रविवार दिल्ली नेटवर्क
केंद्र की मोदी सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में संसद में जो परिसीमन बिल ला रही है, इसका विरोध कांग्रेस और सपा सिर्फ विरोध के लिए कर रहे हैं और मुझे लगता है यह विरोध सीधा-सीधा जनता का विरोध है, क्योंकि अब भारत में 543 सांसद है और परिसीमन के बाद भारत में लगभग 800 सांसद हो जाएंगे। मैं सिर्फ उत्तर प्रदेश की ही बात करूं तो उत्तर प्रदेश में अब 80 सांसद है और परिसीमन के बाद लगभग 120 सांसद हो जाएंगे, उत्तर प्रदेश में आज एक संसदीय क्षेत्र में लगभग 17 लाख वोटर है और परिसीमन के बाद एक संसदीय क्षेत्र में लगभग 11 लाख वोटर रह जाएंगे, इससे जनता की पहुंच सांसद तक बढ़ेगी और विकास को भी रफ्तार मिलेगी। क्योंकि अब जो सांसद निधि मिलती है वह 17 लाख वोटरों के क्षेत्र के लिए मिलती है और जब परिसीमन के बाद सांसद निधि मिलेगी तो 11 लाख वोटरों के क्षेत्र के लिए मिलेगी तो निश्चित ही विकास की रफ्तार बढ़ेगी, योजनाएं आसानी से लागू होगी सांसद आसानी से जनता के बीच पहुंचेंगे। मुझे लगता है कांग्रेस और सपा परिवारवादी पार्टी है और पहले से ही जनता विरोधी और विकास विरोधी पार्टी रही है और अब भी उसकी हरकतें यही बयां कर रही है मैं तो कांग्रेस और सपा से अपील करूंगा कि वह परिसीमन बिल के पक्ष में आए और सरकार का साथ दे तो अच्छा रहेगा, अगर कांग्रेस और सपा इसी तरह जनता विरोधी आचरण करती रही तो एक दिन आएगा दोनों पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जो परिस्थितियों बन रही है उसे लगता है यह बिल तो कांग्रेस और सपा अगर साथ मिला दे तो भी पास हो ही जाएगा क्योंकि यह जनता के हित का बिल है इसलिए विपक्ष के ही बहुत सारे सांसद इस बिल के पक्ष में अपना मतदान करेंगे।





