12 जुलाई से शुरू हो सकती है स्काई-रूट के ‘विक्रम-1’ की उड़ान

Skyroot's 'Vikram-1' flight could launch on July 12

मुंबई (अनिल बेदाग): स्काई रूट एयरोस्पेस ने घोषणा की कि उसके विक्रम-1 लॉन्च वाहन की पहली परीक्षण उड़ान के लिए लॉन्च विंडो खोल दी गई है। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिट श्रेणी का रॉकेट है। टेस्ट फ्लाइट-1 का लक्ष्य 12 जुलाई से पहले नहीं रखा गया है और यह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) में असेंबली और परीक्षण कार्यों की पूर्णता के साथ-साथ मौसम, सुरक्षा और रेंज क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। लॉन्च विंडो 4 अगस्त तक खुली रहेगी। स्काई रूट के विक्रम-1 के सभी चरणों का सफलतापूर्वक एकीकरण कर उन्हें लॉन्च पैड पर स्थापित कर दिया गया है। यह मिशन प्रणोदन, स्टेज पृथक्करण, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और समग्र वाहन प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करेगा, जिससे स्काई रूट को पूर्ण रूप से व्यावसायिक लॉन्च कंपनी बनने में मदद मिलेगी।

पवन कुमार चंदाना, सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्काई रूट एयरोस्पेस ने कहा,“मिशन आगमन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विक्रम-1 के प्रत्येक सिस्टम के वास्तविक उड़ान प्रदर्शन से डेटा प्राप्त करना है। हम जानना चाहते हैं कि रॉकेट उड़ान भरने से लेकर आरोहण के हर चरण में कैसा प्रदर्शन करता है। इस प्रकार के डेटा को पूरी तरह से जमीनी परीक्षणों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इससे हमें अपने डिजाइनों को सत्यापित करने और भविष्य के रॉकेट विकास में मदद मिलेगी। जिस क्षण विक्रम-1 उड़ान भरेगा, भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग एक ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएगा, जिसे उसने पहले कभी नहीं छुआ है।”

नागा भरत डाका, सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी, स्काई रूट एयरोस्पेस ने कहा,“भारत में लॉन्च वाहन बनाने के सपने से लेकर अब ऑर्बिट उड़ान का प्रयास करने तक की यात्रा बेहद असाधारण रही है। वर्ष 2022 में विक्रम-एस के माध्यम से हमने अपनी तकनीकी क्षमताओं की नींव को स्थापित किया था। अब विक्रम-1 के साथ हम भारत में निर्मित, भारत और दुनिया के लिए विश्वसनीय तथा उच्च आवृत्ति वाले लॉन्च कार्यक्रम की दिशा में अपना सबसे बड़ा कदम उठा रहे हैं।”

विक्रम-1 सात मंजिला ऊंचाई वाला बहु-चरणीय ऑर्बिटल लॉन्च वाहन है, जिसे पूर्ण कार्बन-कंपोजिट संरचना के साथ विकसित किया गया है। इसमें कंपनी द्वारा विकसित प्रणोदन प्रणालियाँ, थ्री-डी प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट – एलइओ) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। उनकी पहली उड़ान का लक्ष्य 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री की कक्षीय झुकाव वाली कक्षा प्राप्त करना है। इस उड़ान के लिए तैयार रॉकेट का अनावरण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में स्काई रूट के इन्फिनिटी परिसर के उद्घाटन के दौरान किया था।

आर्थिक दृष्टि से भी यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्तमान लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। स्वदेशी लॉन्च क्षमता इस वृद्धि का प्रमुख आधार बनेगी और भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगी।