रुम्मान उल्ला खान
नई दिल्ली : दुश्मन देशों की ओर से हनी ट्रैप के जरिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिशें नई नहीं हैं। हालांकि, भारतीय सशस्त्र बलों के एक अधिकारी के कथित तौर पर ऐसे जाल में फंसने और संवेदनशील रक्षा सूचनाएं साझा किए जाने का मामला गंभीर चिंता पैदा करता है। दिल्ली पुलिस ने भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर को कथित पाकिस्तानी हनी ट्रैप मामले में गिरफ्तार किया है। वायुसेना से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद अधिकारी के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) के तहत कार्रवाई की गई। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत सोशल मीडिया के जरिए हुई एक कथित दोस्ती से हुई। एक महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से विंग कमांडर से संपर्क किया। बातचीत आगे बढ़ने के साथ दोनों के बीच चैट और वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क होने लगा। जांच एजेंसियों का आरोप है कि महिला ने धीरे-धीरे अधिकारी का विश्वास हासिल किया और इसके बाद उससे सैन्य गतिविधियों तथा रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मांगनी शुरू कर दी।
दिल्ली पुलिस को यह मामला भारतीय वायुसेना की खुफिया शाखा से मिली विशिष्ट जानकारी के आधार पर सामने आया। पुलिस ने विंग कमांडर को 30 मई की रात गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, डिजिटल बातचीत और अन्य संभावित साक्ष्यों की पड़ताल की गई। पुलिस ने 7 जुलाई को जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी विंग कमांडर एक फील्ड यूनिट में तैनात था। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए उसकी एक महिला से बातचीत शुरू हुई। दोनों के बीच संपर्क बढ़ने के बाद महिला ने कथित तौर पर अधिकारी से सैन्य गतिविधियों, सैनिकों की तैनाती और सैन्य आवाजाही से संबंधित जानकारी हासिल करनी शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप है कि अधिकारी ने कथित तौर पर कुछ तस्वीरें, वीडियो और अन्य संवेदनशील सामग्री भी डिजिटल माध्यमों के जरिए महिला के साथ साझा की।
जांच में कथित तौर पर ऐसे दस्तावेजों और डेटा के ट्रांसफर के संकेत मिले हैं, जिनका संबंध सैन्य गतिविधियों से बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस अब यह निर्धारित करने में जुटी है कि वास्तव में कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की गई और उससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कितना संभावित असर पड़ सकता है।
मामले का एक और गंभीर पहलू एक संदिग्ध मोबाइल एप्लिकेशन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई महिला ने कथित तौर पर विंग कमांडर से उसके एक साथी के मोबाइल फोन में एक विशेष एप्लिकेशन इंस्टॉल करने को कहा था। आरोप है कि अधिकारी ने ऐसा किया भी। जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह एप्लिकेशन स्पाइवेयर या रिमोट-एक्सेस मालवेयर की तरह काम कर सकता है।
ऐसे संदिग्ध एप्लिकेशन के जरिए किसी मोबाइल फोन से डेटा हासिल करने, उसकी लोकेशन पर नजर रखने अथवा बातचीत और अन्य गतिविधियों की निगरानी किए जाने की आशंका रहती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित एप्लिकेशन ने वास्तव में किस तरह का डेटा हासिल किया और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने वाली महिला कथित तौर पर पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रही थी। जांच एजेंसियां अब इस संभावित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और विदेशी हैंडलरों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिकारी से हासिल की गई कथित सूचनाओं का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया जाना था।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विंग कमांडर और महिला के बीच हुई डिजिटल बातचीत का विश्लेषण भी है। पुलिस चैट, वीडियो कॉल, डिजिटल ट्रेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अधिकारी से संपर्क करने वाली महिला की वास्तविक पहचान क्या थी और उसके पीछे कौन लोग काम कर रहे थे।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अधिकारी अपने निजी जीवन में एक मुश्किल दौर से गुजर रहा था और इसी दौरान महिला ने उससे संपर्क स्थापित किया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कथित हनी ट्रैप को इसी व्यक्तिगत परिस्थिति का फायदा उठाकर आगे बढ़ाया गया।
अब जांच का फोकस इस बात पर है कि यह मामला केवल एक अधिकारी को निशाना बनाने तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा जासूसी नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस विदेशी हैंडलरों, संभावित अन्य आरोपियों, डिजिटल संचार और साझा की गई सूचनाओं के संभावित इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।





