संजय सक्सेना
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का चार और पांच जुलाई को होने वाला लखनऊ दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है। आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह दौरा बेहद रणनीतिक और निर्णायक साबित हो सकता है। पार्टी हाईकमान और संगठन के बीच तालमेल बिठाने और मिशन 2027 की रूपरेखा तैयार करने के लिए नबीन का यह दौरा किसी ‘मास्टर स्ट्रोक’ से कम नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि नबीन के इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान उत्तर प्रदेश के लिए नए चुनाव प्रभारी के नाम की घोषणा की जा सकती है, जो प्रदेश में पार्टी के भविष्य की चुनावी दिशा तय करेगा। नितिन नबीन के इस दौरे को लेकर सबसे बड़ी उम्मीद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने की है। हालांकि बीजेपी ने हाल ही में अपनी नई प्रदेश टीम की घोषणा की है और उसमें सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन का पूरा ध्यान रखा है, लेकिन अभी भी ‘चुनाव प्रभारी’ का पद खाली पड़ा है, जिसे भरने के लिए दिल्ली से लखनऊ तक मंथन का दौर जारी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नबीन लखनऊ में वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें करेंगे, जिसमें बूथ स्तर के प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने और विपक्षी दलों की रणनीतियों का काट खोजने पर चर्चा होगी। यह दौरा केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2027 की तैयारियों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप देने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि पार्टी लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी का नया रिकॉर्ड बना सके।
भाजपा अध्यक्ष के दौरे ने उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी के रूप में संभावित नामों की चर्चाओं ने सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है। चर्चाओं में सबसे प्रमुख नाम केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद विनोद तावड़े का है। बीते छह महीनों से तावड़े का उत्तर प्रदेश में दखल काफी बढ़ गया है, चाहे वह मंत्रिमंडल के विस्तार में नामों का पैनल तैयार करना हो या नई प्रदेश टीम के गठन में भूमिका, तावड़े की सक्रियता स्पष्ट दिखाई देती है। उनके संगठनात्मक कौशल और महाराष्ट्र में पार्टी को सत्ता तक पहुँचाने के अनुभव को देखते हुए उन्हें इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। इसके अलावा, सुनील बंसल का नाम भी चर्चा में बना हुआ है, जिनकी उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति पर गहरी पकड़ है और पश्चिम बंगाल में उनके चुनावी प्रबंधन की भूमिका को बीजेपी हाईकमान आज भी एक बड़ा उदाहरण मानता है। पहले भी वह यूपी के प्रभारी रह चुके हैं। इसके अलावा राधा मोहन सिंह का नाम भी वरिष्ठता के आधार पर चर्चा में है, हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद उनकी सक्रियता के स्तर को लेकर कयास लगाए जाते रहे हैं। इन नामों के अलावा, पार्टी किसी नए और कद्दावर दलित या पिछड़े चेहरे को आगे करके एक बड़ा सामाजिक संदेश देने का प्रयोग भी कर सकती है, जो पार्टी के श्सबका साथ, सबका विकासश् के एजेंडे को धार दे सके।
नितिन नबीन के लखनऊ दौरे से केवल प्रभारी की घोषणा ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण उम्मीदें भी जुड़ी हैं। पार्टी कार्यकर्ता इस बात की बाट जोह रहे हैं कि आगामी चुनावों के लिए किस तरह के अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम तय किए जाएंगे। ऐसी संभावना है कि नबीन सरकार और संगठन के बीच समन्वय को और बेहतर बनाने के लिए निर्देश दे सकते हैं ताकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। इसके साथ ही, उन 61 सीटों पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है जहाँ पिछले चुनावों में पार्टी को संघर्ष करना पड़ा था। पार्टी का मुख्य लक्ष्य 2027 में हैट्रिक लगाने का है, और इसके लिए नबीन का यह दौरा संगठन में नई जान फूंकने का काम करेगा। कुल मिलाकर, यह दौरा भाजपा के मिशन 2027 के आधिकारिक शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ से न केवल सेनापति के नाम की घोषणा होगी, बल्कि पार्टी का पूरा चुनावी एजेंडा भी तय किया जाएगा।





