रविवार दिल्ली नेटवर्क
उदयपुर : पुरुषोत्तम मास के तहत उदयपुर के सुप्रसिद्ध जगदीश मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पण्डित जितेन्द्र मोहन भट्ट इन दिनों दसवें स्कन्द में भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का मनोहारी वर्णन कर रहे हैं ।
शनिवार को उन्होंने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग का मर्दन का रोचक प्रसंग का वाचन करते हुए कहा यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश देने वाली लीला है। श्रीकृष्ण ने यमुना में रहने वाले विषैले कालिया नाग को पराजित कर उसके अहंकार का नाश किया और यमुना के जल को विषमुक्त बनाया।
पण्डित भट्ट ने श्रौताओं से कहा कि कालिया नाग मनुष्य के भीतर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विषैले विकारों का प्रतीक है। इन पर नियंत्रण ही वास्तविक आध्यात्मिक विजय है। यह लीला हमें सिखाती है कि अहंकार, प्रदूषण और बुराइयों का नाश कर सत्य, साहस, करुणा और प्रकृति संरक्षण के मार्ग पर चलना ही जीवन का वास्तविक धर्म है।
इस प्रसंग से कई और भी महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का कालिया नाग के फनों पर नृत्य करना यह दर्शाता है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म के सामने उसे झुकना ही पड़ता है। इसके साथ ही इसमें पर्यावरण संरक्षण का गहरा सन्देश भी छुपा है। कालिया नाग के विष से यमुना का जल दूषित हो गया था। श्रीकृष्ण ने उसे मुक्त कर नदी को स्वच्छ बनाया। यह संदेश देता है कि जल, नदियों और प्रकृति को प्रदूषण से बचाना मानव का कर्तव्य है।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया को मारा नहीं, बल्कि उसे यमुना में छोड़कर समुद्र जाने का आदेश दिया। इससे शिक्षा मिलती है कि सुधार की संभावना हो तो दुष्ट को भी अवसर देना चाहिए। बालक कृष्ण ने पूरे ब्रज को भयमुक्त किया। यह बताता है कि धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति बड़े से बड़े संकट का सामना कर सकता है।





