खिलाड़ियों की ’फिटनेस बेहतर‘ करने पर ध्यान लगाने की जरूरत: शुभमन गिल

Need to focus on improving fitness of players: Shubman Gill

  • मैच के मिजाज को समझने में टीम को जरूरत और समझदारी दिखाने की
  • लॉडर्स में हार का बड़ा कारण हमारे गेंदबाजों शुरू और आखिर के दस दस ओवर में रन लुटाना

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : कप्तान शुभमन गिल के अर्द्धशतक और सदाबहार रोहित शर्मा(138) के तूफानी शतक तथा विराट कोहली और कप्तान शुभमन गिल के अर्द्धशतकों के बावजूद भारत मेजबान इंग्लैंड के 387 रन के पहाड़ के से लक्ष्य का पीछा करते हुए लॉडर्स में रविवार को तीसरे और निर्णायक वन डे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच 50 ओवर में सात विकेट पर 360 रन बना 27 रन से हारने के साथ सीरीज 1-2 से हार गया। रोहित शर्मा के इकलौते शतक के साथ कप्तान शुभमन गिल और विराट कोहली ने दो दो तथा उपकप्तान श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर ने सीरीज में एक एक अर्द्धशतक जड़ा। दरअसल भारत के इंग्लैंड के हाथों तीन वन डे मैचों की अंतर्राष्ट्रीय सीरीज हारने का कारण उसकी बल्लेबाजी से नाकामी से ज्यादा उसके तेज गेंदबाज हर्षित राणा के सीरीज के अधबीच और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और वाशिंगटन सुंदर का चोट के चलते लॉडर्स में तीसरे और आखिरी वन डे अंतर्राष्ट्रीय मैच से बाहर होना रहा। खुद कप्तान शुभमन गिल सीरीज के पहले और तीसरे व आखिरी मैच में जांघ की मांसपेशी में खिंचाव के चलते अर्द्धशतक बनाने के बाद गलत समय पर रिटायर्ड हर्ट या हड़बड़ी में शॉट खेल कर आउट हुए। मेहमान अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू वन डे सीरीज में ऑलराउंडर नीतिश कुमार रेड्डी, हार्दिक पांडया, इसके बाद टी 20 सीरीज में वशिंगटन सुंदर जांघ की मांसपेशी में दूसरे वन डे में आए खिंचाव से बाहर हो गए । खिलाड़ियों की चोट के चलते टीम इंडिया का टीम संयोजन ही गड़बड़ा गया।

तीसरे व आखरी वन डे अंतर्राष्ट्रीय में हार के साथ भारत के सीरीज हारने के बाद कप्तान शुभमन गिल ने कहा, ‘ भारत यदि 2027 के आईसीसी वन डे क्रिकेट विश्व कप में खिताब का मजबूत दावेदार बने रहना चाहता है तो हर कुछ मैचों के बाद अपने खिला़ड़ियो का चोटिल होना गवारा नहीं कर सकता। लॉडर्स में इंग्लैंड से भारत के तीसरा और निर्णायक वन डे अंतर्राष्ट्रीय मैच और सीरीज हार से मिला एक बड़ा सबक यही है कि हमारे खिलाड़ियों को फिट रहना होगा। हम बतौर ग्रुप, जिसमें क्रिकेटर और बीसीसीआई की मेडिकल टीम, दोनों शामिल हैं, आगे चलकर खिलाड़ियों की ‘फिटनेस बेहतर करने’पर ध्यान लगाने की जरूरत है। सच तो यह है कि हार के बावजूद यह वन डे अंतर्राष्ट्रीय मैचों की सीरीज हमारे लिए खासी अच्छी रही। हमारे लिए एक सबक यह है कि हम मैच में करीब 80 फीसदी बने रहे लेकिन निर्णायक मौकों पर हमारी टीम चूक रही थी। मैच के मिजाज को समझने में टीम को और समझदारी दिखाने की जरूरत है। इंग्लैंड ने पॉवरप्ले में 58 रन बनाए और हमारे गेंदबाजों ने बहुत रन लुटाए। हमने जब शुरू में इंग्लैंड के खिलाफ तीन वन डे मैचों की सीरीज के लिए अपनी टीम घोषित की तो इसमें से कम से कम पांच खिलाड़ी लॉडर्स में तीसरे और व निर्णायक वन डे अंतर्राष्ट्रीय मैच में नहीं खेले। जब एक खिलाड़ी घायल हो जाता है तो आप अन्य संयोजन की ओर देखते हैं, जब दो खिलाड़ी चोटिल होते हैं तो फिर आप किसी अन्य संयोजन की बाबत सोचते हैं। यदि हर मैच के बाद चोट के चलते कोई न कोई बाहर हो जाता है तो हम जरूर कहीं न कहीं कोई गलती कर रहे हैं।‘

शुभमन ने कहा, ‘इस सबको जेहन में रखते हुए यह थोड़ा मुश्किल हो जाता है कि आप सुबह मैदान पर आएं और आपको मालूम पड़े कि किसी खिलाड़ी को मामूली चोट या दिक्कत है तो बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या आप तब जोखिम उठाना चाहेंगे? कोई खिलाड़ी 80 फीसदी फिट है और आप पांच गेंदबाजों से खेल रहे हैं और ऐसे में कोई खिलाड़ी पांच ओवर फेंकने के बाद मैदान से हट जाता है तो फिर उसकी जगह गेंदबाजी कौन करेगा? यह वाकई मुश्किल स्थिति है। ऐसे में बतौर टीम हमें अपनी फिटनेस और बाकी सभी चीजों को बेहतर करने की जरूरत है। साथ ही लॉडर्स में हमारी हार का एक बड़ा कारण हमारे गेंदबाजों का शुरू के और आखिरी के दस दस ओवर में बहुत ही ढीली गेंदें कर बहुत रन लुटाना भी रहा।इससे मैच इंग्लैंड की ओर मुड़ गया। यह भी सच है कि हमारा गेंदबाजी आक्रमण कुछ अनुभवहीन है। तीसरे व आखिरी वन डे मैच में हम पर बहुत दबाव था जिसका हम सही जवाब नहीं दे पाए। पावरप्ले में शुरु में हमारी गेंदबाज अच्छी नहीं रही। हमने बहुत ढीली गेंदें फेंकी और फिर विकेट चटकाने अथवा कुछ खास करने की कोशिश में लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया। आखिरी के तीन ओवर में हमने 60 से ज्यादा रन लुटाए और इससे मैच पूरी तरह इंग्लैंड की ओर मुड़ गया। हम एक समय इंग्लैंड को 340-350 पर रोकने की सोच रहे लेकिन मेजबान टीम 390 रन के करीब पहुंच गई और पिच चाहे जैसे हो इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं होता । हम अक्षर पटेल के रूप में लॉडर्स में तीसरे और आखिरी वनडे में केवल एक स्पिनर के रूप में इसलिए उतरे थे क्योंकि बर्मिंघम और कार्डिफ में शुरू के दो वन डे मैचों में पिच स्पिनरों के लिए बहुत मुफीद नहीं थी और वहां स्पिनरों की भूमिका रक्षात्मक गेंदबाज की ही रही । अतिरिक्त तेज गेंदबाजों को एकादश में शामिल करने का मकसद बीच के ओवरों विकेट चटकाने का जरूरी मौका बनाना था और कुलदीप यादव को एकादश में शामिल न करने का यही बड़ा कारण था।’