विनोद कुमार सिंह ‘तकियावाला’
भारत आज विश्व अर्थव्यवस्था के उस मुकाम पर खड़ा है जहाँ उसकी विकास यात्रा को केवल आंकड़ों से नहीं,बल्कि उन आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता से भी परखा जा रहा है।एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर भारत के लिए यह आवश्यक है कि उसकी आर्थिक प्रगति को मापने वाले सभी प्रमुख संकेतक समयानुकूल,वैज्ञानिक और यथार्थपरक हों।इसी सोच के अनुरूप सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी)की नई श्रृंखला जारी की गई है, जिसका आधार वर्ष 2022-23 निर्धारित किया गया है।
यह परिवर्तन केवल एक तकनीकी या सांख्यिकीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को समझने और उसे दुनिया के सामने अधिक सटीक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास भी है। नई श्रृंखला भारत के औद्योगिक क्षेत्र में आए व्यापक परिवर्तनों,नई उत्पादन गतिविधियों, तकनीकी नवाचारों और उभरते क्षेत्रों को प्रतिबिंबित करती है।भारत की आर्थिक गतिविधियों में उद्योग क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।कृषि,सेवा और उद्योग—इन तीनों स्तंभों में उद्योग ऐसा क्षेत्र है जो उत्पादन,रोजगार, निर्यात,निवेश और तकनीकी विकास को गति देता है।किसी भी देश की औद्योगिक सेहत को समझने के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक को सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में गिना जाता है।यही कारण है कि नीति-निर्माता,अर्थशास्त्री,उद्योग जगत, वित्तीय संस्थान और निवेशक आईआईपी के आंकड़ों पर विशेष ध्यान देते हैं।औद्योगिक उत्पादन सूचकांक देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन के स्तर में होने वाले परिवर्तन को मापता है। इसके माध्यम से यह पता चलता है कि उद्योगों की उत्पादन क्षमता किस दिशा में बढ़ रही है, किन क्षेत्रों में तेजी है और कहाँ सुधार की आवश्यकता है।समय के साथ अर्थव्यवस्था बदलती है,उत्पादन के स्वरूप बदलते हैं और नई तकनीकें पुराने उत्पादों का स्थान लेती हैं। ऐसे में सूचकांक की आधार संरचना को भी अद्यतन करना आवश्यक हो जाता है।भारत में आईआईपी की आधार वर्ष श्रृंखला समय-समय पर संशोधित की जाती रही है।इसका उद्देश्य यही रहा है कि देश की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित किया जा सके।वर्ष 2011-12 पर आधारित पुरानी श्रृंखला अपने समय के अनुरूप थी, लेकिन पिछले एक दशक में भारत की औद्योगिक संरचना में व्यापक बदलाव आए हैं। आज का भारत मोबाइल फोन निर्माण,इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, अक्षय ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण, चिकित्सा उपकरण निर्माण, ड्रोन तकनीक, डिजिटल अवसंरचना और उच्च तकनीकी उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। इन परिवर्तनों को पुराने आधार वर्ष के माध्यम से पूरी तरह अभिव्यक्त करना संभव नहीं था।नई श्रृंखला इसी आवश्यकता का परिणाम है। आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित यह सूचकांक देश की वर्तमान औद्योगिक वास्तविकताओं के अधिक निकट है। इसमें उन क्षेत्रों को समुचित स्थान दिया गया है जो आज भारत की औद्योगिक प्रगति के प्रमुख वाहक बन चुके हैं।यह नई व्यवस्था न केवल उत्पादन संरचना को अद्यतन करती है, बल्कि आर्थिक विश्लेषण को भी अधिक सटीक बनाती है।
नई श्रृंखला की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें अनेक नए उत्पाद समूहों को शामिल किया गया है। बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन उत्पादों को स्थान दिया गया है जो आज की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, वैक्सीन,लिथियम- आयन बैटरियां,सीसीटीवी कैमरे, स्मार्ट कार्ड उत्पाद तथा विमानन एवं अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े उपकरण आज भारत की औद्योगिक पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। इनका समावेश इस बात का संकेत है कि भारतीय उद्योग पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़कर तकनीक-आधारित और नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है।इसके साथ ही कई ऐसे उत्पादों और गतिविधियों को बाहर किया गया है जिनका आर्थिक महत्व समय के साथ कम हो चुका है।यह परिवर्तन किसी भी सांख्यिकीय प्रणाली के लिए आवश्यक होता है क्योंकि अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर तभी सामने आती है जब उसमें वर्तमान उत्पादन संरचना को उचित महत्व दिया जाए।नई श्रृंखला का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष इसका विस्तृत औद्योगिक दायरा है।पहले जिन गतिविधियों को सीमित महत्व प्राप्त था,उन्हें अब अधिक व्यवस्थित रूप से सम्मिलित किया गया है।