॉल खेला जाता है। यहां फुटबॉल धर्म की तरह है। कार्निवल की लय, सांबा की ताल और फुटबॉल का अनोखा मिश्रण खिलाड़ियों को आत्मविश्वास और रचनात्मकता देता है। तकनीकी रूप से भी ब्राजील हमेशा आगे रहा। 1958 की टीम ने 4-2-4 फॉर्मेशन का इस्तेमाल किया, जो आधुनिक फुटबॉल की नींव बना।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में चुनौतियां आई हैं। 2014 में घरेलू मैदान पर जर्मनी के हाथों 7-1 की करारी हार और 2022 में क्वार्टर फाइनल में निराशा याद है। यूरोपीय टीमों ने शारीरिक और सामरिक तैयारी में तेजी दिखाई है। फिर भी हर टूर्नामेंट से पहले ब्राजील को सबसे मजबूत दावेदार माना जाता है। उनका आत्मविश्वास, विरासत और अप्रत्याशित खेल उन्हें फेवरेट बनाए रखता है। 2026 में भी वे ट्रॉफी का प्रबल दावेदार हैं।
दुनिया भर में ब्राजील सबसे पसंदीदा टीम क्यों है? क्योंकि वे फुटबॉल को मनोरंजन और कला से जोड़ते हैं। भारत में भी ब्राजील का जलवा खास है। पेले की कहानियां 1950-60 के दशक से भारतीयों को आकर्षित करती रहीं। 1982 की टीम ने युवाओं को दीवाना बना दिया। केरल, पश्चिम बंगाल, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में ब्राजील समर्थक सबसे ज्यादा हैं। भारतीय दर्शक कौशल, फ्लेयर और खुशी चाहते हैं, जो ब्राजील खूब देता है। दोनों देशों की उपनिवेशवाद विरोधी भावना भी इस लगाव को मजबूत करती है।
ब्राजील का विश्व कप में जलवा सिर्फ ट्रॉफी जीतने से नहीं, बल्कि फुटबॉल को सुंदरता और जुनून से भरने से है। 1970 की चैंपियन टीम से लेकर 1982 की जादुई टीम, पेले से ज़िको-सोक्रेट्स, रोनाल्डो-रोनाल्डिन्हो और विनीसियस तक की यात्रा हर फुटबॉल प्रेमी को प्रेरित करती है। वे सिखाते हैं कि खेल सिर्फ परिणाम नहीं, प्रक्रिया, जुनून और कला भी होता है।
‘ओ ब्राजील, ओ ब्राजील’ का नारा सिर्फ समर्थन नहीं, बल्कि सम्मान का प्रतीक है। 2026 विश्व कप में फिर से सेलेकाओ का जादू देखने का इंतजार है। ब्राजील फुटबॉल की आत्मा है और यही वजह है कि वह हर विश्व कप की सबसे पसंदीदा टीम बनी रहती है।





