यूपी में तन-मन भिगोने जल्द आ रहा है मानसून

The monsoon is arriving soon in UP to drench both body and soul

संजय सक्सेना

उत्तर प्रदेश में गर्मी से परेशान लोगों के लिये जल्द अच्छी खबर आने वाली है। यूपी में मानसून 27 से 30 जून तक पूर्वी-पश्चिमी क्षेत्रों में दस्तक दे सकता है, जो 5 जुलाई तक पूरे राज्य में पूरी तरह छा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, जून के तीसरे सप्ताह से मानसूनी गतिविधियां तेजी से बढ़ेगी और महीने के अंत तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। पिछले वर्षों के ट्रेंड और आईएमडी की भविष्यवाणी के आधार पर, इस बार भी मानसून 27 से 30 जून के बीच राज्य में पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ विचलन के कारण पूर्वी यूपी में पहले और पश्चिमी यूपी में थोड़े बाद में आने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रवेश आमतौर पर दो चरणों में होता है। पूर्वी हिस्सों में मानसून 15 से 20 जून के बीच दस्तक देता है, जबकि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में 25 से 27 जून के बीच फैल जाता है। मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद जैसे पश्चिमी क्षेत्रों में मानसून 27-30 जून तक आने की संभावना है। इस तरह पूर्वी यूपी में मानसून पहले प्रवेश करेगा और धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में छाएगा। 5 जुलाई तक पूरे उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह छा जाएगा। वर्तमान में (22 जून 2026) देश के ज्यादातर हिस्सों में प्री-मानसून एक्टिविटी है और 23 जून के आसपास मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, उड़ीसा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में अधिकतम वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होती है, जो जून से सितंबर तक केन्द्रित होती है। राज्य की कुल वर्षा में पहाड़ी क्षेत्रों में वार्षिक औसत 170 सेमी तक हो सकता है, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में 84 सेमी तक रहता है। इस बार भी उम्मीद है कि मानसून जमकर बरसेगा, लेकिन मौसम के तेवरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बारिश सावधानी भी मांगती है, क्योंकि भीषण गर्मी से राहत मिलने जा रही है, लेकिन तेज बारिश से थोड़ा-बहुत भी हो सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा की मात्रा में परिवर्तनशीलता 25 फीसदी से कम, जबकि शेष उत्तर प्रदेश में 25 से 50 फीसदी के बीच रहती है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्षा कहीं कम तो कहीं ज्यादा देखने को मिलती है। राज्य के पूर्वी भाग में पश्चिमी भाग की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। सबसे कम वर्षा बुन्देलखण्ड क्षेत्र में प्राप्त होती है। यह एक महत्वपूर्ण पैटर्न है, क्योंकि बुंदेलखंड पिछले वर्षों से वर्षा की कमी से परेशान है और इस क्षेत्र में कृषि पर सीधा प्रभाव होता है। पूर्वी यूपी में वर्षा अधिक होने के कारण खेती बेहतर होगी, लेकिन पश्चिमी यूपी में भी पर्याप्त वर्षा की उम्मीद है। मध्य यूपी में वर्षा पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों के बीच के स्तर पर रहने की संभावना है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में सबसे कम वर्षा प्राप्त होती है, जो इस क्षेत्र की जल संकट समस्या को बढ़ाती है। यह पैटर्न वर्षों से बना है और दक्षिण-पश्चिम मानसून के मार्ग में इस क्षेत्र की स्थिति के कारण है। बुंदेलखंड में वर्षा की कमी के कारण खेती पर गंभीर प्रभाव होता है और किसानों को संकट का सामना करना पड़ता है। इस क्षेत्र में जल संरक्षण, बांध निर्माण और सतत कृषि सुधार की भी आवश्यकता बढ़ जाती है। यदि इस बार भी बुंदेलखंड में वर्षा कम होती है, तो सरकार को जल संकट के समाधान के लिए तत्परता दिखानी चाहिए। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में वर्षा कृषि पर सीधा प्रभाव डालती है, क्योंकि राज्य भारत का कृषि हृदय है। पूर्वी यूपी में अधिक वर्षा के कारण खेती बेहतर होगी, लेकिन बुंदेलखंड में वर्षा की कमी खेती को प्रभावित कर सकती है। बारिश से भीषण गर्मी से राहत मिलने जा रही है, लेकिन मौसम के तेवरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बारिश सावधानी भी मांगती है, क्योंकि तेज बारिश से बाढ़, भूस्खलन, जलभराव जैसे हालात हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा कृषि उत्पादन पर सीधा प्रभाव डालती है और शहरी क्षेत्रों में जल निकासी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।