- कमजोर कड़ी साबित हुए बूढ़े शेर मनप्रीत, मनदीप और रोहिदास
- मध्य पंक्ति में बेवजह के प्रयोग भारी पड़े
सत्येन्द्र पाल सिंह
एम्सतलवीन (नीदरलैंड) : दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह ने चोट से जूझने के बावजूद छह गोल जरूर किए लेकिन उनकी कप्तानी और चीफ कोच क्रेग फुल्टन के मार्गदर्शन में भारत का 1975 में आखिरी बार हॉकी विश्व कप जीतने के 51 बरस भी पदक तो छोड़ ही दे यहां वेगनेर स्टेडियम में भी 16 वें एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप में भी सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाया। भारत पूल डी में पहले चरण में मात्र वेल्स और पाकिस्तान पर जीत दर्ज कर पाया और बढ़त लेने के बाद इंग्लैंड से हार दूसरे चरण में पूल ई में मेजबान नीदरलैंड से 1-3 से और अर्जेंटीना से 3-5 से हारने सहित कुल तीन हार के साथ सेमीफाइनल की होड़ से बाहर हो गया। भारत की पुरुष हॉकी टीम अब सातवें-आठवें स्थान के लिए दूसरे चरण में पूल एफ में तीसरे और आखिरी स्थान पर रहने वाली मेजबान बेल्जियम से उसके घर में भिड़ेगी। बेशक भारत को विश्व कप सेमीफाइनल की होड़ से बाहर हो़ बाहर होने के बाद इसके खत्म होने के बाद एशियाई खेलों में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने के लिए खेलना है और ऐसे में चीफ कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति पर जरूर सवाल उठ रहे हैं। जब जीत का श्रेय चीफ कोच को दिया जाता है तो फिर हार पर वह जवाबदेही से नहीं बच सकते।
2023 में पिछले विश्व कप में चीफ कोच ग्राहम रीड के मार्गदर्शन में भारत के नौवें स्थान पर रहने के बाद क्रेग फुल्टन ने यह जिम्मेदारी संभाली थी। भारत के अर्जेंटीना के हाथो दूसरे चरण में पूल ई मैच में अर्जेंटीना के हाथों ऐसे मैच में जिसमे सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए चार गोल के अंतर से जीत जरूरी थी उसमें 3-5 की हार से पदक की होड़ से बाहर होने पर विश्व कप के लिए चुनी गई टीम के सीनियर खिलाड़ियों में मध्यपंक्ति में बूढ़े शेरमनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह और अमित रोहिदास, जर्मनप्रीत सिंह के साथ सबसे कमजोर कड़ी साबित हुए गोलरक्षक सूरज करकेरा और मोहित एचएस के प्रदर्शन पर जरूर सवाल खड़े हुए हैं। भारत सातवां स्थान ही पा ले तो उसकी बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि बेल्जियम को उसके घर में हराना भी टेढ़ी खीर साबित होने वाला है।
भारत के चीफ कोच क्रेग फुल्टन बेशक स्ट्रक्चर के साथ खेलने की खूब चर्चा करते हैं लेकिन कम से कम मौजूदा विश्व कप में स्ट्रक्चर कतई दिखा नहीं। सबसे बड़ा सवाल तो मध्यपंक्ति में एक मैच में नीलकांत शर्मा, दूसरे में विवेक सागर प्रसाद, तीसरे में यशदीप सिवाच और बराबर इनकी परस्पर अदला बदली और अनुभवी राज कुमार पाल को बाहर रखना किसी के गले नहीं उतरा। मध्यपंक्ति में बेवजह के प्रयोग भारी पड़े। भारत की अग्रिम पंक्ति को मध्यपंक्ति में जिस तरह से मनप्रीत सिंह से जिस तरह आक्रमण और रक्षण दोनों की मदद करने की जरूरत थी इसे करते कतई नहीं दिखे। आक्रामक हाफ हार्दिक सिंह और राजिंदर सिंह भी टुकड़ों टुकड़ों में और खेले और यशदीप सिवाच को अभी विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अपनी चमक दिखाने के लिए बहुत