देश के भविष्य से प्रधान नहीं हो सकते है, केंद्रीय शिक्षामंत्री

Nothing can take precedence over the country's future: Union Education Minister

नरेंद्र तिवारी

भारत जैसे प्रजातंत्रिक देश में जवाबदेही का महत्वपूर्ण स्थान हैं। लोक सेवक जनता कि सेवा के लिए होता हैं, उसके नैतृत्व में संबंधित विभाग द्वारा किये गए अच्छे कार्य स्वयं एवं सरकार कि वाहवाही एवं सराहना का कारण बनते हैं। इसके उलट लोक सेवक के नैतृत्व में कि जाने वाली विभागीय गलतियां, त्रुटियां स्वयं एवं सरकार कि आलोचना का कारण बनती हैं। नीट परीक्षा पेपर लिक के बाद से देश में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे कि मांग कि जा रही हैं। नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लिक के बाद उत्पन्न अत्यधिक मानसिक तनाव, हताशा के कारण देश भर में 12 से 16 के करीब छात्रों द्वारा खुदकुशी करने कि खबर सामने आई हैं। प्रजातंत्र में जवाबदेही और सामूहिक उत्तरदायित्व होना चाहिए। कोई इससे बच नहीं सकता हैं। एक स्कुल का प्राचार्य परीक्षा परिणाम बिगड़ने पर उत्तरदायी माना जाता हैं, जबकि प्राचार्य स्कुल का प्रबंधक होता हैं, उस पर शिक्षकीय दायित्व कम ही होता हैं, किंतु संस्था प्रमुख होने के कारण जिम्मेदारी प्राचार्य कि मानी जाती हैं।

इस प्रकार भारत सरकार के शिक्षामंत्री पर भी सामूहिक उत्तरदायित्व एवं जवाबदेही का सिद्धांत लागू होता हैं। इसी जवाबदेही और सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को पालन करवाए जाने कि मांग को लेकर नवनिर्मित काकरोच जनता पार्टी के बैनर तले पहले तो देश के बड़े शहरों में फिर देश कि राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से प्रदर्शन चल रहा हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे कि मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी इस विषय पर देश भर में आंदोलन चला रखा हैं।केंद्र सरकार इस विषय पर खामोश नजर आ रही हैं। इस प्रकार आंदोलनकारियों कि अनदेखी करना देश कि वर्तमान सरकार कि आदत में शुमार हो गया हैं। सरकार को देश के भविष्य से अधिक महत्वपूर्ण शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहना उचित लग रहा हैं। देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल किये जा रहे हैं। सरकार कि और से इसका जवाब कोई देने को तैयार नहीं हैं। 3 मई को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक होने के बाद रद्द किया गया। इसके बाद 21 जून को री-नीट परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा के बाद टीवी चैनल को दिए अपने साक्षात्कार में देश केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने री-नीट के सफल आयोजन को उपलब्धि मानते हुए उन्होंने इसे पारदर्शी और लिक प्रूफ माना। उन्होंने री-नीट के सफल आयोजन के लिए सहयोगी एवं सरकार कि खुले मन से तारीफ़ कि इसी साक्षात्कार में उन्होंने राहुल गांधी पर देश के छात्रों को गुमराह करने का आरोप और काकरोच जनता पार्टी को उन्होंने देश को बाटने वाली B टीम बताते हुए कहा जो देश के टुकड़े करना चाहते हैं वह जंतर-मंतर पर डपली बजा रहे हैं। देश इसकी समीक्षा कर रहा हैं।

देश के शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नीट पेपर लिक के बाद दिए अपने साक्षात्कार में जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन को राष्ट्रविरोधी बताना उचित नहीं हैं। अपने विचार से विपरीत विचार को देश के टुकड़े करने वाला, राष्ट्र विरोधी विचार बताना एक फैशन हो गया हैं। प्रधान ने उसी फैशनेबल भाषा का उपयोग किया। जबकि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहरा रहा हैं। राष्ट्र भक्ति और राष्ट्रीयता से जुड़े गीतों से युवा लबरेज दिखाई दे रहे हैं।

जंतर-मंतर पर सबसे अधिक गूंज केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्याग-पत्र को लेकर सुनाई दे रही हैं। वही शिक्षामंत्री जो 21 जून कि री-नीट परीक्षा को सफल मानकर सामूहिक उत्तरदायित्व और जबवाबदेही के साथ सरकार कि पिट थपथपा रहे हैं। उन्हें 3 मई को नीट पेपर लिक सामूहिक उत्तरदायित्व एवं जवाबदेही के सिद्धांत से परे करते दिखाई देता हैं। गड़बड़िया हुई हैं, तो देश शिक्षामंत्री उसके लिए उत्तरदायी भी है। उन्हें पेपर लिक काण्ड के बाद तत्काल अपना अपने पद से त्याग-पत्र देकर देश कि जनता से माफ़ी मागना चाहिए थी। किंतु शायद ऐसा करने का साहस उनमे नहीं है। देश समीक्षा कर रहा है, आपकी सफलता और विफलता कि भी, सामूहिक उत्तरदायित्व और जवाबदेही के सिद्धांतो के पालन में सफलता और विफलता के दौरान अंतर करने के मामले में भी और देश यह भी समीक्षा कर रहा है कि देश के युवा जो शिक्षा व्यवस्था में खामियों को लेकर अपने भविष्य कि चिंता को लेकर झंडा उठा रहे है, उन्हें राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा है। प्रजातंत्र में सत्ता पक्ष के खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ राष्ट्र विरोधी नहीं होती, यह आवाजे भी राष्ट्र निर्माण कि आवाजे है। जंतर-मंतर दिल्ली में है। देश कि राजनैतिक पार्टियां भी भारत के प्रजातंत्र कि देन है। यह पार्टियां भी उतनी ही राष्ट्रीय है, जितनी देश कि सता में काबिज दल, इनका सोच भी बेहतर राष्ट्र का निर्माण है। केंद्र सरकार को चाहिए देश के भविष्य से प्रधान नहीं हो सकते देश के केंद्रीय शिक्षामंत्री इन्हे बदला भी जा सकता है। नीट पेपर लिक मामला सामुदायिक उत्तर दायित्व और जवाबदेही का विषय है।