राजस्थान रत्नाकर ने राजस्थान रत्न के.सी. मालू के निधन को कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया

Rajasthan Ratnakar Rajasthan Ratna K.C. Malu's demise described as an irreparable loss to the art world

  • दो मिनट का मौन रख दी श्रद्धांजलि
  • रामकृष्ण सेवा संस्थान के संस्थापक चेयरमैन ओ पी बागला ने भी संवेदनाएं व्यक्त की

नीति गोपेन्द्र भट्ट

नई दिल्ली : राजस्थान की कला, संस्कृति और लोकसंगीत के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात व्यक्तित्व के.सी. मालू के निधन पर राजस्थान रत्नाकर ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।

राजस्थान रत्नाकर की प्रबन्ध कार्यकारिणी की नई दिल्ली के होटल ली मेरेडियन में हुई बैठक में राजस्थान रत्न के.सी. मालू को दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

राजस्थान रत्नाकर के अध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्वर्गीय मालू ने अपना संपूर्ण जीवन राजस्थानी लोकसंगीत, लोककलाओं और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उनके निधन से संगीत, साहित्य, कला और राजस्थानी संस्कृति के क्षेत्र में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई करना कठिन है।

गुप्ता ने के.सी. मालू के पुत्र हेमजीत मालू को भेजे गए शोक-संदेश में कहा कि के.सी. मालू ने सुर-संगम जैसी प्रतिष्ठित संस्था और वीणा म्यूजिक ग्रुप की स्थापना के माध्यम से राजस्थानी संगीत को देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोककलाकारों और प्रतिभाशाली संगीत साधकों को मंच प्रदान कर उनकी कला को व्यापक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए। उनके द्वारा संकलित 221 राजस्थानी विवाह गीतों का संग्रह भी प्रदेश की समृद्ध लोकसांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।

रामकृष्ण सेवा संस्थान के संस्थापक चेयरमैन ओ पी बागला ने कहा कि के.सी. मालू का व्यक्तित्व केवल कला और संगीत तक सीमित नहीं था। अपनी जन्मभूमि सुजानगढ़ के प्रति उनका समर्पण और वहां एक विशाल बहुविशेषज्ञ अस्पताल के निर्माण की दिशा में किए गए प्रयास उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता एवं मानवीय संवेदनशीलता को भी दर्शाते हैं। उन्होंने सिद्ध किया कि वास्तविक सफलता वही है, जो समाज, संस्कृति और जनकल्याण के काम आए