मेहनत करने की जरूरत है। मध्यपंक्ति किसी भी हॉकी टीम के आक्रमण और रक्षण की सबसे मजबूत कड़ी होती और भारत की यही कड़ी सबसे कमजोर साबित हुई। भारत की रक्षापंक्ति में सुमित, संजय और पूरी तरह फिट होने के लिए जूझने के बावजूद हरमनप्रीत सिंह पूरी शिद्दत से खेले। भारत की एशियाई खेलों के लिए भी कमोबेश यही टीम है और उसमें आदित्य ललगे की जगह राजकुमार पाल हैं। चीफ कोच फुल्टन और पूरी टीम के यहां खेल से यही लगा कि उसकी प्राथमिकता इस पुरुष हॉकी विश्व कप से ज्यादा जापान में आईची में होने वाले एशियाई खेल हैं और होनी भी चाहिए क्योंकि उसमें अपना स्वर्ण पदक बरकरार रख कर भारत के लिए 2028 के ओेलंपिक खेलों के लिए क्वॉलिफाई करना जरूरी है। भारत की अग्रिम पंक्ति अभिषेक व सुखजीत सिंह ने दो दे तथा दिलप्रीत सिंह ने भी एक गोल किया लेकिन शिलानंद लाकरा और मनदीप सिंह एकदम रंग में नहीं दिखे। भारत की रक्षापंक्ति में जर्मनप्रीत का भी खेल भी जिस तरह उखड़ा रहा और दोनों गोलरक्षकों सूरज करकेरा और मोहित एचएस ने जितना ढीला खेल दिखाया उससे यहां 20 खिलाड़ियों में न रहने के बावजूद टीम के साथ रहे गोलरक्षक कृष्ण बहादुर पाठक की एशियाई खेलों में वापसी की जरूरत दिखाई देती हैं इसके लिए भी टीम पहले ही घोषित की जा चुकी है।
अर्जेंटीना के खिलाफ दबाव न झेल पाना ले डूबा : फुल्टन
भारत की अर्जेंटीना के हाथों पूल ई में दूसरे चरण के आखिरी मैच हार के बाद चीफ कोच क्रेग फुल्टन ने कहा,‘ हम अर्जेंटीना के खिलाफ इस अहम मैच में जैसी शुरुआत चाहते थे नहीं कर पाए। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए अर्जेंटीना से अहम मैच में हमें जीतना बेहद जरूरी था और इसमें दबाव न झेल पाना हमें ले डूबा। हमें जरूरत इस तरह के बड़े मैचों में भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है। अर्जेंटीना के खिलाफ मैच पूल ई में दूसरे चरण का समापन हमने हार के साथ किया। हम बेशक पूल ई में बेहतर ढंग से समापन कर सेमीफाइनल में पहुंचना चाहते थे लेकिन हमारी रक्षापंक्ति की बेवकूफाना गलतियां को अर्जेंटीना ने भुनाकर गोल इन्हें गोल में बदला। हमने अर्जेंटीना को गोल करने के ऐसे आसान मौके दिए जिससे बचा जा सकता था। मैच के 39वें सेकंड में गोल खाने से हम गहरे दबाव में आ गए। इस शुरुआत झटके से उबरना आसान नहीं था।हमने सुस्त आगाज किया और हम इससे उबरना होगा। बस संतोष इस बात का रहा मैच में आखिरी में वापसी करने की कोशिश की। हमने हाफ टाइम के बाद खुद को संभाला। बदकिस्मती से हम तीसरे क्वॉर्टर में अपनी तेज आक्रामक हॉकी नहीं खेल पाए। चौथे व आखिरी क्वॉर्टर के आखिर के हमने सात आठ मिनट में हमने अपनी नैसर्गिक आक्रामक हॉकी खेली। हमने आखिरी क्वॉर्टर में दो मिनट के भीतर दो गोल और तीसरा भी हो सकता था लेकिन हरमनप्रीत सिंह इस पर चूक गए। हम हॉकी विश्व कप जैसे बड़े मंच पर पांच में से मात्र दो ही मैच जीत पाए और तीन हारे जो कि पदक जीतने के लिए नाकाफी था।’
ढीले रक्षण की कीमत चुकानी पड़ी : सुखजीत सिंह
भारत के लिए अर्जेंटीना के खिलाफ खुद दो करने और पेनल्टी स्ट्रोक बना तीसरे गोल में अहम भूमिका अदा करने वाले सुखजीत सिंह ने कहा,‘ हम इस पूरे विश्व कप में हमने पेनल्टी कॉर्नर का अच्छा इस्तेमाल किया और हमारे फॉरवर्ड ने भी गोल किए लेकिन हमें ढीले रक्षण की कीमत चुकानी पड़ी।





