दीपक कुमार त्यागी
मोदीनगर : श्रीराम कथा आयोजन समिति के तत्वाधान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में 30 सितंबर 2026 को देश के प्रसिद्ध वेट लिफ्टिंग कोच द्रोणाचार्य सम्मान प्राप्त विजय शर्मा एवं वेट लिफ्टिंग में देश का गौरव बढ़ाने वाली मीराबाई चानू जिन्होनें अभी फिलहाल में चल रहे एशियाई खेलों में रजत पदक प्राप्त किया है कथा में उपस्थिति रही, जिन्हें डॉक्टर पवन सिन्हा आध्यात्मिक गुरु व कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने पटका पहनकर सम्मानित किया व देश का नाम रोशन करने के लिए बहुत-बहुत आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर विनोद वैशाली अध्यक्ष नगर पालिका मोदीनगर उपस्थित रहे।
कथा व्यास पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर वेदों की प्रेरणा एवं ऐतिहासिक प्रसंगों पर प्रकाश डाला। राक्षसी पूतना के प्रसंग पर महाराज जी ने कहा कि आज भी समाज में हजारों पूतनाएँ जीवित हैं। उन्होंने समझाया कि भगवान किसी को मारते नहीं, बल्कि तारते हैं। प्रारम्भिक अवतारों में भगवान ने महिला रूपी राक्षसों का नाश किया। इसका अर्थ यह नहीं है कि भगवान किसी को मारते हैं, बल्कि वे अविद्या रूपी राक्षसों का नाश कर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
यदि यह अविद्या घर-परिवार में प्रवेश कर जाए तो वहाँ कलह और अशांति फैल जाती है। आज पूतना रूपी वृत्ति अखबार, मोबाइल और टीवी आदि के माध्यम से प्रत्येक घर-परिवार तक पहुँच चुकी है और परिवार को तोड़ने का कार्य कर रही है। इसका गहरा प्रभाव पूरे जीवन और समाज पर पड़ रहा है। इसलिए आज आवश्यकता है कि पूतना रूपी वृत्ति से सावधान रहा जाए। हमें ध्यान रखना चाहिए कि क्या देखना है, क्या पढ़ना है और क्या सुनना है, साथ ही किस प्रकार का भोजन करना चाहिए।
भोजन को छोड़ा जा सकता है, क्योंकि वह केवल शरीर के लिए है, परंतु आँखों से देखा गया, कानों से सुना गया और स्वयं पढ़ा गया, यह सब जीवन के आचरण में उतरकर समाज को सत्य एवं असत्य दिशा प्रदान करता है।
आगे व्यास जी ने वसुदेव और नंदबाबा के मिलन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता वही है, जो मित्र के कष्ट को सुनकर उसे अपना कष्ट मानकर दूर करने का प्रयत्न करे। व्यक्तिगत कष्टों की चर्चा मित्र के सामने कभी नहीं करनी चाहिए।
कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य जिस भाव से भगवान का स्मरण करता है, भगवान उसी भाव से उसे अपने हृदय में बसा लेते हैं। भगवान केवल भाव देखते हैं।
महाराज जी ने भगवान के बालस्वरूप की पूजा पर बल देते हुए कहा कि बालस्वरूप की पूजा और सेवा पूरी तरह निस्वार्थ भाव से की जाती है, उसमें किसी प्रकार की अपेक्षा नहीं होती।
कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण की पल लीलाओं एवं माखन चोरी के प्रसंगों को अति मार्मिक ढंग से श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया गया। भवन में बैठे हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे।
कथा में यजमान अनिल गर्ग, रामेश्वर दयाल, अशोक माहेश्वरी, पूर्व अध्यक्ष अजय गुप्ता, डॉ विनय मित्तल, महेश टिंबर वाले, उमेश जंजीर वाले ,दिनेश सिंघल पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा, राजीव महेश्वरी, विनोद गोस्वामी, मुकेश हरबंस डेरी, राजेंद्र अग्रवाल, विशाल स्वदेशी, अरुण खन्ना, हिमांशु गर्ग, अमित कराटे, महेश तायल, सुदेश मित्तल, शालिनी गोयल, साधना शर्मा, गीता कौशिक, डॉ पूनम गर्ग आदि उपस्थित रहे।





