हां हम अंध भक्त हैं देश सबसे पहले है

Yes, we are blind devotees; the country comes first

मोदी का विरोध सह लेंगे लेकिन देशद्रोह नहीं, देशभक्त युवा चाहिए चाहिए – युवा और संस्कार बचाओ”

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

हां, हम हैं अंधभक्त, क्योंकि हमारे लिए देश सबसे पहले है। मोदी का विरोध करो, चलेगा। सिस्टम का विरोध करो, चलेगा। लेकिन देश का विरोध स्वीकार नहीं करेंगे। देशद्रोही का साथ कभी नहीं देंगे। मेरे देश के खिलाफ बोलने वाला कोई भी हो – छात्र हो या छात्र नेता, मेरे लिए वो देशद्रोही ही है।

विरोध करना है तो कोर्ट में याचिका दो, संस्था की वेबसाइट पर शिकायत करो, कलम की ताकत बनाओ, सोशल मीडिया पर लिखो। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति की तोड़-फोड़, आगजनी, देश के खिलाफ नारे… ये क्या साबित कर रहे हैं? सच में ये वो “कॉकरोच” हैं जो सीलन और गंदगी से पैदा होते हैं और जहां जाते हैं गंदगी ही फैलाते हैं।

मुझे समझ नहीं आता हमारे देश के युवाओं को हो क्या गया है। बिना सोचे-समझे ये देशद्रोही दुश्मनों के बहकावे में कैसे आ जाते हैं। जो पढ़ने वाले छात्र हैं वो कभी उपद्रव नहीं करते। वो मेहनत करते हैं अच्छा परिणाम लाने के लिए। जो छात्रों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, मासूम छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहे हैं, देश के टुकड़े करने की धमकी दे रहे हैं – वो देशद्रोही हैं। ऐसे संगठनों से छात्रों को दूर रहना चाहिए।

किसी में इतना दम नहीं जो मेरे भारत के टुकड़े कर सके। हम वीर भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद को अपना आदर्श मानते हैं। महंगाई बर्दाश्त कर लेंगे, पर देशद्रोह बर्दाश्त नहीं करेंगे। देश के खिलाफ आवाज नहीं सुन सकते।

समस्या की जड़: परवरिश और शिक्षा
इसका दोष सिर्फ सरकार को देना आसान है, पर सच्चाई ये है कि जड़ हमारी परवरिश में है।

जापान, चीन, जर्मनी जैसे देशों के युवा अनुशासित और देशभक्त क्यों हैं? क्योंकि उन्हें बचपन से सिखाया जाता है – घर स्वच्छ रखो, सड़के स्वच्छ रखो अपना काम स्वयं करो, समाज के प्रति जिम्मेदार बनो।

वहीं हमारे यहां पैसों की दौड़ में माँ-बाप दोनों कमाने निकल जाते हैं। बच्चे आया और मोबाइल के भरोसे। बच्चा फोन में क्या देख रहा है इसकी खबर नहीं। जो बच्चे बचपन में हिंसा करते हैं, गुस्से में सामान तोड़ते हैं, वही बड़े होकर अपराधी बनते हैं। ज्यादा लाड़-प्यार में हम अपने ही हाथों बच्चों को बिगाड़ रहे हैं।

स्कूलों में भी बस सिलेबस पूरा करने की दौड़ है। 15 अगस्त और 26 जनवरी आज के बच्चों के लिए सिर्फ छुट्टी का दिन रह गया है। उन्हें नहीं पता कितनी कुर्बानियों के बाद आजादी मिली है।

आजादी का गलत मतलब
आज के युवा आजादी का गलत अर्थ निकाल रहे हैं। आजादी के नाम पर अराजकता, तोड़-फोड़ कर रहे हैं। क्या ये युवा हमारे देश का भविष्य हैं?

सर्वप्रथम शुरुआत अपने घर से ही करें। देखें हम बच्चों को क्या संस्कार दे रहे हैं – एक जिम्मेदार नागरिक बना रहे हैं या एक अपराधी।

सिर्फ सिस्टम को दोष देने से समस्या हल नहीं होगी। देश बचाना है तो पहले युवाओं को बचाओ, अपनी संस्कृति को बचाओ।

विदेशी फंडिंग लेकर दंगा कराने, धर्मांतरण फैलाने वाले NGO और संगठनों पर रोक लगनी चाहिए। जब तक देश में हम जैसे देशभक्त हैं, कोई भी देश के टुकड़े नहीं कर सकता। सोनम वांगचुक का एनजीओ है जो विदेशी फंडिंग लेता है। मोदी जी इस विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए बिल पास करने वाले हैं इसलिए इन देशद्रोहियों को हज़म नहीं हो रहा है। मासूम छात्रों को उकसाकर देश को नेपाल बनाने का सपना देखने वालो जब तक देश में हम जैसे अंधभक्त हैं तुम्हारा सपना कभी पूरा नहीं होगा।

इसलिए प्रण लीजिए – पहले युवाओं को बचाओ, संस्कार बचाओ। तभी देश बचेगा।

जय हिंद, जय भारत।

डॉ वंदना शर्मा