जल आपूर्ति,गैस आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन तथा अन्य आधुनिक उपयोगिता सेवाओं को भी औद्योगिक गतिविधियों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा गया है। इससे औद्योगिक उत्पादन का आकलन अधिक व्यापक और वास्तविक होगा।भारत की ऊर्जा संरचना में भी पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।सौर ऊर्जा,पवन ऊर्जा और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार अभूतपूर्व गति से हुआ है।देश ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।नई आईआईपी श्रृंखला में ऊर्जा क्षेत्र के वर्गीकरण को अधिक वैज्ञानिक और समसामयिक बनाया गया है।इससे पारंपरिक ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा दोनों की प्रगति का अधिक स्पष्ट आकलन संभव होगा।
खनन क्षेत्र भी भारतीय औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है।आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप खनिज संसाधनों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।विशेष रूप से दुर्लभ खनिज और रणनीतिक खनिज भविष्य की तकनीकों के लिए अत्यंत आवश्यक माने जा रहे हैं। नई श्रृंखला में खनन गतिविधियों को अधिक विस्तृत दृष्टिकोण से शामिल किया गया है,जिससे इस क्षेत्र के योगदान का बेहतर विश्लेषण किया जा सकेगा।नई आईआईपी श्रृंखला का महत्व केवल सांख्यिकीय सुधार तक सीमित नहीं है।इसका सीधा संबंध सरकार की विकास नीतियों और औद्योगिक रणनीतियों से भी है। जब किसी देश के पास अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होते हैं, तब नीतियों का निर्माण भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।उद्योगों की वास्तविक स्थिति,क्षेत्रवार विकास और उत्पादन क्षमता का आकलन बेहतर होने से संसाधनों का उपयोग अधिक कुशलता से किया जा सकेगा।वर्तमान समय में भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम,रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को प्रोत्साहन तथा निर्यात वृद्धि की रणनीतियां इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं।इन योजनाओं की सफलता का सही मूल्यांकन तभी संभव है जब औद्योगिक आंकड़े भी वास्तविक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करें। नई आईआईपी श्रृंखला इस आवश्यकता को पूरा करती है।विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच निवेशकों का विश्वास भी सटीक आंकड़ों पर आधारित होता है।घरेलू और विदेशी निवेशक किसी देश में निवेश से पहले उसकी औद्योगिक स्थिति, उत्पादन क्षमता और विकास संभावनाओं का अध्ययन करते हैं।नई श्रृंखला भारतीय अर्थव्यवस्था की औद्योगिक तस्वीर को अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करेगी,जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा।इसके अतिरिक्त यह परिवर्तन शोधकर्ताओं,अर्थशास्त्रियों और नीति विश्लेषकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।उन्हेंऔद्योगिक विकास की नई प्रवृत्तियों का अध्ययन करने और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने के लिए बेहतर आधार उपलब्ध होगा। इससे आर्थिक अनुसंधान की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
निश्चित रूप से किसी भी नई श्रृंखला के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। पुरानी और नई श्रृंखला के आंकड़ों के बीच तुलनात्मक अध्ययन,दीर्घकालिक रुझानों का विश्लेषण तथा आंकड़ों की निरंतरता बनाए रखना प्रारंभिक चरण में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन सांख्यिकीय विशेषज्ञों द्वारा अपनाई गई आधुनिक पद्धतियां इस संक्रमण को सुगम बनाने में सहायक होंगी।भारत आज केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं,बल्कि वैश्विक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर सामने आ रहा है।विनिर्माण, प्रौद्योगिकी,नवाचार और हरित विकास के क्षेत्र में देश ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्हें मापने के लिए भी आधुनिक और विश्वसनीय संकेतकों की आवश्यकता है।नई आईआईपी श्रृंखला इसी आवश्यकता की पूर्ति करती है।वास्तव में यह नई श्रृंखला भारत की औद्योगिक यात्रा का अद्यतन दस्तावेज है।इसमें देश की बदलती उत्पादन क्षमता,तकनीकी प्रगति, औद्योगिक विविधता और आर्थिक आत्मविश्वास की झलक दिखाई देती है।यह केवल आंकड़ों का पुनर्गठन नहीं,बल्कि उस नए भारत का प्रतिबिंब है जो आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जब देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब यह नई औद्योगिक उत्पादन श्रृंखला नीतिगत निर्णयों,आर्थिक विश्लेषण और औद्योगिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।यह भारत की औद्योगिक शक्ति को समझने का नया मानक बनेगी और आने वाले वर्षों में आर्थिक प्रगति की विश्वसनीय तस्वीर प्रस्तुत करेगी।यही इस नई श्रृंखला की सबसे बड़ी उपलब्धि और प्रासंगिकता है।





