रविवार दिल्ली नेटवर्क
20 जून 2026 को गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान द्वारा दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा के सभागार में विष्णु प्रभाकर की 115 वीं जयंती के अवसर पर सन्निधि संगोष्ठी की ओर से आयोजित समारोह में विष्णु प्रभाकर स्मृति राष्ट्रीय प्रोत्साहन सम्मान समारोह में देश की पाँच हस्तियों को सम्मानित किया गया । सम्मानित होने वाली हस्तियों में अहमदाबाद की कश्यपी परीक्षित जोशी को अनुवाद व पत्रकारिता के लिए,प्रयागराज की शाम्भवी दुबे को साहित्य के लिए ,द्वारका ( नई दिल्ली) की डॉ पारुल तोमर को कला के लिए ,चंबा हिमाचल के डॉ प्रशांत रमण रवि को शिक्षा के लिए और नर्मदापुर (म.प्र.) की मनीषा ठाकुर धुर्वे को समाज सेवा के लिए सम्मानित किया गया।
स्वागत भाषण देते हुए विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री अतुल प्रभाकर ने कहा कि विष्णु प्रभाकर की याद में यह सम्मान खासकर उन हस्तियों को दिया जाता है जो कला, साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा ,शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करते है। यह सम्मान हर साल विष्णु प्रभाकर के जन्मदिवस के अवसर सन्निधि संगोष्ठी की ओर से दिया जाता है। जिसका आयोजन गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा, नई दिल्ली और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान, नोएडा द्वारा किया जाता है।पिछले एक दशक में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली अनेक हस्तियों को “विष्णु प्रभाकर राष्ट्रीय स्मृति सम्मान “ दिया जा चुका है।
डॉ पारुल तोमर की लोक कला की पहचान देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सुगंध बिखेर रही है । देश-विदेश की सरकारी गैर -सरकारी पत्रिकाओं के आवरणों पर उनके चित्र प्रकाशित होते रहते हैं । उल्लेखनीय है कि उन्होंने सूरसागर के पदों पर आधारित बाल कृष्ण के १२ चित्र , कविताकोश के वार्षिक कैलेंडर के लिए भी बनाए हैं । भारतीय शिक्षा बोर्ड की पाठ्य पुस्तकों के लिए भी उन्होंने रेखांकन किया है । कोरोना काल में उनके बाल चित्रों ने खूब लोकप्रियता बटोरी ।लोकपर्वो, लोककाव्य, लोककथाओं पर आधारित उनके चित्र उनकी पहचान बन चुके हैं । उन्हें अनेक कला मंचों और साहित्य मंचो से सम्मानित और पुरस्कृत किया जा चुका है । इस आयोजन में उनके जीवनसाथी प्रोफेसर विनीत कुमार ( NSUT) उनके साथ थे।
डॉ पारुल ने बताया कि “ यह उनके लिए गौरव और कृतज्ञता के पल हैं। एक महान साहित्यकार के नाम पर दिए जाने वाले इस राष्ट्रीय सम्मान के साथ मेरे नाम का जुड़ना मेरे लिए विशेष उपलब्धि है ।मैं यह पुरस्कार अपने माता-पिता,परिवार और गुरुजनों को समर्पित करती हूँ।”
मुख्य अतिथि ,आध्यात्मिक मार्गदर्शक,साहित्यकार विजय विजन एवम् प्रसिद्ध साहित्यकार, नई धारा पत्रिका के संपादक शिवनारायण के सानिध्य में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉ लक्ष्मीशंकर बाजपेई जी ने की।
आयोजन को कथाकार पूरन सिंह,ममता किरण, कुसुम शाह, नंदन शर्मा, सदानंद कवीश्वर,लाघवी, डा धर्मवीर सिंह,आदि ने भी संबोधित किया। ।कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी ने किया।समारोह में देशभर के कवि,लेखक, समाजसेवी, कलाकार और पत्रकार आदि उपस्थित रहे।





