जेवर से उठेगी भारत की तकनीकी क्रांति

India's technological revolution will take off from Jewar

  • ₹40,000 करोड़ के आयातित पीसीबी का स्वदेशी निर्माण
  • आत्मनिर्भर भारत को नई शक्ति इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में भारत की बड़ी छलांग
  • उत्तर प्रदेश बनेगा वैश्विक निवेश और उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग का नया केंद्र

विनोद कुमार सिंह ‘तकियावाला’

विश्व अर्थव्यवस्था तेजी से डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है।कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5G,इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT),रक्षा उपकरण, चिकित्सा तकनीक, ऑटोमोबाइल, अंतरिक्ष विज्ञान और स्मार्ट उपभोक्ता उत्पाद—इन सभी की बुनियाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर टिकी है। ऐसे समय में यदि कोई देश इलेक्ट्रॉनिक्स के मूल घटकों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनता है, तो वह केवल औद्योगिक प्रगति ही नहीं करता, बल्कि आर्थिक, सामरिक और तकनीकी दृष्टि से भी वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर होता है। इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश के जेवर से आई एक बड़ी खबर भारत की औद्योगिक यात्रा में मील का पत्थर सिद्ध हो सकती है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी,रेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतम बुद्ध नगर के यमुना सिटी (जेवर) में लगभग ₹6,750 करोड़ की लागत वाली दो महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण परियोजनाओं का शिलान्यास किया।यह केवल दो उद्योगों की स्थापना नहीं,बल्कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब तक लगभग ₹40,000 करोड़ मूल्य के उन्नत मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) विदेशों से आयात किए जाते थे।अब इनका निर्माण भारत में ही होगा।पीसीबी किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का हृदय माना जाता है। मोबाइल फोन, लैपटॉप,सर्वर,चिकित्सा उपकरण, रक्षा प्रणालियाँ,संचार नेटवर्क, इलेक्ट्रिक वाहन,औद्योगिक मशीनें तथा सेमीकंडक्टर आधारित लगभग हर आधुनिक उपकरण पीसीबी पर ही आधारित होता है। 20 से 22 परतों वाले अत्याधुनिक पीसीबी का निर्माण अत्यधिक तकनीकी दक्षता और उन्नत विनिर्माण क्षमता की माँग करता है। भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश उसकी तकनीकी परिपक्वता का संकेत है।पिछले एक दशक में भारत ने मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। कभी अधिकांश मोबाइल फोन आयात करने वाला भारत आज दुनिया के प्रमुख मोबाइल विनिर्माण देशों में शामिल है।अब सरकार का लक्ष्य केवल अंतिम उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि उसके मूलभूत और उच्च मूल्य वाले घटकों का भी स्वदेशी उत्पादन सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि पीसीबी निर्माण को रणनीतिक प्राथमिकता दी जा रही है।इस पहल का सबसे बड़ा लाभ विदेशी मुद्रा की बचत के रूप में सामने आएगा। हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये मूल्य के पीसीबी आयात करने पड़ते थे।अब यह धन देश के भीतर निवेश,उत्पादन और रोजगार सृजन में लगेगा। .साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित और मजबूत बनेगी।वैश्विक स्तर पर महामारी,भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी घटकों के मामले में अत्यधिक आयात निर्भरता दीर्घकाल में जोखिमपूर्ण होती है।जेवर में विकसित हो रहा 206 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।लगभग ₹417 करोड़ की लागत से विकसित हो रही इस परियोजना में केंद्र सरकार भी महत्वपूर्ण वित्तीय सहयोग दे रही है।यहाँ केवल बड़े उद्योग ही स्थापित नहीं होंगे,बल्कि इनके साथ अनेक सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योग भी विकसित होंगे। इससे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, पैकेजिंग,परीक्षण,लॉजिस्टिक्स, मशीनरी और तकनीकी सेवाओं से जुड़े हजारों नए रोजगार सृजित होंगे।उत्तर प्रदेश पहले ही रक्षा गलियारा, एक्सप्रेस-वे,डेटा सेंटर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स हब और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी परियोजनाओं के कारण निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है।अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से राज्य की औद्योगिक पहचान और मजबूत होगी।इससे देश के आर्थिक विकास में उत्तर प्रदेश की भूमिका भी अधिक प्रभावशाली होगी।इस औद्योगिक विकास को आधुनिक परिवहन अवसंरचना का भी बड़ा सहारा मिलने वाला है। प्रस्तावितदिल्ली–लखनऊ–वाराणसी–पटना–सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उत्तर भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।दिल्ली से लखनऊ की यात्रा लगभग 2 घंटे 10 मिनट तथा जेवर से लखनऊ की दूरी 1 घंटा 40 मिनट में पूरी होने से उद्योग, व्यापार,निवेश और लॉजिस्टिक्स की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की सफलता केवल कारखानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि तेज परिवहन,विश्वस्तरीय संपर्क और सक्षम आपूर्ति तंत्र पर भी आधारित होती है।भारत का इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन भी इसी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है।जून 2026 तक लगभग ₹1.64 लाख करोड़ के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है।इनमें सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन,कंपाउंड सेमीकंडक्टर तथा पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं। इसके साथ ही डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI)योजना के माध्यम से भारतीय कंपनियों को चिप डिज़ाइन और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि अनुसंधान,डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी भारत को अग्रणी बनाना है।वैश्विक परिदृश्य भी भारत के पक्ष में दिखाई देता है।चीन पर अत्यधिक निर्भर वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग अब वैकल्पिक विनिर्माण केंद्रों की तलाश में है। भारत अपने विशाल बाजार, कुशल मानव संसाधन,स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी नीतियों के कारण विश्व की प्रमुख कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। यदि पीसीबी,सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों का घरेलू उत्पादन लगातार बढ़ता है,तो भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है फिर भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं। उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल की उपलब्धता,अनुसंधान एवं विकास में निवेश,कुशल तकनीकी मानव संसाधन,ऊर्जा आपूर्ति,वैश्विक गुणवत्ता मानकों का पालन तथा लागत प्रतिस्पर्धा जैसे क्षेत्रों में लगातार सुधार करना होगा। केवल कारखाने स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं होगा; उन्हें विश्वस्तरीय गुणवत्ता,उत्पादकता और नवाचार से भी जोड़ना होगा।इसके बावजूद यह स्वीकार करना होगा कि जेवर में शुरू हुई यह पहल भारत की औद्योगिक नीति के लिए दूरगामी महत्व रखती है।यह परियोजना दर्शाती है कि भारत अब केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का बाजार नहीं रहना चाहता,बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला के सबसे महत्वपूर्ण और जटिल घटकों का निर्माता भी बनना चाहता है। यदि यही गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थान प्राप्त कर सकता है।जेवर की यह नींव केवल एक औद्योगिक परियोजना की शुरुआत नहीं,बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता,आर्थिक सशक्तीकरण और विकसित भारत के उस भविष्य की आधारशिला है, जहाँ “मेड इन इंडिया” केवल एक नारा नहीं,बल्कि वैश्विक गुणवत्ता और विश्वास का पर्याय होगा।