बस्तर के किसान ने अंतरराष्ट्रीय कृषि मंच पर बिखेरा जलवा, प्रस्तावित कृषि विमान के साथ तस्वीर बनी वैश्विक आकर्षण का केंद्र

A farmer from Bastar dazzled the international agricultural stage; a photograph featuring him with a proposed agricultural aircraft became a global attraction

भारत अंतर्राष्ट्रीय कृषि व्यापार सम्मेलन एवं एक्सपो 2026″
(IAB Conference & Expo 2026) में कृषि जागरण के स्टॉल पर सबसे अधिक चर्चा में रहे ‘रिचेस्ट फार्मर ऑफ इंडिया’ डॉ. राजाराम त्रिपाठी, आधुनिक विज्ञान और परंपरागत कृषि ज्ञान के समन्वय का दिया संदेश

रविवार दिल्ली नेटवर्क

मुंबई : कभी बस्तर के जंगलों में जैविक खेती का सपना देखने वाले किसान डॉ. राजाराम त्रिपाठी आज अंतरराष्ट्रीय कृषि जगत में भारत के नवाचार, आत्मविश्वास और वैज्ञानिक सोच के प्रतीक के रूप में उभर रहे हैं। मुंबई के प्रतिष्ठित जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर (JWCC), बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय कृषि व्यापार सम्मेलन एवं एक्सपो 2026″ में कृषि जागरण के स्टॉल पर प्रदर्शित डॉ. त्रिपाठी का विशाल पोस्टर, जिसमें वे कृषि कार्यों के लिए प्रस्तावित अपने विमान के साथ दिखाई दे रहे हैं, पूरे सम्मेलन का सबसे चर्चित आकर्षण बन गया। दो दिनों तक देश-विदेश से आए कृषि वैज्ञानिक, उद्योगपति, निवेशक, नीति-निर्माता, स्टार्टअप्स और हजारों प्रगतिशील किसान इस पोस्टर के सामने रुककर बस्तर के इस किसान की उपलब्धियों और कृषि नवाचारों की जानकारी लेते रहे।

विश्वस्तरीय भारत अंतर्राष्ट्रीय कृषि व्यापार सम्मेलन एवं एक्सपो 2026″ कृषि, पशुधन, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि उद्योग, निवेश और आधुनिक कृषि तकनीकों का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसमें अनेक देशों के विशेषज्ञ, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, कृषि विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान तथा नीति निर्माता भाग लेते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन में किसी भारतीय किसान को इस प्रकार केंद्र में स्थान मिलना भारतीय कृषि के बढ़ते वैश्विक सम्मान का संकेत माना जा रहा है।

डॉ. राजाराम त्रिपाठी वही किसान हैं जिन्हें‌ मिलिएनर फार्मर आप इंडिया अवार्ड (Millionaire Farmer of India (MFOI) Awards) के प्रथम संस्करण में देश का पहला “रिचेस्ट फार्मर ऑफ इंडिया” सम्मान प्रदान किया गया था। यह सम्मान केवल अधिक आय का प्रतीक नहीं, बल्कि कृषि में नवाचार, उद्यमिता, सामाजिक नेतृत्व और किसानों के लिए प्रेरणा बनने की राष्ट्रीय पहचान भी है।

MFOI Awards की परिकल्पना कृषि जागरण एवं Agriculture World के संस्थापक एवं प्रधान संपादक एम.सी. डोमिनिक ने इस विचार के साथ की कि भारत के असाधारण किसानों को भी वही प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए जो उद्योग, विज्ञान और खेल जगत के उत्कृष्ट व्यक्तित्वों को प्राप्त होती है। उनके नेतृत्व में प्रारंभ हुआ यह अभियान आज देश के सबसे प्रतिष्ठित किसान सम्मानों में शामिल हो चुका है। इस अभियान को आगे बढ़ाने में शाइनी डोमिनिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कृषि जागरण द्वारा IIAB जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर MFOI Awards को प्रमुखता से प्रस्तुत करना किसानों के सम्मान को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

डॉ. त्रिपाठी के कृषि नवाचारों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने देश का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित जैविक हर्बल फार्म स्थापित किया। उनके द्वारा विकसित “माँ दंतेश्वरी ब्लैक पेपर-16 (MDBP-16)” काली मिर्च की ऐसी उन्नत प्रजाति है जो सामान्य किस्मों की तुलना में कई गुना अधिक उत्पादन देती है, कम सिंचाई में भी सफल रहती है तथा गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट परिणाम देती है।

उनका विकसित नेचुरल ग्रीनहाउस कृषि क्षेत्र में एक अभिनव मॉडल माना जा रहा है। प्राकृतिक वृक्षों पर आधारित यह संरचना महंगे पॉलीहाउस का पर्यावरण अनुकूल विकल्प है। इसकी लागत पारंपरिक पॉलीहाउस की तुलना में बहुत कम है, प्लास्टिक प्रदूषण नहीं फैलाती, तापमान को स्वाभाविक रूप से संतुलित रखती है तथा छोटे और मध्यम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

डॉ. त्रिपाठी शिक्षा के क्षेत्र में भी विशिष्ट पहचान रखते हैं। बी.एससी., एल.एल.बी., छह विषयों में एम.ए. तथा डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त करने वाले वे संभवतः देश के सर्वाधिक शिक्षित किसानों में गिने जाते हैं। वे अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं और देशभर के लगभग पैंतालीस किसान संगठनों को एक साझा मंच पर जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

हाल ही में पोलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भाग लेकर लौटे डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि भविष्य की कृषि केवल ट्रैक्टर और ड्रोन तक सीमित नहीं रहेगी। विशाल कृषि क्षेत्रों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उच्च मूल्य की फसलों की निगरानी, अनुसंधान, बीज उत्पादन तथा आपदा प्रबंधन के लिए छोटे कृषि विमानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने कृषि कार्यों के लिए विशेष विमान खरीदने की योजना बनाई है। IIAB सम्मेलन में इसी प्रस्तावित विमान के साथ उनकी तस्वीर ने लोगों की कल्पना और जिज्ञासा दोनों को आकर्षित किया।

इस अवसर पर डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कृषि जागरण की पूरी टीम, उसके संस्थापक एवं स्वप्नदृष्टा एम.सी. डोमिनिक तथा शाइनी डोमिनिक के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय किसानों की सफलता को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

उन्होंने कहा, “कृषि का भविष्य अतीत और भविष्य के बीच पुल बनाने में है। हमें अपने पूर्वजों द्वारा संजोए गए परंपरागत कृषि ज्ञान को नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधानों, आधुनिक तकनीकों और वैश्विक नवाचारों के साथ जोड़ना होगा। यही समन्वय भारत को विश्व कृषि का नेतृत्व प्रदान करेगा और किसान को केवल अन्नदाता ही नहीं, नवाचार और समृद्धि का प्रतीक भी बनाएगा।”

बस्तर की मिट्टी से उठकर अंतरराष्ट्रीय कृषि मंचों तक पहुँचे डॉ. राजाराम त्रिपाठी की यह यात्रा आज देश के करोड़ों किसानों को यह विश्वास दिला रही है कि ज्ञान, नवाचार, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के बल पर भारतीय किसान विश्व मंच पर भी नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है।