रविवार दिल्ली नेटवर्क
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में फ्रॉम कैंपस टु सिविल सर्विसेज़ः योर रोडमैप टु सक्सेस पर 21वीं लीडरशिप टॉक सीरीज-सह-सेमिनार में आईएएस श्री विकास कुंडू के संग-संग इंडियन पॉलिटी के एक्सपर्ट श्री समरजीत मिश्रा ने दिए व्याख्यान
आईएएस श्री विकास कुंडू ने स्टुडेंट्स से कहा, यूपीएससी सरीखी चुनौतीपूर्ण परीक्षा की तैयारी केवल मेहनत के भरोसे नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रोडमैप, रणनीति और निरंतर अनुशासित प्रयासों के साथ तैयार करना चाहिए। लक्ष्य स्पष्ट हो। तैयारी की दिशा भी स्पष्ट हो और हर प्रयास के बाद अपनी कमियों का ईमानदारी से विश्लेषण किया जाए। यही सफलता की ओर बढ़ने का रास्ता है। उन्होंने कहा असफलता के बाद हमें आत्ममंथन करते हुए रणनीति में बदलाव करके अनुशासन में रहकर निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। अपनी सिविल सेवा की यात्रा को बताते हुए उन्होंने कहा, स्टुडेंट्स को लक्ष्य पर फोकस रखना चाहिए। उन सभी डिस्ट्रक्शन से दूरी बनानी चाहिए, जो लक्ष्य से उनका ध्यान भटका सकते हैं। अपने समय, ऊर्जा और एकाग्रता को पूरी तरह अपने लक्ष्य के लिए समर्पित कर देना चाहिए। श्री कुंडू बोले, असफलता अंतिम परिणाम नहीं होती। कई बार सफलता और असफलता के बीच केवल एक चीज खड़ी होती है और वह हैै हार न मानने का निर्णय। प्रो. कुंडू तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में फ्रॉम कैंपस टु सिविल सर्विसेज़ः योर रोडमैप टु सक्सेस पर 21वीं लीडरशिप टॉक सीरीज-सह-सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के संग टॉक सीरीज का शंखनाद हुआ। इस मौके पर आईएएस श्री विकास कुंडू के संग-संग वाजीराम एंड रवि आईएएस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर एवम् इंडियन पॉलिटी के प्रतिष्ठित फैकल्टी श्री समरजीत मिश्रा, टीएमयू के डीन स्टुडेंट्स वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर-एकेडमिक्स डॉ. नेहा आनंद आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। इंटरैक्टिव सत्र में स्टुडेंट्स ने विशेषज्ञों से संवाद किया और अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए। अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवम् स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
वाजीराम एंड रवि आईएएस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्री समरजीत मिश्रा ने कहा, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने के लिए कॉलेज का समय सबसे उपयुक्त होता है। ग्रेजुएशन और यूपीएससी प्रिपेशन को दो अलग-अलग यात्राओं के रूप में देखने के बजाय, दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। प्रतिदिन 3 घंटे, 365 दिन सफलता का सरल मंत्र देते हुए कहा, यूपीएससी की तैयारी में एक-दो दिन बहुत अधिक पढ़ लेना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि हर दिन नियमित रूप से निर्धारित समय पढ़ाई को देना। तीन घंटे प्रतिदिन सुनने में भले ही कम लगें, लेकिन यदि यही तीन घंटे पूरे वर्ष बिना किसी लंबे व्यवधान के अनुशासन और ईमानदारी से दिए जाएँ, तो वे विद्यार्थी की तैयारी में असाधारण परिवर्तन ला सकते हैं। सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं होती; वह छोटे-छोटे दैनिक प्रयासों का संचय होती है। आज का त्याग और अनुशासन कल की स्वतंत्रता और उपलब्धि का आधार बनता है। बड़ा लक्ष्य केवल बड़े सपनों से हासिल नहीं होता। उसके लिए हर दिन छोटे लेकिन ईमानदार प्रयास करने पड़ते हैं। टॉक सीरीज में डॉ. वरुण कुमार सिंह, श्री प्रदीप वर्मा, डॉ. साक्षी आदि के संग-संग एग्रीकल्चर कॉलेज, मैनेजमेंट कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज, लॉ कॉलेज आदि की फैकल्टीज़ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। समापन राष्ट्रगान के संग हुआ।





