मुंबई (अनिल बेदाग) : भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से एक सवाल भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है—क्या केवल इनोवेशन और मुनाफा ही किसी कंपनी की सफलता तय करते हैं? बड़ा बिजनेस लीडरशिप फनल (LFP) कार्यक्रम में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस राजेश बिंदल और डॉ. विवेक बिंद्रा ने इस सवाल का स्पष्ट जवाब दिया कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी उसका भरोसा, नैतिक नेतृत्व और मजबूत गवर्नेंस होती है।
कार्यक्रम में जस्टिस बिंदल ने अपने न्यायिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। उन्होंने उद्यमियों को सलाह दी कि कॉम्प्लायंस को केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक ताकत के रूप में अपनाएं। उनके अनुसार, मजबूत संस्थान किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि सशक्त प्रक्रियाओं, स्पष्ट मूल्यों और जिम्मेदार संस्कृति से बनते हैं।
डॉ. विवेक बिंद्रा ने भी इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि तकनीक और इनोवेशन व्यवसाय को गति दे सकते हैं, लेकिन उसकी विश्वसनीयता संगठन की संस्कृति तय करती है। उन्होंने कहा कि हर उद्यमी के सामने ऐसे अवसर आते हैं, जब उसे तात्कालिक लाभ और दीर्घकालिक विश्वास के बीच चुनाव करना पड़ता है। जो कंपनियां शुरुआत से ही नैतिकता और सुशासन को अपनाती हैं, वही समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं।
इस संवाद ने यह संदेश दिया कि विकसित भारत के निर्माण में केवल सफल कंपनियां नहीं, बल्कि भरोसे, ईमानदारी और मजबूत संस्थागत मूल्यों पर आधारित उद्यम ही भविष्य की असली पहचान बनेंगे।





