राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों का सम्मेलन 15 जून से शिमला में, धार्मिक सहिष्णुता पर भी हो सकती है गंभीर चर्चा

धर्मेंद्र मिश्र

देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों का सम्मेलन इसी माह हिमाचल प्रदेश में होने जा रहा है। सम्मेलन में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई अन्य मंत्रियों के हिस्सा लेने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। सम्मेलन के लिए एजेंडे को तैयार करने के लिए राजधानी दिल्ली में वरिष्ठ नौकरशाह दिन-रात काम करने में जुटे हुए हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 31 मई को शिमला में अपनी सरकार की आठवीं वर्षगांठ के अवसर पर एक जनसभा को भी संबोधित किया था।

सूत्रों के अनुसार हर वर्ष होने वाले सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों का सम्मेलन अबकी बार हिमाचल प्रदेश स्थित धर्मशाला में होने जा रहा है। आगामी 15 जून से 17 जून के मध्य होने वाले सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी कई महत्वपूर्ण विषयों पर मुख्य सचिवों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। मुख्य सचिवों के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने वाले केंद्रीय मंत्रालयों में शिक्षा, आवास और शहरी विकास मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय भी हैं। माना जा रहा है कि इनके साथ ही कई अन्य मंत्रालयों को भी सम्मेलन में बुलाया जा सकता है।

जानकारी हो प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने मुख्य सचिवों के सम्मेलन को दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों में करने की परम्परा शुरू की थी। 2014 से पहले तक देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों का सम्मेलन राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में ही आयोजित किया जाता था। लेकिन 2014 के बाद से पुरानी परंपरा को मोदी सरकार ने विदा कर दिया और इसके बाद से हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में मुख्य सचिवों के सम्मेलन का आयोजन किया जाता रहा है।

इस वर्ष जून में होने जा रहे मुख्य सचिवों के सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी शिमला में आगामी 31 मई को एक विशाल जनसभा को भी सम्बोधित करेंगे। केंद्र सरकार के आठ वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाली जनसभा के माध्यम से जहां प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी देश को देंगे, वही इसी वर्ष हिमाचल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भी राजनीतिक आधार को मजबूत करने का प्रयास करेंगे। हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक हालात पर अगर दृष्टि डाली जाए तो फिलहाल भाजपा को इस राज्य में अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस से कोई खास चुनौती नहीं मिल रही है। लेकिन पंजाब में अप्रत्याशित रूप से अपनी सरकार का गठन करने वाली आम आदमी पार्टी ने जिस तरह से हिमाचल प्रदेश के आगामी चुनाव को लेकर अपनी उपस्थिति को दर्शाया है, उससे भाजपा के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर दिखने लगी है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की रैली और फिर मुख्य सचिवों के सम्मेलन के माध्यम से केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करेगी कि आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी भाजपा सरकार के लिए खतरा न बनने पाए।

फिलहाल मुख्य सचिवों का सम्मेलन के लिए राजधानी में वरिष्ठ अधिकारी एजेंडा तैयार करने में जुटे हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि विकास सम्बन्धी विषयों के साथ ही अबकी बार आंतरिक सुरक्षा के मसले पर भी प्रधानमंत्री मोदी मुख्य सचिवों से विचार-विमर्श कर सकते हैं। खासतौर पर धर्म विशेष द्वारा कई राज्यों में पिछले कई दिनों द्वारा फैलाई जा रही अव्यवस्था और हिंसक झड़पों के बीच आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार काफी गंभीर है। हाल ही में कई देशों ने भी जिस तरह से केंद्र सरकार के समक्ष अपना कथित विरोध व्यक्त किया, उससे केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था के मसले पर किसी भी तरह की नरमी अपनाने की मूड में नहीं है। ऐसे में मुख्य सचिवों के सम्मेलन में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कई दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।