उपचुनाव परिणाम का स्पष्ट संदेश, समय रहते हार के कारणों पर करो आत्ममंथन!

The clear message from the by-election results: introspect on the reasons for the defeat before it is too late!

दीपक कुमार त्यागी

“तीन विधानसभा के उपचुनावों के परिणाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा के विषय बन गये हैं, क्योंकि बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार हैं और उपचुनावों में सत्ता में काबिज पक्ष को चुनावी रणभूमि में जीतना बेहद आसान होता है। लेकिन सत्ता में होने के बाद भी बिहार, मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनावों में बेहद हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट बांकीपुर और दतिया में भाजपा प्रत्याशियों की हार कहीं पार्टी के अश्वमेध यज्ञ के विजयी घोड़े की चाल को आने वाले समय के चुनावों में खराब ना कर दें। हालांकि भाजपा के मौजूदा शीर्ष नेतृत्व की यह खूबी है कि वह अपनी गलतियों को पहचान कर के उन पर सुधार की अन्य दलों की तरह केवल कागजों में खानापूर्ति नहीं करता है, वह गलतियों को धरातल पर सुधार करता है।”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के झटके से भारतीय जनता पार्टी अभी उभर भी नहीं पायी थी कि बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम से भाजपा को जबरदस्त झटका लगा है। बिहार की हाईप्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में तो जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर (पीके) ने बड़ी जीत दर्ज की है। जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर को 64151 मत मिले, उन्होंने भाजपा के नीरज कुमार को 19324 मतों के भारी भरकम अंतर से हराया है। भाजपा के नीरज कुमार को 44827 मत मिले, वहीं आरजेडी की रेखा कुमारी को 14273 मत मिले हैं। यहां भाजपा के लिए विचारणीय बात यह है कि इस सीट से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पांच पर विधायक रह चुके हैं और उनके इस्तीफे के बाद ही यह सीट खाली हुई थी। वैसे तो भाजपा बांकीपुर में लगातार 30 वर्षों से जीतती आ रही थी और इस विधानसभा सीट को भाजपा का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, लेकिन प्रशांत किशोर (पीके) ने इस सीट के उपचुनाव में उतरकर भाजपा के इस सुरक्षित गढ़ को बुरी तरह से ढहा दिया है। जबकि बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। मेरा बूथ सबसे मजबूत के सिद्धांत पर कार्य करने वाली भाजपा के लिए इस सीट पर हार बहुत बड़ा झटका है, विपक्षी दल इस सीट के हारने का डंका अब पूरे देश में जोर-शोर से बजायेंगे।

“हालांकि विधानसभा उपचुनावों के परिणाम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृहराज्य गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट से भाजपा को बेहद संतोष देने वाली खबर मिली है। यहां पर भाजपा प्रत्याशी सतेंद्रभाई पटेल ने 30,630 वोटों से कांग्रेस के प्रत्याशी भीखाभाई रबारी को हरा दिया है। यहां पर भी भूपेंद्रभाई रजनीकांत पटेल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है।”

वहीं उपचुनावों के परिणाम में बिहार के बाद रही-सही कसर को मध्यप्रदेश ने पूरा कर दिया, वहां पर भी मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। लेकिन फिर भी बेहद ही हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने 6016 मतों से भाजपा के आशुतोष तिवारी को हरा दिया है। घनश्याम सिंह को 66757 मत मिले, आशुतोष तिवारी को 60741 मत मिले, वहीं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रत्याशी दामोदर यादव ‘मंडल’ ने 22527 मत लेकर के भाजपा का खेल पूरी तरह से ख़राब करते हुए भविष्य के लिए खतरें का अलार्म भी बजा दिया है। हालांकि फिलहाल तो इस सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती विधायक थे, लेकिन अप्रैल 2026 में एक अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता रद्द होने के कारण से इस सीट पर उपचुनाव हुए। लेकिन वर्ष 2018 में इस सीट से भाजपा के हाईप्रोफाइल दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा विधायक रहे थे, लेकिन वर्ष 2023 में वह कांग्रेस के राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए थे, लेकिन हार के बाद भी वह क्षेत्र में दिन-रात सक्रिय थे और उन्हें व उनके समर्थकों को पूरी उम्मीद थी कि भाजपा का नेतृत्व उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा पर ही दांव खेलेगा, लेकिन पार्टी हाईकमान ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट ना देकर के आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया, जिसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने सड़क पर जमकर के बवाल काटा था, हालांकि भाजपा में सड़कों पर ऐसा विद्रोह शायद ही कभी देखने को मिला हो, क्योंकि भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर के कार्यकर्ताओं तक को भी बेहद अनुशासित माना जाता है, सड़कों पर हुए विवाद के चलते ही दतिया में पार्टी को हार का स्वाद चखना पड़ा है।

भाजपा नेतृत्व के लिए बांकीपुर व दतिया उपचुनाव के परिणाम की स्थिति आत्ममंथन करने वाली है। भारतीय जनता पार्टी के हितों को भविष्य में सुरक्षित रखने के लिए भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों को उपचुनावों में मिली करारी हार के कारणों का बारीकी से आंकलन करते हुए कमियों पर आत्ममंथन अवश्य करना चाहिए। उन्हें यह अवश्य देखना चाहिये कि आखिर दतिया व बांकीपुर विधानसभा जैसे गढ़ में पार्टी की यह स्थिति क्यों हुई। शीर्ष नेतृत्व को समय रहते जनता की नब्ज को पहचानने का कार्य कर लेना चाहिए। नेतृत्व व रणनीतिकारों को पार्टी हित में निष्पक्ष रूप से यह मंथन अवश्य करना चाहिए कि कहीं पार्टी से नये मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति दशकों से पार्टी की गोद में बैठे हुए पुराने मतदाताओं को पार्टी से छिटकाने का कार्य तो नहीं कर रही है। पार्टी में नेताओं का एक धड़ा जिस तरह से हिन्दुत्व की जड़ों को मजबूत करने की जगह हिन्दुओं को अगड़े व पिछड़े में बांटकर के क्षणिक स्वार्थों की पूर्ति करने के कार्य किया लगा हुआ है, वह हार के प्रमुख कारणों में से एक है और सबसे महत्वपूर्ण कारण है। पार्टी नेतृत्व को समय रहते ही समझना चाहिए कि मोदी-शाह की जोड़ी ने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निस्वार्थ भाव से लगे स्वयंसेवकों ने दिन-रात मेहनत करके हिन्दुओं में बने कास्ट के बैरियर को तोड़कर के भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित किया था, तब जाकर ही भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाते हुए देश के विभिन्न राज्यों की सत्ता पर काबिज हो पायी थी। भाजपा को फिर से हिन्दुओं को एकजुट करने के लिए धरातल पर कार्य करना होगा, हिन्दुओं के मस्तिष्क में अपनी कार्यशैली में नज़र आने वाला हिंदुत्व का सच्चा पहरेदार बनना होगा, भीडतंत्र के दवाब में आये बिना देश को नियम कायदे कानून के राज से चलाना होगा, देश में समान नागरिक संहिता व जनसंख्या नियंत्रण जैसे कानून बनाकर लागू करने होंगे, तब ही आने वाले समय में भाजपा का भविष्य देश में सुरक्षित है।