मानवजनित आपदाएं : सिस्टम की खामियां, जनजागरूकता का अभाव

Man-made disasters: Systemic flaws, lack of public awareness

ओ पी उनियाल

लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हृदयविदारक आगजनी वाली घटना, इससे पहले दिल्ली के एक होटल में ऐसी ही घटना ने भला किसको नहीं झकझोरा होगा। आए दिन न जाने कितनी ऐसी घटनाएं घटती हैं। जिससे जानमाल की क्षति का आकलन करना भी संभव नहीं हो पाता।

आगजनी, सड़क, रेल हवाई जैसी घटनाएं अक्सर घटित होती रहती हैं, ये सब मानवजनित आपदाएं ही तो होती हैं। मानवीय लापरवाही, चूक, मानकों व सिस्टम की अनदेखी का परिणाम होता है यह सब। फिर भी ऐसी आपदाओं को मानवजनित मानने को कोई सहमत ही नहीं होता। हरेक अपनी लापरवाही व चूक नजरअंदाज करके उसका सारा ठीकरा भगवान के सिर पर फोड़ देता है।

दो-चार दिन उन पर अखबारों, सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से खूब चर्चाएं, नियम-कानून बनाने, सुधार करने की लंबी-चौड़ी बातें होती हैं, यहां तक कि राजनीति का खेला भी खूब खेला जाता है, समय बीतते ही सबका पटाक्षेप हो जाता है।
लापरवाही व चूक का परिणाम हमेशा उनको झेलना पड़ता है जो अपनों को खो बैठते हैं या अधरंग हो जाते हैं। हरेक की सोच अपनी सलामती’ तक सिमट चुकी है। ऊपर से सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार और शिथिल कार्यप्रणाली का तुर्रा किसी न किसी रूप में मानवजनित आपदाओं को बढ़ावा देता है।

आपदा चाहे प्राकृतिक हो या मानवजनित दु:खद ही होती है। मानो या न मानो प्राकृतिक आपदाएं भी कुछ हद तक मानवजनित ही होती हैं। क्योंकि मनुष्य ने जब से प्रकृति से अधिक छेड़छाड़ की है तब से उसका स्वरुप बिखर-सा गया है। प्रकृति का तांडव पिछले कुछ सालों से भयंकर रूप में देखने को मिल रहा है।

प्राकृतिक आपदाएं विश्व के हर कोने में आती हैं। कहीं कम तो कहीं अधिक। ज्वालामुखी फटना, धरती फटना, भूस्खलन, एवलॉंच, बादल फटना, सूखा, बाढ़, आंधी-तूफान, भूकंप, ज्वार-भाटा, वनाग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का क्रम कहीं न कहीं लगा ही रहता है। प्राकृतिक आपदाएं थामना मनुष्य के वश में बेशक न हो मगर प्रकृति का संरक्षण करके अपना योगदान दिया जा सकता है। जिसका प्रतिफल सकारात्मक ही मिलेगा नकारात्मक नहीं।

पिछले दिनों 3 से 5 जून 2026 तक पुरी(उड़ीसा) में आयोजित ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप की तीन दिवसीय बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित 11 ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत अवसंरचना, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, पूर्वानुमान आधारित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए सतत वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।
बैठक की प्रमुख उपलब्धियों में ब्रिक्स देशों के बीच आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग को मजबूत करना, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना, सामुदायिक स्तर पर तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए साझा रणनीतियां विकसित करना और वैश्विक आपदा प्रबंधन सहयोग को नई दिशा देना शामिल रहा।

मानवजनित आपदाओं को कम करने व रोक लगाने के लिए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।